स्पोर्ट्स | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 31 मई 2026
‘यह कभी निष्पक्ष मुकाबला नहीं था, फिर भी मुझे खुद पर गर्व है’
भारतीय कुश्ती की स्टार पहलवान विनेश फोगाट का एशियन गेम्स 2026 में वापसी का सपना अधूरा रह गया, लेकिन हार के बाद भी उनके शब्दों में निराशा से ज्यादा संघर्ष और आत्मविश्वास दिखाई दिया। चयन ट्रायल में हार झेलने के बाद विनेश ने कहा कि यह मुकाबला कभी भी पूरी तरह निष्पक्ष नहीं था, फिर भी उन्हें इस बात पर गर्व है कि उन्होंने तमाम मुश्किलों के बावजूद मैट पर वापसी की।
इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित एशियन गेम्स चयन ट्रायल्स के दौरान सबसे ज्यादा नजरें 53 किलोग्राम वर्ग पर टिकी थीं, जहां लंबे अंतराल के बाद विनेश फोगाट प्रतिस्पर्धी कुश्ती में लौट रही थीं। हालांकि उनका सफर सेमीफाइनल में ही समाप्त हो गया और एशियन गेम्स का टिकट हासिल करने का सपना टूट गया।
मुकाबले से पहले ही विवाद शुरू हो गया था। भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) और विनेश फोगाट के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव का असर ट्रायल्स में भी दिखाई दिया। शनिवार सुबह उन्हें अचानक एक सर्कुलर थमाया गया, जिसमें केवल 50 किलोग्राम वर्ग में भाग लेने की अनुमति दी गई थी। इसके बाद वेट-इन को लेकर भी लंबा इंतजार और विरोध-प्रदर्शन हुआ। काफी बहस और विवाद के बाद उन्हें प्रक्रिया पूरी करने की अनुमति मिली।
दरअसल, विनेश और कुश्ती महासंघ के बीच पिछले कुछ वर्षों से रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं। अदालत के हस्तक्षेप के बाद ही उन्हें चयन ट्रायल में हिस्सा लेने का मौका मिला था। यही कारण है कि ट्रायल शुरू होने से पहले ही माहौल विवादों और राजनीतिक खींचतान से प्रभावित दिखाई दे रहा था।
पेरिस ओलंपिक 2024 के फाइनल से बेहद दर्दनाक तरीके से अयोग्य घोषित होने के बाद यह विनेश की पहली बड़ी प्रतिस्पर्धी वापसी थी। इस बीच वह मातृत्व के दौर से भी गुजरीं और फिर से फिटनेस हासिल कर अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए खुद को तैयार किया। हार के बाद उन्होंने कहा कि उनका सबसे बड़ा पदक यह है कि उन्होंने बच्चे के जन्म के बाद फिर से एलीट स्तर की कुश्ती में वापसी की।
विनेश ने कहा कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी रही हों, उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने संघर्ष किया, अभ्यास किया और फिर से देश के लिए खेलने के सपने के साथ मैट पर उतरीं। उनके अनुसार यही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही विनेश एशियन गेम्स की टीम में जगह नहीं बना सकीं, लेकिन उनका यह संघर्ष भारतीय खेल इतिहास में प्रेरणा का उदाहरण रहेगा। एक खिलाड़ी के रूप में चोट, विवाद, मानसिक दबाव और मातृत्व के बाद दोबारा शीर्ष स्तर पर लौटना किसी भी एथलीट के लिए आसान नहीं होता।
एशियन गेम्स का टिकट भले हाथ से निकल गया हो, लेकिन विनेश फोगाट ने एक बार फिर साबित कर दिया कि असली जीत केवल पदकों से नहीं मापी जाती। कभी-कभी संघर्ष करके दोबारा खड़े हो जाना ही सबसे बड़ी जीत होती है।




