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88 दिनों बाद खुला इंटरनेट, ईरान में लोगों ने कहा — “ऐसा लगा जैसे जेल से आज़ादी मिली हो”

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | तेहरान | 28 मई 2026

तीन महीने के डिजिटल अंधेरे के बाद फिर ऑनलाइन हुआ ईरान

Iran में लगभग 88 दिनों तक चले अभूतपूर्व इंटरनेट शटडाउन के बाद आखिरकार इंटरनेट सेवाएं आंशिक रूप से बहाल कर दी गई हैं। इस फैसले के बाद पूरे देश में राहत, भावुकता और उत्साह का माहौल देखा गया। कई ईरानियों ने इस अनुभव की तुलना “जेल से रिहा होने” जैसी भावना से की। एक ईरानी नागरिक ने BBC से बातचीत में कहा कि जब महीनों बाद पहली बार कोई वेबसाइट खुली तो उसे ऐसा महसूस हुआ मानो वह “खुशी में उड़ सकता है।” उसने बताया कि WhatsApp, Telegram और अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म दोबारा चलने लगे तो आंखों में आंसू आ गए। उसके मोबाइल पर सबसे पहले दर्जनों ऐप अपडेट के नोटिफिकेशन आए, जिन्हें देखकर वह भावुक हो गया क्योंकि इतने लंबे समय तक वह पूरी दुनिया से लगभग कट चुका था।

अमेरिका-इज़राइल युद्ध के बाद लगाया गया था इंटरनेट ब्लैकआउट

ईरान सरकार ने फरवरी 2026 में शुरू हुए United States और Israel के साथ युद्ध के बाद इंटरनेट सेवाओं पर कठोर प्रतिबंध लगा दिए थे। सरकार का तर्क था कि यह कदम साइबर हमलों, जासूसी और विदेशी निगरानी को रोकने के लिए जरूरी था। लेकिन अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था NetBlocks ने इसे “आधुनिक इतिहास का सबसे लंबा राष्ट्रीय इंटरनेट शटडाउन” बताया। इंटरनेट बंद होने से न केवल आम लोगों की जिंदगी प्रभावित हुई बल्कि लाखों ऑनलाइन व्यवसाय, छात्र, फ्रीलांसर और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोग भी गंभीर संकट में आ गए। परिवारों का संपर्क टूट गया, विदेशों में रह रहे लोग अपने रिश्तेदारों की सुरक्षा की खबर तक नहीं ले पा रहे थे और युद्ध के बीच भय और अनिश्चितता लगातार बढ़ती चली गई।

“हम अपने परिवार को यह भी नहीं बता पाए कि हम ज़िंदा हैं”

ईरान के कई नागरिकों ने बताया कि इंटरनेट बंद होने के कारण वे विदेशों में रहने वाले अपने परिवारों से संपर्क तक नहीं कर पा रहे थे। एक व्यक्ति ने कहा कि युद्ध के दौरान उनके रिश्तेदार बेहद चिंतित थे, लेकिन वे केवल यह बताने के लिए भी संपर्क नहीं कर सके कि वे सुरक्षित हैं। उसने कहा कि इंटरनेट बंद रहने के वे तीन महीने मानसिक रूप से बेहद दर्दनाक थे। लोगों को ऐसा लग रहा था जैसे पूरा देश दुनिया से काट दिया गया हो। कई परिवारों को अपने प्रियजनों की स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। इस दौरान भय, अफवाहें और तनाव लगातार बढ़ते रहे क्योंकि सूचना के सामान्य माध्यम लगभग पूरी तरह बंद हो चुके थे।

ऑनलाइन कारोबार और छात्रों को हुआ सबसे ज्यादा नुकसान

इंटरनेट बहाली के बाद सबसे बड़ी राहत उन लोगों को मिली है जिनकी रोज़ी-रोटी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर निर्भर थी। कंप्यूटर साइंस की छात्रा पंतेआ ने कहा कि उसका ऑनलाइन बिजनेस पूरी तरह ठप हो गया था और अब इंटरनेट वापस आने से काम सामान्य हो सकेगा। उसने कहा कि सेंसरशिप अब भी बड़ी समस्या बनी हुई है, लेकिन कम से कम कारोबार दोबारा शुरू होने की उम्मीद जगी है। एक अन्य छात्र रास्तिन ने कहा कि ईरान का ऑनलाइन मार्केट “प्यासा” हो चुका था और इंटरनेट बंद रहने से लाखों छोटे व्यवसायों को भारी नुकसान हुआ। हर बार जब इंटरनेट प्रतिबंध लगाए जाते हैं, लोगों की आर्थिक जिंदगी और मुश्किल हो जाती है। खासकर युवा वर्ग, फ्रीलांसर और टेक सेक्टर के लोग इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए।

इंटरनेट बहाल, लेकिन सेंसरशिप और निगरानी का डर बरकरार

हालांकि इंटरनेट सेवाएं दोबारा शुरू हो गई हैं, लेकिन ईरान में सेंसरशिप और निगरानी को लेकर गंभीर चिंताएं बनी हुई हैं। NetBlocks ने कहा है कि इंटरनेट लौटने के बावजूद पहले की तुलना में ज्यादा फिल्टरिंग और प्रतिबंध दिखाई दे रहे हैं। कई मैसेजिंग ऐप्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अब भी सीमित रूप से काम कर रहे हैं। कुछ लोगों ने बताया कि उनके घरों में ब्रॉडबैंड इंटरनेट चल रहा है लेकिन मोबाइल सिम इंटरनेट अब भी बंद है। कई नागरिकों को अब भी VPN और सैटेलाइट इंटरनेट जैसे वैकल्पिक तरीकों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। Proton VPN ने बताया कि इंटरनेट बहाली के बाद उसके प्लेटफॉर्म पर साइनअप में 6000% तक की वृद्धि देखी गई, जिससे साफ है कि लोग अब भी सेंसरशिप से बचने के रास्ते खोज रहे हैं।

युद्ध, प्रतिबंध और महंगाई से टूट चुका है युवा वर्ग

ईरान के युवा वर्ग में निराशा और मानसिक दबाव भी तेजी से बढ़ रहा है। तेहरान के एक 17 वर्षीय छात्र ने कहा कि लोग महंगाई, प्रतिबंधों, कमजोर इंटरनेट और लगातार अस्थिर हालात से पूरी तरह थक चुके हैं। उसने कहा, “अब जीने का मन नहीं करता।” यह बयान केवल एक युवक की हताशा नहीं बल्कि उस व्यापक मानसिक स्थिति को दर्शाता है जिससे आज ईरान का बड़ा युवा वर्ग गुजर रहा है। युद्ध, आर्थिक प्रतिबंध, बेरोजगारी और डिजिटल नियंत्रण ने मिलकर सामाजिक दबाव को और बढ़ा दिया है।

विदेशों में रह रहे ईरानी परिवारों के लिए भी राहत

इंटरनेट बहाली का असर केवल ईरान के भीतर ही नहीं बल्कि दुनिया भर में बसे ईरानी परिवारों पर भी पड़ा है। ब्रिटेन में रहने वाली ईरानी मूल की कॉमेडियन और लेखिका Shaparak Khorsandi ने कहा कि लंबे समय तक अपने परिवार से संपर्क न होना बेहद दर्दनाक अनुभव था। उन्होंने बताया कि इंटरनेट बंद रहने के दौरान उनके एक रिश्तेदार ने खुद को जन्मदिन की शुभकामनाएं भेजते हुए लिखा कि वह जानता है परिवार संपर्क नहीं कर सकता, इसलिए वह खुद ही अपनी ओर से खुद को बधाई दे रहा है। यह घटना बताती है कि इंटरनेट शटडाउन ने केवल तकनीकी समस्या ही नहीं बल्कि भावनात्मक और मानवीय संकट भी पैदा किया।

सरकार ने कहा — “नियंत्रित लेकिन मुक्त इंटरनेट” की ओर कदम

ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रज़ा अरेफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि सरकार “मुक्त लेकिन नियंत्रित इंटरनेट” की दिशा में पहला कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के निर्देश पर इंटरनेट बहाल किया गया ताकि स्मार्ट सेवाओं को दोबारा सक्रिय किया जा सके और नागरिकों की मांगों को पूरा किया जा सके। सरकार इसे वैज्ञानिक और तकनीकी विकास के लिए भी जरूरी बता रही है। हालांकि आलोचकों का कहना है कि “नियंत्रित इंटरनेट” का मतलब वास्तव में और ज्यादा सरकारी निगरानी तथा डिजिटल सेंसरशिप हो सकता है।

दुनिया की नजर अब ईरान के अगले डिजिटल कदम पर

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान में इंटरनेट बहाली केवल तकनीकी फैसला नहीं बल्कि राजनीतिक और सामाजिक संकेत भी है। सरकार पर घरेलू दबाव बढ़ रहा था और लगातार बंद इंटरनेट से अर्थव्यवस्था तथा जनता दोनों प्रभावित हो रहे थे। लेकिन यह भी स्पष्ट है कि ईरान पूरी तरह खुला डिजिटल वातावरण देने के लिए अभी तैयार नहीं दिखता। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इंटरनेट वास्तव में सामान्य रूप से चलता है या फिर कड़ी निगरानी और सेंसरशिप के नए मॉडल के साथ आगे बढ़ाया जाता है। फिलहाल, लंबे अंधेरे के बाद लोगों के लिए यह राहत की एक बड़ी सांस जरूर बन गया है।

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