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फ्रांस पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी, मैक्रों से करेंगे वार्ता; G-7 शिखर सम्मेलन में रखेंगे ग्लोबल साउथ की आवाज

अंतरराष्ट्रीय / कूटनीति | ABC NATIONAL NEWS | नीस (फ्रांस) | 14 जून 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार देर रात फ्रांस के नीस शहर पहुंच गए, जहां से उनकी दो देशों—फ्रांस और स्लोवाकिया—की महत्वपूर्ण यात्रा की शुरुआत हुई। इस दौरे का सबसे अहम पड़ाव फ्रांस में आयोजित होने वाला जी-7 शिखर सम्मेलन है, जिसमें भारत एक विशेष आमंत्रित देश के रूप में भाग ले रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, वैश्विक ऊर्जा संकट और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े मुद्दे दुनिया की प्रमुख चिंताओं में शामिल हैं।

फ्रांस पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत भारतीय समुदाय और फ्रांसीसी अधिकारियों ने किया। अपने दौरे के पहले चरण में प्रधानमंत्री रविवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों नेता रक्षा सहयोग, अंतरिक्ष, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वच्छ ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर चर्चा करेंगे। इसके अलावा दोनों नेता संयुक्त रूप से “भारत इनोवेट्स” कार्यक्रम का उद्घाटन भी करेंगे, जिसका उद्देश्य भारत और फ्रांस के बीच तकनीकी तथा नवाचार सहयोग को नई दिशा देना है।

प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा भारत-फ्रांस संबंधों के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस वर्ष की शुरुआत में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत आए थे और दोनों देशों ने अपने संबंधों को “विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक विस्तारित करने का संकल्प लिया था। रक्षा क्षेत्र में राफेल विमानों से लेकर पनडुब्बी परियोजनाओं तक और अंतरिक्ष अनुसंधान से लेकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग तक, दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ती साझेदारी इस मुलाकात का प्रमुख एजेंडा रहने वाली है।

जी-7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी को भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका के रूप में देखा जा रहा है। रवाना होने से पहले जारी अपने बयान में प्रधानमंत्री ने कहा कि जी-7 में भारत की लगातार आठवीं बार भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि दुनिया भारत की बढ़ती भूमिका और वैश्विक योगदान को स्वीकार कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत केवल अपने हितों की बात नहीं करेगा, बल्कि ग्लोबल साउथ यानी विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आकांक्षाओं और चिंताओं को भी दुनिया के सामने मजबूती से रखेगा।

इस सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की कई वैश्विक नेताओं से मुलाकात होने की संभावना है। अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच भी शिखर सम्मेलन के इतर द्विपक्षीय बैठक हो सकती है। यदि यह मुलाकात होती है तो व्यापार, रक्षा, इंडो-पैसिफिक रणनीति, पश्चिम एशिया संकट और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। हाल के दिनों में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में भारतीय नाविकों की मौत और हॉर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण यह बैठक और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

फ्रांस के बाद प्रधानमंत्री मोदी स्लोवाकिया की यात्रा पर जाएंगे। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की कई वर्षों बाद होने वाली महत्वपूर्ण स्लोवाकिया यात्रा होगी। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, रक्षा और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। भारत और यूरोप के बीच बदलते रणनीतिक समीकरणों के बीच इस यात्रा को नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाला माना जा रहा है।

वैश्विक अस्थिरता, युद्ध, ऊर्जा संकट और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत की कूटनीतिक सक्रियता का महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। फ्रांस में होने वाली उच्चस्तरीय वार्ताएं और जी-7 शिखर सम्मेलन में भारत की भागीदारी आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक आर्थिक एजेंडे पर भारत की भूमिका को और अधिक मजबूत कर सकती है।

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