बिजनेस | ABC NATIONAL NEWS | बेंगलुरु | 14 जून 2026
भारत और ब्रिटेन के बीच डिजिटल तथा प्रौद्योगिकी सहयोग को नई गति देने के उद्देश्य से नैसकॉम (Nasscom) ने यूनाइटेड किंगडम टेक्नोलॉजी एडवाइजरी काउंसिल (UK Technology Advisory Council – TAC) के गठन की घोषणा की है। यह घोषणा लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग में आयोजित नैसकॉम यूके फोरम की बैठक के दौरान की गई। इस पहल को भारत-ब्रिटेन तकनीकी साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नवगठित यूके टेक्नोलॉजी एडवाइजरी काउंसिल ब्रिटेन में भारतीय उच्चायोग के लिए एक रणनीतिक सलाहकार निकाय के रूप में कार्य करेगी। इसका उद्देश्य भारत और ब्रिटेन के बीच प्रौद्योगिकी सहयोग को बढ़ावा देना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़ी टेक सिक्योरिटी पहल को आगे बढ़ाना, सीमा-पार व्यापार और निवेश को प्रोत्साहित करना तथा प्रतिभा विकास के नए अवसर तैयार करना है। काउंसिल दोनों देशों के बीच कारोबार को सरल बनाने और मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने में भी मदद करेगी।
नैसकॉम ने कहा कि भारत और ब्रिटेन ने वर्ष 2035 तक द्विपक्षीय सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का लक्ष्य तय किया है। इसी दृष्टि से यह परिषद सरकारों, उद्योग जगत और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच बनेगी। परिषद का फोकस उभरती तकनीकों, साइबर सुरक्षा, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, डेटा गवर्नेंस और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों पर रहेगा।
रिपोर्ट के अनुसार भारतीय आईटी कंपनियां ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। वर्तमान में प्रमुख भारतीय आईटी कंपनियां ब्रिटेन में 35,000 से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। उल्लेखनीय बात यह है कि इन कर्मचारियों में लगभग 62 प्रतिशत लोग लंदन के बाहर विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में भारत और ब्रिटेन के बीच सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। नई परिषद इन संभावनाओं को व्यावहारिक परियोजनाओं और निवेश अवसरों में बदलने का काम करेगी। इससे दोनों देशों के स्टार्टअप, तकनीकी कंपनियों और शोध संस्थानों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
नैसकॉम और भारतीय उच्चायोग का मानना है कि यह परिषद केवल व्यापारिक सहयोग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए साझा दृष्टिकोण विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल क्षमता और ब्रिटेन की तकनीकी विशेषज्ञता मिलकर वैश्विक तकनीकी परिदृश्य में नई संभावनाएं पैदा कर सकती हैं।
विश्लेषकों के अनुसार यूके टेक्नोलॉजी एडवाइजरी काउंसिल का गठन ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया भर में डिजिटल अर्थव्यवस्था, एआई और तकनीकी सुरक्षा को लेकर प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है। ऐसे में भारत और ब्रिटेन के बीच यह सहयोग दोनों देशों की आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती प्रदान कर सकता है।




