अंतरराष्ट्रीय | अमेरिका-ईरान संघर्ष | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 8 जून 2026
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक बड़ा दावा सामने आया है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले महीने ईरान के ऊपर मार गिराए गए अमेरिकी एफ-15 लड़ाकू विमान को संभवतः चीन में बनी मिसाइल से निशाना बनाया गया था। अगर यह दावा सही साबित होता है तो यह मामला केवल अमेरिका और ईरान के बीच का नहीं रहेगा, बल्कि चीन की भूमिका पर भी सवाल खड़े करेगा।
अमेरिकी समाचार चैनल एनबीसी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों को शक है कि विमान को एक कंधे पर रखकर दागी जाने वाली चीनी मिसाइल से गिराया गया। इस तरह की मिसाइल को मैनपैड्स (MANPADS) कहा जाता है। यह छोटी, सस्ती और बेहद खतरनाक मिसाइल होती है, जो कम ऊंचाई पर उड़ रहे विमान या हेलीकॉप्टर को निशाना बना सकती है।
यह घटना अप्रैल 2026 में हुई थी। विमान में मौजूद दोनों अमेरिकी सैनिक समय रहते पैराशूट की मदद से बाहर निकलने में सफल रहे। पायलट को कुछ घंटों के भीतर बचा लिया गया, जबकि दूसरे अधिकारी को दो दिन बाद पहाड़ी इलाके से सुरक्षित निकाला गया। अमेरिकी सेना अभी भी इस पूरी घटना की जांच कर रही है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन ने संभवतः ईरान को एक आधुनिक रडार सिस्टम भी दिया था। यह रडार दूर से आने वाले विमानों का पता लगाने में सक्षम माना जाता है, यहां तक कि उन विमानों का भी जो रडार से बचने के लिए विशेष तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इस खुलासे ने अमेरिका और चीन के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले कह चुके हैं कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि चीन ईरान को हथियार नहीं भेज रहा है। वहीं चीन ने भी इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वह हथियारों के निर्यात को लेकर अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि चीन और ईरान के बीच सैन्य सहयोग कोई नई बात नहीं है। 1980 और 1990 के दशक में चीन ने ईरान को कई तरह के हथियार और सैन्य तकनीक उपलब्ध कराई थी। हालांकि बाद में अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण प्रत्यक्ष हथियार आपूर्ति कम हो गई थी।
अमेरिका का आरोप है कि चीन ने ईरान को तकनीकी और निगरानी संबंधी मदद भी दी है। हाल ही में अमेरिका ने कुछ चीनी सैटेलाइट कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए थे, जिन पर ईरान को सहायता देने का आरोप लगाया गया था। चीन ने इन आरोपों को भी सिरे से नकार दिया है।
फिलहाल अमेरिकी जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस्तेमाल की गई मिसाइल वास्तव में चीन में बनी थी या नहीं और वह ईरान तक कैसे पहुंची। लेकिन इस दावे ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि पश्चिम एशिया का संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय नहीं रहा, बल्कि इसमें दुनिया की बड़ी शक्तियां भी किसी न किसी रूप में जुड़ती जा रही हैं।
यदि जांच में चीनी हथियारों के इस्तेमाल की पुष्टि होती है, तो अमेरिका और चीन के रिश्तों में नया तनाव पैदा हो सकता है और इसका असर वैश्विक राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है।




