पूर्वोत्तर / नॉर्थ ईस्ट / मणिपुर | ABC NATIONAL NEWS | इंफाल/गुवाहाटी | 31 मई 2026
मणिपुर में एक ट्रक चालक की हत्या के बाद परिवहन व्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। ट्रांसपोर्टरों ने शनिवार को अपने सभी परिचालन स्थगित कर दिए, जिसके चलते राज्य में खाद्य सामग्री, एलपीजी और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका गहरा गई है। ट्रांसपोर्ट संगठनों का यह विरोध उस घातक हमले के खिलाफ है जिसमें पश्चिम बंगाल के हुगली निवासी एक ट्रक चालक की जान चली गई।
पुलिस के अनुसार 29 मई को उखरुल जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-202 पर खाद्यान्न से भरे ट्रकों, एलपीजी टैंकरों और तेल टैंकरों के काफिले पर सशस्त्र उग्रवादियों ने हमला किया। इस हमले में एक ट्रक चालक की मौत हो गई जबकि कई वाहन क्षतिग्रस्त हुए। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि हमले के पीछे कुकी उग्रवादी गुटों का हाथ हो सकता है। घटना के बाद पूरे इलाके में तलाशी अभियान तेज कर दिया गया है।
हत्या की घटना से नाराज ट्रक चालकों और परिवहन संगठनों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-37 पर प्रदर्शन करते हुए मालवाहक वाहनों का संचालन रोक दिया। बड़ी संख्या में ट्रक सड़क किनारे खड़े दिखाई दिए और परिवहन गतिविधियां पूरी तरह ठप रहीं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक ट्रांसपोर्टरों और चालकों की सुरक्षा की ठोस गारंटी नहीं दी जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
इस हड़ताल का सबसे बड़ा असर राज्य की जीवनरेखा माने जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-37 पर पड़ सकता है। यही मार्ग असम के बराक घाटी क्षेत्र से मणिपुर की राजधानी इंफाल तक आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पहुंचाता है। पहले से ही राष्ट्रीय राजमार्ग-2 अवरुद्ध होने के कारण राज्य की आपूर्ति व्यवस्था दबाव में है। ऐसे में NH-37 पर ट्रकों की आवाजाही रुकने से खाद्यान्न, रसोई गैस और ईंधन की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजमार्ग-2 पिछले कई सप्ताह से अवरुद्ध है। 13 मई को तीन चर्च नेताओं की हत्या के बाद कुकी और नागा समुदायों के बीच उत्पन्न तनाव और बंधक संकट के कारण यह मार्ग बंद पड़ा हुआ है। ऐसे में मणिपुर लगभग पूरी तरह NH-37 पर निर्भर हो गया था। अब इस मार्ग पर भी परिवहन रुकने से राज्य में आपूर्ति संकट की आशंका बढ़ गई है।
सुरक्षा एजेंसियां स्थिति को नियंत्रित करने और राजमार्गों पर सुरक्षित आवागमन बहाल करने की कोशिश कर रही हैं। प्रशासन ने ट्रांसपोर्ट संगठनों से बातचीत शुरू कर दी है और आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत दिखाई देनी चाहिए।
राजनीतिक और सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि मणिपुर में लगातार जारी जातीय तनाव और हिंसा अब आर्थिक गतिविधियों और आम जनजीवन को भी गंभीर रूप से प्रभावित करने लगी है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो राज्य में आवश्यक वस्तुओं की कमी और महंगाई की समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
फिलहाल पूरे मणिपुर की नजर सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के अगले कदम पर टिकी है, क्योंकि परिवहन व्यवस्था की बहाली ही राज्य को संभावित आपूर्ति संकट से बचा सकती है।




