अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग | 14 जून 2026
अमेरिका और चीन के बीच जारी रणनीतिक एवं आर्थिक प्रतिस्पर्धा एक बार फिर नए विवाद में बदल गई है। चीन ने अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) द्वारा कई प्रमुख चीनी कंपनियों को सैन्य-संबद्ध कंपनियों की सूची में शामिल किए जाने का कड़ा विरोध किया है। बीजिंग ने इसे दोनों देशों के बीच हाल ही में बनी सहमति के खिलाफ कदम बताते हुए अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना की है।
दरअसल, अमेरिकी रक्षा विभाग ने 8 जून को अपनी उस सूची का विस्तार किया जिसमें उन कंपनियों को शामिल किया जाता है जिनके चीन की सेना से कथित संबंध होने का संदेह है। इस नई सूची में इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता BYD, ई-कॉमर्स और टेक्नोलॉजी दिग्गज Alibaba तथा इंटरनेट कंपनी Baidu जैसी बड़ी निजी चीनी कंपनियों को भी शामिल किया गया है। इस सूची में शामिल होने के बाद इन कंपनियों के लिए अमेरिकी रक्षा अनुबंध हासिल करना लगभग असंभव हो जाएगा और भविष्य में इनके खिलाफ अतिरिक्त प्रतिबंधात्मक कदम भी उठाए जा सकते हैं।
चीन के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका तथ्यों की अनदेखी कर रहा है और राष्ट्रीय सुरक्षा की अवधारणा का राजनीतिक इस्तेमाल कर रहा है। चीनी अधिकारियों का कहना है कि ये कंपनियां स्वतंत्र व्यावसायिक संस्थाएं हैं और इन्हें सैन्य गतिविधियों से जोड़ना अनुचित तथा भेदभावपूर्ण है। बीजिंग का आरोप है कि वॉशिंगटन चीनी कंपनियों के वैश्विक विस्तार को रोकने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में नुकसान पहुंचाने के लिए ऐसे कदम उठा रहा है।
चीन ने यह भी कहा कि यह फैसला पिछले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच हुई शिखर वार्ता में बनी सकारात्मक सहमति की भावना के विपरीत है। दोनों देशों के नेताओं ने उस बैठक में आर्थिक सहयोग, व्यापारिक स्थिरता और तनाव कम करने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही थी। ऐसे में चीन का मानना है कि नई सूची जारी करना आपसी विश्वास को कमजोर करने वाला कदम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि BYD, Alibaba और Baidu जैसी कंपनियों को सूची में शामिल करना केवल कारोबारी निर्णय नहीं बल्कि व्यापक भू-राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। अमेरिका लंबे समय से चीन की तकनीकी प्रगति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से देख रहा है। वहीं चीन इसे तकनीकी क्षेत्र में उसकी बढ़ती ताकत को रोकने का प्रयास मानता है।
BYD वर्तमान में दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों में शामिल है और वैश्विक बाजार में तेजी से विस्तार कर रही है। Alibaba चीन की सबसे प्रभावशाली डिजिटल और ई-कॉमर्स कंपनियों में गिनी जाती है, जबकि Baidu को चीन के प्रमुख एआई और इंटरनेट प्लेटफॉर्म के रूप में देखा जाता है। ऐसे में इन कंपनियों पर अमेरिकी निगरानी बढ़ने से वैश्विक निवेशकों और तकनीकी बाजारों पर भी असर पड़ सकता है।
विश्लेषकों का कहना है कि यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब दुनिया पहले से ही अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध, तकनीकी प्रतिस्पर्धा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के पुनर्गठन जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका असर केवल दोनों अर्थव्यवस्थाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल चीन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अमेरिकी कदम का विरोध जारी रखेगा और अपने व्यवसायों के वैध हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा। वहीं अमेरिका का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच रिश्तों में नया तनाव पैदा कर सकता है।




