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तीन-भाषा फॉर्मूला पर बढ़ा विवाद, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और CBSE से मांगा जवाब

शिक्षा | आद्या ठुकराल | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 1 जून 2026

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के स्कूलों में कक्षा 9 से तीन-भाषा फॉर्मूला लागू करने के फैसले पर विवाद गहरा गया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, CBSE और NCERT को नोटिस जारी कर 1 जुलाई 2026 से नीति लागू करने की तैयारियों पर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल रोक लगाने से इनकार किया, लेकिन यह माना कि नई व्यवस्था से छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों को होने वाली संभावित कठिनाइयों की समीक्षा आवश्यक है। इस मामले पर अगली सुनवाई 15 और 16 जुलाई को होगी।

CBSE ने 15 मई को जारी अपने परिपत्र में कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य करने की घोषणा की थी। नई व्यवस्था के तहत कम से कम दो भाषाएं भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। विदेशी भाषाओं को केवल तीसरी भाषा या वैकल्पिक चौथे विषय के रूप में चुना जा सकेगा।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि भाषा का चयन व्यक्तिगत स्वतंत्रता का विषय है और इसे किसी छात्र या राज्य पर थोपा नहीं जा सकता। उनका कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 स्वयं यह आश्वासन देती है कि किसी भी भाषा को अनिवार्य रूप से लागू नहीं किया जाएगा। इसके अलावा यह भी सवाल उठाया गया है कि CBSE जैसी कार्यकारी संस्था को संसद के किसी कानून के बिना इतनी व्यापक नीति लागू करने का अधिकार नहीं है।

अभिभावकों और शिक्षकों ने भी नई व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि बोर्ड परीक्षाओं से पहले छात्रों पर अतिरिक्त शैक्षणिक दबाव बढ़ेगा। वहीं कई स्कूलों ने प्रशिक्षित भाषा शिक्षकों की कमी और पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

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शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भाषा शिक्षा को राजनीतिक या सांस्कृतिक संघर्ष का विषय बनाने के बजाय इसे छात्रों की सीखने की क्षमता और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि भारत जैसे बहुभाषी देश में भाषा नीति का उद्देश्य विविधता को बढ़ावा देना होना चाहिए, न कि विवाद पैदा करना।

अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई और केंद्र सरकार के जवाब पर टिकी हुई है। यह मामला देश की शिक्षा नीति, भाषाई अधिकारों और संघीय ढांचे से जुड़े व्यापक सवालों को भी सामने ला रहा है।

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