राष्ट्रीय | अवधेश झा | बेंगलुरु | ABC NATIONAL NEWS | 7 जून 2026
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने केंद्र सरकार की नीतियों और संघीय ढांचे को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संसाधनों के बंटवारे में किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार नहीं होगा और वे भारत में “दूसरे दर्जे के नागरिक” बनकर नहीं रह सकते।
बेंगलुरु में आयोजित द हिंदू हडल 2026 कार्यक्रम में बातचीत के दौरान रेवंत रेड्डी ने कहा कि भारत की संघीय व्यवस्था और सुशासन की दिशा ही तय करेगी कि राज्यों और नागरिकों के साथ समान भागीदारी का व्यवहार होगा या नहीं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दक्षिण भारत के राज्य राजनीतिक शक्ति के असंतुलन को स्वीकार नहीं करेंगे।
मुख्यमंत्री ने जनसंख्या आधारित परिसीमन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों की ओर संकेत करते हुए कहा कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण और विकास के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है, उन्हें राजनीतिक रूप से नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों की चिंताओं को नजरअंदाज करना देश की संघीय भावना के खिलाफ होगा।
रेवंत रेड्डी ने तेलंगाना सरकार की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य को वैश्विक निवेश केंद्र बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित किया जा रहा है। साथ ही सरकार किसानों, महिलाओं, युवाओं और गरीब वर्गों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं भी चला रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास और सामाजिक न्याय साथ-साथ चलने चाहिए। उनका दावा था कि तेलंगाना सरकार निवेश, रोजगार सृजन और कल्याणकारी कार्यक्रमों के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ रही है।
रेवंत रेड्डी के इस बयान को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब दक्षिणी राज्यों में परिसीमन, कर राजस्व वितरण और केंद्र-राज्य संबंधों को लेकर बहस तेज हो रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका यह बयान आने वाले समय में संघीय ढांचे और राज्यों के अधिकारों पर राष्ट्रीय स्तर की चर्चा को और गति दे सकता है।




