राष्ट्रीय/व्यापार | काव्या अग्रवाल | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 7 जून 2026
देशभर के करोड़ों उपभोक्ताओं को रविवार को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा, जब घरेलू रसोई गैस (LPG) सिलेंडर की कीमत में ₹29 प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी कर दी गई। नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं, जिसके बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत ₹913 से बढ़कर ₹942 हो गई है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच यह चार महीनों में दूसरी बड़ी वृद्धि है। इससे पहले मार्च में भी सिलेंडर के दाम ₹60 बढ़ाए गए थे। ताजा बढ़ोतरी के बाद फरवरी के अंत से अब तक घरेलू गैस सिलेंडर कुल ₹89 महंगा हो चुका है।
सरकारी तेल कंपनियों के सूत्रों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी, समुद्री परिवहन लागत में वृद्धि और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण यह फैसला लिया गया है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर युद्ध का असर पड़ रहा है, जिसके कारण भारत सहित कई देशों को ईंधन आयात के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा प्रभाव घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ता है।
रसोई गैस के दाम बढ़ने से सबसे अधिक असर मध्यम वर्ग, निम्न आय वर्ग और ग्रामीण परिवारों पर पड़ने की आशंका है। पहले से ही खाद्य पदार्थों, सब्जियों, दूध, परिवहन और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे परिवारों के मासिक बजट पर अब अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। कई परिवारों का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच घरेलू गैस की कीमतों में बार-बार वृद्धि उनके लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। विशेष रूप से वे परिवार जो हर महीने एक या उससे अधिक सिलेंडर का उपयोग करते हैं, उन्हें अब पहले की तुलना में अधिक खर्च करना पड़ेगा।
विपक्षी दलों ने भी गैस कीमतों में वृद्धि को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार महंगाई पर नियंत्रण रखने में विफल रही है और इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है, जबकि आम लोगों की आय उसी अनुपात में नहीं बढ़ी। उनका दावा है कि बढ़ती महंगाई के कारण गरीब और मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति प्रभावित हो रही है।
दूसरी ओर सरकार का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों और ऊर्जा बाजार की अस्थिरता का असर केवल भारत पर नहीं बल्कि दुनिया के अधिकांश देशों पर पड़ रहा है। सरकार का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय संकटों के बावजूद भारत ने कई मौकों पर उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सब्सिडी और अन्य उपाय अपनाए हैं। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का भी मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष समाप्त होने तक अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है और इसका असर घरेलू ईंधन कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि पश्चिम एशिया का संकट और गहराता है या तेल आपूर्ति मार्गों पर दबाव बढ़ता है, तो आने वाले महीनों में ईंधन कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। हालांकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास सफल रहते हैं और वैश्विक बाजार में स्थिरता लौटती है, तो भविष्य में कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। फिलहाल आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की कोई तत्काल संभावना दिखाई नहीं दे रही है।
रसोई गैस की कीमतों में ताजा वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब महंगाई पहले से ही राजनीतिक और आर्थिक बहस का प्रमुख मुद्दा बनी हुई है। घरेलू गैस सिलेंडर की बढ़ी हुई कीमतें न केवल परिवारों के मासिक बजट को प्रभावित करेंगी, बल्कि इससे छोटे व्यवसायों और गैस पर निर्भर कई घरेलू गतिविधियों की लागत भी बढ़ सकती है। ऐसे में देशभर की निगाहें अब अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और सरकार के अगले कदमों पर टिकी हुई हैं।




