ओपिनियन | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 31 मई 2026
देश को सिर्फ सरकार नहीं, समाज की बुद्धिमत्ता भी चाहिए
भारत आज दुनिया के सबसे युवा देशों में गिना जाता है। हमारी अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है, तकनीक गांवों तक पहुंच रही है और भारतीय युवा दुनिया भर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद कई ऐसे सवाल हैं जो आज भी हमारे सामने खड़े हैं। क्या हर बच्चे को अच्छी शिक्षा मिल रही है? क्या गांवों में रहने वाले लोगों को समय पर इलाज मिल रहा है? क्या बेरोजगार युवाओं को सही अवसर मिल रहे हैं? क्या समाज के अनुभवी और पढ़े-लिखे लोग राष्ट्र निर्माण में अपनी पूरी भूमिका निभा रहे हैं?
इन सवालों का जवाब केवल सरकार के पास नहीं है। इसके लिए समाज के डॉक्टरों, इंजीनियरों, प्रोफेसरों, वैज्ञानिकों, वकीलों, पत्रकारों, उद्योगपतियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी आगे आना होगा। आज जरूरत एक ऐसे “राष्ट्रीय इंटेलेक्चुअल मिशन” की है जो देश के श्रेष्ठ दिमागों को एक मंच पर लाकर विकास की नई दिशा तय करे।
हर जिले में बने इंटेलेक्चुअल फोरम
कल्पना कीजिए कि देश के हर जिले में एक ऐसा मंच हो जहां डॉक्टर, शिक्षक, उद्योगपति, पत्रकार, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता महीने में एक बार बैठकर अपने जिले की समस्याओं और उनके समाधान पर चर्चा करें। वे यह तय करें कि जिले में शिक्षा कैसे सुधरेगी, स्वास्थ्य सेवाएं कैसे बेहतर होंगी और युवाओं को रोजगार कैसे मिलेगा।
ऐसा कोई मंच राजनीतिक नहीं होगा बल्कि पूरी तरह सामाजिक और विकास आधारित होगा। यह सरकार को सुझाव देगा, समाज को जागरूक करेगा और जरूरत पड़ने पर स्वयं भी पहल करेगा। यदि देश के 750 से अधिक जिलों में ऐसे मंच बन जाएं तो विकास की गति कई गुना बढ़ सकती है।
शिक्षा को आंदोलन बनाना होगा
किसी भी देश का भविष्य उसकी शिक्षा व्यवस्था तय करती है। आज भी लाखों बच्चे ऐसे हैं जिन्हें अच्छी शिक्षा नहीं मिल पा रही है। कई गांवों में शिक्षकों की कमी है, तो कहीं बच्चों को सही मार्गदर्शन नहीं मिलता।
इस स्थिति को बदलने के लिए समाज के शिक्षित वर्ग को आगे आना होगा। उदाहरण के तौर पर हर कॉलेज अपने आसपास के गांवों को गोद ले सकता है। विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर सप्ताह में एक दिन ऑनलाइन क्लास ले सकते हैं। सेवानिवृत्त शिक्षक गरीब बच्चों को मुफ्त पढ़ा सकते हैं। सफल विद्यार्थी छोटे बच्चों के मेंटर बन सकते हैं।
अगर देश का हर शिक्षित व्यक्ति सिर्फ एक बच्चे की पढ़ाई में मदद करने का संकल्प ले ले, तो करोड़ों बच्चों का भविष्य बदल सकता है। शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। बच्चों को जीवन कौशल, डिजिटल ज्ञान, नैतिक मूल्य और रोजगार से जुड़ी शिक्षा भी मिलनी चाहिए।
स्वास्थ्य सेवा गांव-गांव तक पहुंचानी होगी
भारत में बड़े-बड़े अस्पताल हैं और दुनिया के बेहतरीन डॉक्टर भी हैं। लेकिन गांवों और दूरदराज इलाकों में आज भी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है। कई लोग केवल इसलिए अपनी जान गंवा देते हैं क्योंकि समय पर इलाज नहीं मिल पाता।
इस समस्या का समाधान केवल नए अस्पताल बनाना नहीं है। तकनीक का उपयोग करके भी बड़ी मदद की जा सकती है। टेलीमेडिसिन के माध्यम से गांव का मरीज शहर के विशेषज्ञ डॉक्टर से जुड़ सकता है। मेडिकल कॉलेजों के छात्र नियमित स्वास्थ्य शिविर लगा सकते हैं। बड़े अस्पताल मोबाइल मेडिकल वैन के जरिए गांवों तक पहुंच सकते हैं।
अगर हर डॉक्टर साल में कुछ दिन समाज सेवा के लिए दे और हर मेडिकल कॉलेज आसपास के क्षेत्रों को स्वास्थ्य सहायता देने की जिम्मेदारी ले, तो स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव आ सकता है।
युवाओं को नौकरी नहीं, अवसर चाहिए
भारत की सबसे बड़ी ताकत उसके युवा हैं। लेकिन आज बड़ी संख्या में युवा डिग्री लेकर भी रोजगार की तलाश कर रहे हैं। इसका एक कारण यह है कि शिक्षा और रोजगार के बीच तालमेल की कमी है।
हमें युवाओं को केवल नौकरी खोजने वाला नहीं बल्कि रोजगार पैदा करने वाला बनाना होगा। उदाहरण के लिए कृषि आधारित उद्योग, डिजिटल सेवाएं, पर्यटन, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण और स्थानीय उत्पादों पर आधारित छोटे उद्योग शुरू किए जा सकते हैं।
सफल उद्योगपति और उद्यमी युवाओं को प्रशिक्षण दे सकते हैं। इंजीनियर तकनीकी मार्गदर्शन दे सकते हैं और बैंकिंग विशेषज्ञ वित्तीय जानकारी दे सकते हैं। यदि हर जिले में एक युवा उद्यमिता केंद्र बनाया जाए तो हजारों नए रोजगार पैदा हो सकते हैं।
मीडिया समाधान की पत्रकारिता करे
मीडिया समाज का आईना होता है। लेकिन आज केवल समस्याएं दिखाना पर्याप्त नहीं है। मीडिया को समाधान भी बताने होंगे।
यदि किसी गांव ने जल संरक्षण का अच्छा मॉडल बनाया है, तो उसकी कहानी पूरे देश तक पहुंचनी चाहिए। यदि किसी स्कूल ने सीमित संसाधनों में शानदार परिणाम दिए हैं, तो दूसरे स्कूलों को भी उससे सीखने का अवसर मिलना चाहिए।
समाधान आधारित पत्रकारिता समाज में उम्मीद जगाती है और लोगों को प्रेरित करती है। पत्रकार केवल खबर देने वाले नहीं, बल्कि सकारात्मक बदलाव के वाहक भी बन सकते हैं।
कानूनी जागरूकता भी जरूरी
देश के लाखों लोग अपने अधिकारों और कानूनों की जानकारी नहीं रखते। इसका फायदा कई बार गलत लोग उठाते हैं।
वकील और कानूनी विशेषज्ञ गांव-गांव में जागरूकता अभियान चला सकते हैं। महिलाओं को उनके अधिकारों की जानकारी दी जा सकती है। साइबर अपराध से बचाव के तरीके बताए जा सकते हैं। स्कूलों और कॉलेजों में संविधान और नागरिक अधिकारों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।
जब लोग अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझेंगे, तभी लोकतंत्र और मजबूत होगा।
पर्यावरण की रक्षा सबकी जिम्मेदारी
आज जल संकट, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं है।
हर गांव में वर्षा जल संग्रहण को बढ़ावा दिया जा सकता है। स्कूलों में “एक छात्र-एक पौधा” अभियान चलाया जा सकता है। उद्योगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। वैज्ञानिक कम लागत वाले पर्यावरणीय समाधान विकसित कर सकते हैं।
प्रकृति को बचाए बिना विकास संभव नहीं है। आने वाली पीढ़ियों के लिए हमें एक स्वच्छ और सुरक्षित भारत छोड़ना होगा।
सरकार और समाज साथ चलें
सरकार विकास की योजनाएं बनाती है, लेकिन उनकी सफलता समाज की भागीदारी पर निर्भर करती है। शिक्षक छात्रवृत्ति योजनाओं की जानकारी दे सकते हैं, डॉक्टर स्वास्थ्य योजनाओं का प्रचार कर सकते हैं और सामाजिक संगठन जरूरतमंद लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचा सकते हैं।
एक राष्ट्रीय इंटेलेक्चुअल मिशन सरकार और समाज के बीच एक मजबूत पुल का काम कर सकता है। इससे योजनाओं का लाभ तेजी से लोगों तक पहुंचेगा और विकास की गति बढ़ेगी।
यही है विकसित भारत का रास्ता
भारत के पास प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत केवल इस प्रतिभा को एक दिशा देने की है। यदि डॉक्टर स्वास्थ्य सुधार की जिम्मेदारी लें, शिक्षक शिक्षा सुधार का बीड़ा उठाएं, उद्योगपति रोजगार सृजन में योगदान दें, पत्रकार जागरूकता फैलाएं और समाजसेवी सामाजिक एकता को मजबूत करें, तो भारत को विकसित राष्ट्र बनने से कोई नहीं रोक सकता।
समय आ गया है कि देश का बुद्धिजीवी वर्ग केवल चर्चा तक सीमित न रहे, बल्कि मैदान में उतरकर बदलाव का नेतृत्व करे। जब समाज का ज्ञान, अनुभव और सेवा भावना एक साथ जुड़ेंगे, तब एक नया भारत बनेगा—शिक्षित भारत, स्वस्थ भारत, आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत।
विचार से विकास, ज्ञान से बदलाव और जनभागीदारी से समृद्धि—यही भारत के उज्ज्वल भविष्य का सबसे मजबूत सूत्र है।




