Home » International » युद्धविराम के बावजूद बेरूत पर इज़राइली हमला, हिज़्बुल्लाह ने दी जवाबी कार्रवाई

युद्धविराम के बावजूद बेरूत पर इज़राइली हमला, हिज़्बुल्लाह ने दी जवाबी कार्रवाई

अंतरराष्ट्रीय/ पश्चिम एशिया | अमित भास्कर | ABC NATIONAL NEWS | बेरूत | 8 जून 2026

अमेरिका की मध्यस्थता से हुए हालिया युद्धविराम के कुछ ही दिनों बाद इज़राइल ने रविवार को लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी उपनगर दहियाह पर हवाई हमला कर दिया, जिससे क्षेत्र में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। इज़राइल ने दावा किया कि यह कार्रवाई हिज़्बुल्लाह द्वारा उसके क्षेत्र में किए गए हमलों के जवाब में की गई है। वहीं हिज़्बुल्लाह ने भी स्वीकार किया है कि उसने उत्तरी इज़राइल में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था।

रिपोर्टों के अनुसार, बेरूत के दहियाह इलाके में दो रिहायशी इमारतों पर किए गए हवाई हमलों में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई जबकि महिलाओं और बच्चों सहित 20 से अधिक लोग घायल हो गए। धमाकों से इमारतों के निचले हिस्से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और आसपास के इलाकों में दहशत फैल गई। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में लोग मलबे के बीच फंसे घायलों को निकालते और राहत कार्य करते दिखाई दिए।

इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि सेना ने दहियाह क्षेत्र में स्थित “आतंकी मुख्यालयों” को निशाना बनाया है। उनके अनुसार यह कार्रवाई हिज़्बुल्लाह द्वारा इज़राइली क्षेत्र में रॉकेट और ड्रोन हमलों के जवाब में की गई। इज़राइली सेना ने यह भी दावा किया कि उसने लेबनान से दागे गए दो प्रोजेक्टाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया।

दूसरी ओर हिज़्बुल्लाह ने बयान जारी कर कहा कि उसने यिफ्ताह बैरक और अल-मर्ज क्षेत्र के निकट तैनात इज़राइली सैनिकों को निशाना बनाया। संगठन का कहना है कि यह कार्रवाई दक्षिणी लेबनान में इज़राइल द्वारा लगातार किए जा रहे हमलों और युद्धविराम उल्लंघनों के जवाब में की गई है। हिज़्बुल्लाह ने आरोप लगाया कि इज़राइल संघर्षविराम की शर्तों का सम्मान नहीं कर रहा है और लगातार लेबनानी क्षेत्रों पर हमले कर रहा है।

ईरान ने भी इज़राइली हमले की कड़ी निंदा की है। ईरानी संसद की विदेश एवं राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रज़ाई ने चेतावनी देते हुए कहा कि बेरूत पर हमला क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा है और इसका “निर्णायक एवं दर्दनाक जवाब” दिया जाएगा। ईरान लंबे समय से हिज़्बुल्लाह का प्रमुख समर्थक रहा है और इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

अमेरिका इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चिंतित नजर आ रहा है। वाशिंगटन को आशंका है कि बेरूत पर हमले और लेबनान में बढ़ती सैन्य कार्रवाई ईरान के साथ चल रही शांति वार्ताओं को प्रभावित कर सकती है। अमेरिकी प्रशासन पहले भी इज़राइल पर दबाव डाल चुका है कि वह बेरूत पर व्यापक हमलों से बचे, क्योंकि इससे पूरे पश्चिम एशिया में संघर्ष और फैल सकता है।

विश्लेषकों का मानना है कि हाल ही में घोषित युद्धविराम केवल नाममात्र का रह गया है। अप्रैल में लागू संघर्षविराम के बाद भी दोनों पक्षों की ओर से लगातार आरोप-प्रत्यारोप और सीमित सैन्य कार्रवाइयाँ जारी हैं। रविवार का हमला युद्धविराम लागू होने के बाद बेरूत पर तीसरा बड़ा इज़राइली हमला माना जा रहा है। इससे पहले भी हिज़्बुल्लाह के कुछ वरिष्ठ कमांडरों को निशाना बनाकर हमले किए गए थे।

लेबनान की संसद के अध्यक्ष नबीह बेरी ने हाल ही में अमेरिकी मध्यस्थता वाले समझौते को “जाल” करार दिया था। उनका कहना था कि समझौते में दक्षिणी लेबनान के कब्जे वाले क्षेत्रों से इज़राइली वापसी का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। वहीं हिज़्बुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने भी संगठन को निरस्त्र करने की मांग को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

बढ़ते तनाव के बीच पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े संघर्ष की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिका, इज़राइल, ईरान और हिज़्बुल्लाह के बीच बढ़ती बयानबाजी और सैन्य गतिविधियां इस बात का संकेत हैं कि क्षेत्र में स्थायी शांति की राह अभी भी बेहद कठिन बनी हुई है। यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए तो यह संघर्ष पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकता है।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted