राष्ट्रीय | समा मेहरा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 28 मई 2026
देशभर में आज ईद-उल-अज़हा पूरे धार्मिक उत्साह, अकीदत और भाईचारे के माहौल में मनाई जा रही है। सुबह से ही देश की बड़ी मस्जिदों, ईदगाहों और धार्मिक स्थलों पर नमाजियों की भारी भीड़ देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने नमाज़-ए-ईद अदा कर देश में अमन, तरक्की, खुशहाली और इंसानियत के लिए दुआएं मांगीं। इस्लाम धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में शामिल ईद-उल-अज़हा को बकरीद और कुर्बानी की ईद भी कहा जाता है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जामा मस्जिद, फतेहपुरी मस्जिद और शाही ईदगाह सहित कई प्रमुख धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में लोगों ने नमाज अदा की। उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, जम्मू-कश्मीर और केरल समेत देश के विभिन्न राज्यों में भी त्योहार को लेकर जबरदस्त उत्साह दिखाई दिया। कई जगहों पर लोगों ने नमाज के बाद एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद दी और भाईचारे का संदेश दिया।
हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है पर्व
ईद-उल-अज़हा का त्योहार हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की उस महान कुर्बानी की याद में मनाया जाता है, जब उन्होंने अल्लाह के हुक्म का पालन करते हुए अपने सबसे प्यारे बेटे की कुर्बानी देने का इरादा किया था। इस पर्व का संदेश त्याग, समर्पण, इंसानियत और अल्लाह पर अटूट विश्वास से जुड़ा हुआ है। इस्लामी मान्यताओं के अनुसार, यह त्योहार हमें सिखाता है कि इंसान को अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर मानवता और ईश्वर की राह पर चलना चाहिए।
दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम, ड्रोन और CCTV से निगरानी
ईद-उल-अज़हा को देखते हुए दिल्ली सहित कई राज्यों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। दिल्ली पुलिस ने राजधानी में लगभग 1,100 पुलिसकर्मियों के साथ 23 अतिरिक्त कंपनियों की तैनाती की है। सुबह पांच बजे से ही जामा मस्जिद, फतेहपुरी मस्जिद और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बल तैनात किए गए। कई स्थानों पर ड्रोन कैमरों और CCTV के जरिए निगरानी रखी जा रही है।
दिल्ली पुलिस ने फ्लैग मार्च, क्विक रिएक्शन टीम (QRT), दंगा-रोधी वाहनों और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी की है ताकि त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। प्रशासन ने खुले में कुर्बानी और सार्वजनिक स्थानों पर अवशेष फेंकने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
क्या है कुर्बानी का सही समय और धार्मिक महत्व
इस्लामी मान्यताओं के अनुसार, ईद-उल-अज़हा की कुर्बानी ईद की नमाज के बाद ही मान्य होती है। नमाज से पहले दी गई कुर्बानी को धार्मिक रूप से स्वीकार नहीं किया जाता। कुर्बानी का समय 10 जिलहिज्ज से शुरू होकर 12 जिलहिज्ज की शाम तक रहता है। इस अवधि को “अय्याम-ए-नहर” कहा जाता है।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार, कुर्बानी केवल एक रस्म नहीं बल्कि त्याग, सेवा और जरूरतमंदों की मदद का प्रतीक है। कुर्बानी के मांस का एक बड़ा हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों में बांटने की परंपरा भी इस पर्व को सामाजिक समानता और इंसानियत का त्योहार बनाती है।
नेताओं और सामाजिक संगठनों ने दिया भाईचारे का संदेश
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई प्रमुख नेताओं ने देशवासियों को ईद-उल-अज़हा की शुभकामनाएं दी हैं। नेताओं ने अपने संदेशों में कहा कि यह पर्व समाज में प्रेम, करुणा, त्याग और एकता की भावना को मजबूत करता है।
दिल्ली बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष अनीश अब्बासी ने भी लोगों से साफ-सफाई, जिम्मेदारी और सामाजिक सौहार्द के साथ त्योहार मनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि कुर्बानी के दौरान सार्वजनिक स्थानों और नालियों में खून या अवशेष न फैलाए जाएं ताकि समाज में सकारात्मक संदेश जाए और स्वच्छता बनी रहे।
तनावपूर्ण वैश्विक माहौल के बीच भारत ने दिया सौहार्द का संदेश
इस बार ईद ऐसे समय पर मनाई जा रही है जब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और तनाव का माहौल बना हुआ है। पश्चिम एशिया में संघर्ष और वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत में विभिन्न समुदायों द्वारा मिल-जुलकर त्योहार मनाना देश की गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक एकता की मजबूत मिसाल माना जा रहा है।
देशभर में कई सामाजिक संगठनों और लोगों द्वारा गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े और जरूरी सामान वितरित किए गए। मस्जिदों और सामाजिक संस्थाओं ने लोगों से अमन, भाईचारे और इंसानियत का संदेश फैलाने की अपील भी की।
ईद-उल-अज़हा केवल त्योहार नहीं, इंसानियत का पैगाम
ईद-उल-अज़हा केवल धार्मिक पर्व नहीं बल्कि इंसानियत, बराबरी और साझी संस्कृति का भी प्रतीक है। देशभर में मनाया जा रहा यह त्योहार एक बार फिर यह संदेश दे रहा है कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता, भाईचारा और सामाजिक सौहार्द में निहित है।




