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पहले किया इनकार, अब एथिकल हैकर की ली मदद: CBSE ने मानी सुरक्षा खामियों की चुनौती

शिक्षा | समा मेहरा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 6 जून 2026

IIT टीम के साथ शुरू हुआ सुधार अभियान

देश की सबसे बड़ी स्कूली शिक्षा संस्था सीबीएसई (CBSE) को आखिरकार अपने आईटी सिस्टम की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाना पड़ा है। जिस साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और एथिकल हैकर की चेतावनियों को बोर्ड ने शुरुआती दौर में गंभीरता से नहीं लिया था, अब उसी 19 वर्षीय एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी को सीबीएसई ने दिल्ली बुलाकर अपने आईटी सिस्टम की कमजोरियों को समझने और उन्हें दूर करने की प्रक्रिया में शामिल किया है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर देश की महत्वपूर्ण डिजिटल प्रणालियों की साइबर सुरक्षा और सरकारी संस्थाओं की प्रतिक्रिया क्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार निसर्ग अधिकारी ने पिछले महीने सीबीएसई के उस डिजिटल प्लेटफॉर्म में कई गंभीर तकनीकी कमजोरियों की पहचान की थी, जहां लाखों छात्रों का संवेदनशील डेटा सुरक्षित रखा जाता है। उन्होंने दावा किया था कि सिस्टम में ऐसी खामियां मौजूद हैं जिनका दुरुपयोग कर कोई भी व्यक्ति महत्वपूर्ण सूचनाओं तक पहुंच सकता है। हालांकि उस समय सीबीएसई ने सार्वजनिक रूप से किसी भी प्रकार की सुरक्षा चूक या डेटा उल्लंघन से इनकार कर दिया था और कहा था कि बोर्ड की प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित है। लेकिन अब सामने आई जानकारी से स्पष्ट है कि बोर्ड ने बाद में इन चेतावनियों को गंभीरता से लिया और विशेषज्ञों की मदद से सिस्टम की समीक्षा शुरू की।

सीबीएसई द्वारा गठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) के विशेषज्ञों की टीम ने निसर्ग अधिकारी के साथ विस्तृत बैठकें कीं। टीम के एक सदस्य ने स्वीकार किया कि युवा एथिकल हैकर ने कई महत्वपूर्ण तकनीकी कमजोरियों की पहचान की थी। विशेषज्ञों के अनुसार निसर्ग की सोच, उनकी तकनीकी समझ और साइबर सुरक्षा के प्रति उनकी गंभीरता ने टीम को प्रभावित किया। यही कारण रहा कि जब वह दिल्ली में मौजूद थे तो उनसे संपर्क कर उन्हें सीधे प्रक्रिया में शामिल किया गया, ताकि संभावित खामियों को जल्द से जल्द दूर किया जा सके और सिस्टम को और अधिक सुरक्षित बनाया जा सके।

यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है जब हाल के दिनों में सीबीएसई के विभिन्न ऑनलाइन पोर्टलों पर लगातार साइबर हमलों और अनधिकृत पहुंच की कोशिशों की खबरें सामने आ रही हैं। बोर्ड के री-इवैल्यूएशन और परीक्षा संबंधी पोर्टलों पर लाखों छात्रों के एक साथ लॉगिन करने के कारण पहले ही तकनीकी दबाव बढ़ा हुआ है। इसी बीच साइबर हमलों के प्रयासों ने बोर्ड की चिंता और बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सुरक्षा खामियों की पहचान नहीं की जाती तो छात्रों के डेटा और परीक्षा संबंधी सूचनाओं के दुरुपयोग का खतरा पैदा हो सकता था।

दिलचस्प बात यह है कि यह मामला एथिकल हैकिंग की बढ़ती भूमिका को भी उजागर करता है। एथिकल हैकर वे विशेषज्ञ होते हैं जो किसी सिस्टम को नुकसान पहुंचाने के बजाय उसकी कमजोरियों की पहचान कर संबंधित संस्थाओं को आगाह करते हैं। दुनिया भर में बड़ी टेक कंपनियां, बैंक और सरकारी एजेंसियां ऐसे विशेषज्ञों की मदद लेती हैं ताकि साइबर अपराधियों से पहले सुरक्षा कमियों को दूर किया जा सके। निसर्ग अधिकारी का मामला भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है, जहां एक युवा साइबर विशेषज्ञ की सूचना ने देश के सबसे बड़े शिक्षा बोर्ड को अपनी डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने के लिए प्रेरित किया।

सूत्रों के अनुसार आईआईटी विशेषज्ञों की टीम और सीबीएसई के तकनीकी अधिकारियों ने अब सिस्टम की व्यापक ऑडिट प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत डेटा सुरक्षा, सर्वर संरचना, उपयोगकर्ता प्रमाणीकरण, पोर्टल एक्सेस और साइबर हमलों से बचाव की पूरी व्यवस्था की जांच की जा रही है। बोर्ड का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में किसी भी प्रकार की सुरक्षा कमजोरी का फायदा उठाकर छात्रों या शिक्षकों की जानकारी तक अनधिकृत पहुंच न बनाई जा सके।

शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम से एक महत्वपूर्ण संदेश निकलकर सामने आया है। डिजिटल युग में किसी भी संस्था के लिए केवल सुरक्षा का दावा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लगातार परीक्षण, स्वतंत्र ऑडिट और विशेषज्ञों की सलाह को महत्व देना भी उतना ही जरूरी है। कई बार बाहरी विशेषज्ञ उन कमजोरियों को पहचान लेते हैं जो नियमित सिस्टम संचालन के दौरान नजर नहीं आतीं। ऐसे में संस्थाओं को रक्षात्मक रवैया अपनाने के बजाय सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। सीबीएसई का कहना है कि छात्रों का डेटा सुरक्षित है और किसी बड़े डेटा उल्लंघन की पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद बोर्ड ने सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। निसर्ग अधिकारी और आईआईटी विशेषज्ञों की टीम के साथ मिलकर किए जा रहे सुधारों को भविष्य में देश की अन्य शैक्षणिक संस्थाओं के लिए भी एक मॉडल के रूप में देखा जा सकता है।

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