राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 15 जून 2026
तृणमूल कांग्रेस (TMC) में हुई बड़ी बगावत को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का दावा है कि लोकसभा में तीसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी TMC को तोड़ने और बागी सांसदों का नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय कराने के पीछे गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका है। पार्टी का आरोप है कि यह पूरा राजनीतिक अभियान NDA को लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचाने की रणनीति का हिस्सा है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोमवार को कहा कि TMC में हुई टूट कोई सामान्य राजनीतिक घटना नहीं है, बल्कि इसके पीछे सुनियोजित राजनीतिक योजना काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बागी सांसदों के विलय और नए राजनीतिक समीकरणों का उद्देश्य लोकसभा में NDA की संख्या बढ़ाना है ताकि भविष्य में बड़े राजनीतिक और संवैधानिक फैसलों का रास्ता आसान हो सके।
जयराम रमेश ने गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि जब तक वे अपने पद पर बने रहेंगे, तब तक संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक परंपराओं और राजनीतिक शुचिता पर खतरा बना रहेगा। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों को कमजोर करने और क्षेत्रीय पार्टियों में टूट कराने की राजनीति अब खुलकर सामने आ रही है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब TMC के 20 बागी सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर चुके हैं और उन्होंने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है। बागी सांसदों का दावा है कि उनके साथ पार्टी के दो-तिहाई से अधिक सांसद हैं, इसलिए दल-बदल कानून के तहत उनकी सदस्यता पर कोई खतरा नहीं है।
उधर TMC नेतृत्व ने इस कदम को अवैध और असंवैधानिक बताया है। पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी पहले ही लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर बागी सांसदों को अलग समूह के रूप में मान्यता न देने की मांग कर चुके हैं। TMC का कहना है कि पार्टी एक है और उसके भीतर किसी समानांतर गुट को मान्यता नहीं दी जा सकती।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बागी सांसदों का विलय कानूनी रूप से मान्य हो जाता है तो इसका असर केवल बंगाल की राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संसद के शक्ति संतुलन पर भी पड़ सकता है। इसी वजह से यह घटनाक्रम राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है।
फिलहाल कांग्रेस के आरोपों पर बीजेपी की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि बीजेपी लगातार यह कहती रही है कि विपक्षी दलों की टूट और नेताओं का पार्टी छोड़ना उनके अपने आंतरिक संकट और नेतृत्व की विफलता का परिणाम है, न कि किसी बाहरी दबाव का।
अब सबकी नजर लोकसभा अध्यक्ष के फैसले और आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी है। क्योंकि TMC में शुरू हुई यह बगावत केवल बंगाल की राजनीति नहीं, बल्कि 2029 की राष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी तय कर सकती है।




