राष्ट्रीय/ महाराष्ट्र | ABC NATIONAL NEWS | रायगढ़ | 8 जून 2026
महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में प्रस्तावित “थर्ड मुंबई” (Third Mumbai) परियोजना को लेकर किसानों और स्थानीय ग्रामीणों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। इस आंदोलन को रविवार को उस समय नई ऊर्जा मिली जब सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व न्यायाधीश बी.जी. कोलसे पाटिल ने किसानों की सभा में भाग लेते हुए ऐलान किया कि “तीसरी मुंबई हमारी लाशों पर ही बनेगी।” उन्होंने किसानों से इस परियोजना के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया और कहा कि जमीन, आजीविका और पर्यावरण की कीमत पर किसी भी विकास परियोजना को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
रायगढ़ स्थित संगठन “एमएमआरडीए केएससी नवनगर (थर्ड मुंबई) विरोधी समिति” द्वारा आयोजित इस विशाल किसान सम्मेलन में हजारों ग्रामीणों और भूमि मालिकों ने हिस्सा लिया। सभा में उपस्थित लोगों ने परियोजना के खिलाफ शपथ ली और कहा कि वे अपनी जमीन किसी भी दबाव में नहीं छोड़ेंगे। किसानों का आरोप है कि मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) द्वारा प्रस्तावित कर्नाला-साई-चिरनेर (KSC) न्यू टाउन परियोजना के लिए जो मुआवजा और पुनर्वास नीति बनाई गई है, वह किसानों और स्थानीय निवासियों के हितों की रक्षा करने में पूरी तरह विफल है।
अपने संबोधन में बी.जी. कोलसे पाटिल ने कहा कि आज किसानों की लड़ाई केवल जमीन बचाने की नहीं बल्कि सम्मान और अस्तित्व की भी लड़ाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे राजनीतिक नेतृत्व ने जनता की भावनाओं और अधिकारों की अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि पहले न्यायपालिका, वकील और पुलिस अपने-अपने दायित्व निभाते थे, लेकिन अब राजनीतिक व्यवस्था आम नागरिकों की आवाज सुनने को तैयार नहीं है। उन्होंने किसानों से संगठित आंदोलन के जरिए अपने अधिकारों की रक्षा करने का आह्वान किया।
विरोध कर रहे किसानों का कहना है कि “थर्ड मुंबई” परियोजना के नाम पर हजारों एकड़ कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है, जिससे स्थानीय कृषि व्यवस्था, बागवानी, मत्स्य पालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा। उनका आरोप है कि सरकार और एमएमआरडीए विकास के नाम पर ग्रामीणों को उनकी पुश्तैनी जमीनों से बेदखल करने का प्रयास कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि उन्हें उचित मुआवजा, वैकल्पिक रोजगार और पुनर्वास की स्पष्ट गारंटी नहीं दी गई है।
कर्नाला-साई-चिरनेर न्यू टाउन परियोजना को राज्य सरकार भविष्य के शहरी विकास के लिए महत्वपूर्ण बता रही है। सरकार का दावा है कि इससे मुंबई महानगर क्षेत्र का विस्तार होगा, नए औद्योगिक और आवासीय क्षेत्र विकसित होंगे तथा लाखों लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। हालांकि स्थानीय ग्रामीणों और किसान संगठनों का तर्क है कि विकास की कीमत किसानों से नहीं वसूली जानी चाहिए। उनका कहना है कि परियोजना का लाभ बड़े निवेशकों और रियल एस्टेट कंपनियों को मिलेगा, जबकि नुकसान स्थानीय समुदायों को उठाना पड़ेगा।
सभा में मौजूद कई किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को वापस नहीं लिया और किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन, धरना और कानूनी लड़ाई की भी घोषणा की। किसानों का कहना है कि यह केवल रायगढ़ की लड़ाई नहीं बल्कि पूरे महाराष्ट्र में भूमि अधिकारों और ग्रामीण हितों की रक्षा का आंदोलन बन चुका है।
राजनीतिक रूप से भी यह मुद्दा महत्वपूर्ण होता जा रहा है। विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने किसानों की चिंताओं को जायज बताते हुए सरकार से संवाद शुरू करने की मांग की है। वहीं राज्य सरकार अभी भी परियोजना को प्रदेश के आर्थिक विकास और शहरी विस्तार के लिए आवश्यक बता रही है।
रायगढ़ में माहौल तनावपूर्ण लेकिन शांतिपूर्ण बना हुआ है। किसानों ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वे पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। बी.जी. कोलसे पाटिल के तीखे बयान ने आंदोलन को नया राजनीतिक और सामाजिक समर्थन प्रदान किया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार किसानों के विरोध को कैसे संबोधित करती है और क्या “थर्ड मुंबई” परियोजना को लेकर कोई नया समाधान निकल पाता है या यह संघर्ष और अधिक तीव्र रूप लेता है।




