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चीन-जर्मनी रिश्तों में नई गर्माहट, वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आर्थिक साझेदारी पर बड़ा दांव

अंतरराष्ट्रीय/ व्यापार | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग | 30 मई 2026

वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक अनिश्चितताओं के बीच चीन और जर्मनी ने आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने का स्पष्ट संकेत दिया है। जर्मनी की आर्थिक एवं ऊर्जा मंत्री कैथरीना राइखे 26 से 29 मई तक अपनी पहली आधिकारिक चीन यात्रा पर रहीं। उनके साथ जर्मनी की प्रमुख कंपनियों के लगभग 40 वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे, जिनमें BASF, Siemens Energy और ThyssenKrupp जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल थीं। यह यात्रा केवल एक औपचारिक दौरा नहीं मानी जा रही, बल्कि जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की फरवरी 2026 की चीन यात्रा के दौरान हुए समझौतों को जमीन पर उतारने की दिशा में बड़ा कदम समझी जा रही है। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, हरित ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण और नई तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।

बीजिंग में चीन के उप प्रधानमंत्री हे लिफेंग और वाणिज्य मंत्री वांग वेंटाओ के साथ हुई बैठकों में दोनों पक्षों ने आर्थिक सहयोग को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। चीन ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह जर्मनी के साथ दीर्घकालिक और स्थिर आर्थिक संबंध चाहता है, जबकि जर्मनी ने भी मुक्त व्यापार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित रखने पर जोर दिया।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि जर्मनी ने एक बार फिर “डिकपलिंग” यानी चीन से आर्थिक दूरी बनाने की नीति को खारिज कर दिया। कैथरीना राइखे ने साफ कहा कि जर्मन कंपनियां प्रतिस्पर्धा से नहीं डरतीं और चीन के साथ गहरा आर्थिक सहयोग दोनों देशों के हित में है। उन्होंने चीन के साथ नियम-आधारित, संतुलित और भरोसेमंद आर्थिक संबंध बनाने की वकालत की।

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आंकड़े भी इस साझेदारी की मजबूती को दर्शाते हैं। वर्ष 2025 में चीन और जर्मनी के बीच द्विपक्षीय व्यापार 211.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 4.6 प्रतिशत अधिक था। लगातार आठवें वर्ष चीन जर्मनी का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना रहा। वहीं 2026 के शुरुआती दो महीनों में दोनों देशों के बीच व्यापार में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

जर्मनी के लिए चीन केवल एक बड़ा बाजार नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण निवेश और उत्पादन केंद्र भी है। वर्तमान में 5,000 से अधिक जर्मन कंपनियां चीन में सक्रिय हैं। हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण में 61 प्रतिशत जर्मन कंपनियों ने अगले दो वर्षों में चीन में अपना निवेश बढ़ाने की इच्छा जताई है। यह संकेत है कि राजनीतिक बहसों के बावजूद जर्मन उद्योग जगत चीन को लेकर दीर्घकालिक भरोसा बनाए हुए है।

BASF की झानजियांग परियोजना, सीमेंस की डिजिटल फैक्ट्री और BMW के शेनयांग उत्पादन केंद्र जैसे बड़े प्रोजेक्ट इस विश्वास का प्रमाण हैं। जर्मनी के आर्थिक संस्थान IW के अनुसार 2025 में चीन में जर्मन प्रत्यक्ष निवेश 7 अरब यूरो से अधिक रहा, जो पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और जर्मनी के बीच बढ़ता सहयोग केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका प्रभाव पूरे यूरोप-चीन संबंधों पर पड़ सकता है। यदि दोनों देश व्यापारिक मतभेदों को कम करते हुए व्यावहारिक सहयोग का मॉडल पेश करते हैं, तो यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को स्थिर करने और विश्व अर्थव्यवस्था को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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ऐसे समय में जब दुनिया कई आर्थिक और राजनीतिक संकटों से जूझ रही है, चीन और जर्मनी का यह संदेश स्पष्ट है—प्रतिस्पर्धा अपनी जगह है, लेकिन सहयोग ही विकास और स्थिरता का सबसे बड़ा आधार बना रहेगा।

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