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सिंगापुर में भारतीय समुदाय के खिलाफ ऑनलाइन नफरत पर कार्रवाई, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को 14 पोस्ट ब्लॉक करने का आदेश

अंतरराष्ट्रीय/ सिंगापुर | ABC NATIONAL NEWS | सिंगापुर | 8 जून 2026

सिंगापुर सरकार ने भारतीय समुदाय को निशाना बनाकर नस्लीय तनाव फैलाने वाले ऑनलाइन कंटेंट के खिलाफ कड़ा कदम उठाते हुए तीन प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को 14 आपत्तिजनक पोस्ट ब्लॉक करने का आदेश दिया है। गृह मंत्रालय (MHA) ने कहा है कि ये पोस्ट सिंगापुर के बहुसांस्कृतिक और बहुजातीय सामाजिक ढांचे को कमजोर करने तथा विभिन्न समुदायों के बीच अविश्वास और वैमनस्य फैलाने का प्रयास कर रही थीं।

सरकार के अनुसार पुलिस ने ऑनलाइन क्रिमिनल हार्म्स एक्ट (OCHA) के तहत यूट्यूब, फेसबुक और एक्स (पूर्व में ट्विटर) को डिसेबलिंग डायरेक्शन जारी किए हैं। इन निर्देशों के तहत प्लेटफॉर्म्स को सिंगापुर के उपयोगकर्ताओं के लिए इन पोस्टों की पहुंच रोकनी होगी। गृह मंत्रालय ने कहा कि प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह सामग्री विदेश से उत्पन्न हुई थी और बाद में विभिन्न सोशल मीडिया मंचों और वेबसाइटों के माध्यम से प्रसारित की गई।

सिंगापुर के द्वितीय गृह मंत्री एवं कानून मंत्री एडविन टोंग ने कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह सामग्री संभवतः चीन आधारित किसी ऑनलाइन मंच से उत्पन्न हुई और बाद में अन्य माध्यमों पर फैल गई। उन्होंने कहा कि इन वीडियो और पोस्टों का उद्देश्य भारतीय समुदाय को निशाना बनाना तथा नस्लीय आधार पर समाज को विभाजित करना था। टोंग ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सिंगापुर में हर समुदाय का समान सम्मान है और किसी भी समुदाय के खिलाफ घृणा फैलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

गृह मंत्रालय ने बताया कि मई महीने से चीनी भाषा के ऑनलाइन मंचों पर ऐसे कथानक फैलाए जा रहे थे जिनमें दावा किया जा रहा था कि सिंगापुर अपनी सांस्कृतिक पहचान खो रहा है और भारतीय मूल के लोगों की संख्या तेजी से बढ़ने के कारण देश की सामाजिक संरचना प्रभावित हो रही है। इन पोस्टों में यह भी आरोप लगाया गया कि सिंगापुर की बहुसांस्कृतिक नीति केवल दिखावा है और देश की स्थिरता का कारण वास्तव में उसकी चीनी बहुसंख्यक आबादी है।

कुछ वीडियो और पोस्टों में लिटिल इंडिया क्षेत्र की भीड़भाड़ वाली तस्वीरों और वीडियो का चयनात्मक उपयोग करते हुए यह दिखाने की कोशिश की गई कि सिंगापुर भारतीयों से “भर गया” है। मंत्रालय ने कहा कि कई पोस्टों में भारतीय समुदाय के लिए अपमानजनक और भेदभावपूर्ण भाषा का भी इस्तेमाल किया गया। कुछ सामग्रियों में भारतीय मूल के राजनेताओं को लेकर भी भ्रामक दावे किए गए और यह प्रचारित किया गया कि वे भारतीय प्रवासियों के हितों को प्राथमिकता देते हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा समन्वयक और गृह मंत्री के. शन्मुगम ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि विदेशों से आने वाले ऐसे नस्लीय विभाजनकारी प्रयास पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। उन्होंने कहा कि सिंगापुर की सामाजिक एकता और नस्लीय सौहार्द देश की सबसे बड़ी ताकत है तथा इसे नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश का सख्ती से मुकाबला किया जाएगा।

गृह मंत्रालय ने कहा कि उपलब्ध सामग्री सिंगापुर दंड संहिता की धारा 298A का उल्लंघन कर सकती है, जिसके तहत विभिन्न नस्लीय या धार्मिक समूहों के बीच घृणा, वैमनस्य या दुर्भावना फैलाना अपराध है। इस अपराध के लिए तीन वर्ष तक की जेल और आर्थिक दंड का प्रावधान है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है कि यह किसी विदेशी सरकार द्वारा चलाया गया समन्वित अभियान था। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि कुछ विदेशी इंटरनेट उपयोगकर्ताओं द्वारा उत्पन्न यह सामग्री जानबूझकर सिंगापुर के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से साझा की गई।

सिंगापुर सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली सामग्री के स्रोत और उद्देश्य को समझें तथा ऐसी किसी भी पोस्ट को आगे साझा न करें जो सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचा सकती हो। अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में भी ऐसी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर और सख्त कदम उठाए जाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में गलत सूचना, नस्लीय प्रचार और विदेशी प्रभाव अभियानों की चुनौती लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में सिंगापुर की यह कार्रवाई दुनिया के अन्य बहुसांस्कृतिक देशों के लिए भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है, जहां सामाजिक एकता को बनाए रखना लोकतांत्रिक स्थिरता की प्रमुख शर्त बन चुका है।

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