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शिक्षा व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल, सरकार ने सेना की मदद लेने का बनाया प्लान

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 29 मई 2026

NEET-UG पेपर लीक के बाद बड़ा फैसला: अब भारतीय वायुसेना की निगरानी में पहुंचेंगे परीक्षा पेपर!

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 में कथित पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार अब अभूतपूर्व कदम उठाने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, 21 जून को होने वाली NEET-UG री-टेस्ट परीक्षा के प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और परिवहन की जिम्मेदारी भारतीय वायुसेना यानी Indian Air Force (IAF) को सौंपी जा सकती है। शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने के लिए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सरकार का यह फैसला केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था नहीं बल्कि इस बात का संकेत भी है कि NEET पेपर लीक ने देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर कितना बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। लाखों छात्रों और अभिभावकों के गुस्से के बीच अब केंद्र सरकार परीक्षा प्रक्रिया को “फूलप्रूफ” बनाने की कोशिश में जुटी है।

रक्षा मंत्री आवास पर हाई-लेवल बैठक, कई मंत्री और IAF अधिकारी शामिल

सूत्रों के अनुसार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर एक उच्च स्तरीय बैठक हुई जिसमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में मुख्य रूप से NEET री-टेस्ट के प्रश्नपत्रों की सुरक्षित ढुलाई, डिजिटल निगरानी और लीक रोकने के उपायों पर चर्चा की गई।

बताया जा रहा है कि सरकार अब परीक्षा पेपरों को पारंपरिक ट्रांसपोर्ट चैनल के बजाय रक्षा तंत्र की निगरानी में राज्यों तक पहुंचाने पर विचार कर रही है ताकि किसी भी स्तर पर पेपर लीक या छेड़छाड़ की संभावना समाप्त की जा सके।

पहली बार परीक्षा सुरक्षा में सेना की भूमिका!

भारत के इतिहास में यह शायद पहली बार होगा जब किसी बड़े राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा के पेपरों के परिवहन और लॉजिस्टिक्स में रक्षा बलों की प्रत्यक्ष भूमिका देखने को मिलेगी। इससे पहले पेपर लीक के मामलों में पुलिस, सीबीआई और साइबर एजेंसियों की जांच तो होती रही, लेकिन परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा के लिए सेना की मदद लेने की नौबत नहीं आई थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वायुसेना की निगरानी में पेपर भेजे जाते हैं तो यह सरकार की “जीरो लीक टॉलरेंस” नीति का बड़ा संदेश होगा। हालांकि इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या देश की सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था इतनी कमजोर हो चुकी है कि अब परीक्षा कराने के लिए भी सैन्य तंत्र की जरूरत पड़ रही है?

18.5 लाख छात्रों का भविष्य दांव पर

NEET-UG देश की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षाओं में से एक है, जिसके जरिए मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS और अन्य कोर्सों में प्रवेश मिलता है। इस साल लगभग 18.5 लाख छात्र परीक्षा प्रक्रिया से प्रभावित बताए जा रहे हैं। पेपर लीक के आरोपों के बाद छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिली थी।

कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हुए, सोशल मीडिया पर सरकार और परीक्षा एजेंसियों की आलोचना हुई और विपक्ष ने इसे “युवा विरोधी लापरवाही” बताया। छात्रों का कहना है कि महीनों की मेहनत और मानसिक तनाव के बाद परीक्षा रद्द होना उनके साथ अन्याय है।

विपक्ष का हमला तेज, जवाबदेही पर सवाल

पेपर लीक विवाद को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय पर हमलावर है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी पहले ही सवाल उठा चुके हैं कि आखिर परीक्षा संचालन और डिजिटल सिस्टम का ठेका विवादों में रही कंपनियों को क्यों दिया गया। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से जवाबदेही तय करने की मांग की थी।

अब सेना को शामिल किए जाने की खबर के बाद विपक्ष यह कह रहा है कि सरकार खुद मान चुकी है कि परीक्षा प्रणाली पूरी तरह असुरक्षित हो चुकी है। कई विपक्षी नेताओं ने पूछा है कि यदि पहले ही सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती तो लाखों छात्रों को दोबारा परीक्षा देने की नौबत क्यों आती?

छात्रों में डर और मानसिक दबाव

री-टेस्ट की घोषणा के बाद छात्रों पर मानसिक दबाव और बढ़ गया है। कई छात्र दोबारा तैयारी को लेकर परेशान हैं, जबकि अभिभावकों में भी परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर चिंता बनी हुई है। सोशल मीडिया पर कई छात्रों ने लिखा कि अब उन्हें केवल परीक्षा नहीं बल्कि सिस्टम से भी लड़ना पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार पेपर लीक की घटनाएं केवल प्रशासनिक समस्या नहीं बल्कि युवाओं के भरोसे पर हमला हैं। यदि पारदर्शिता और विश्वसनीयता बहाल नहीं हुई तो देश की प्रतिस्पर्धी परीक्षा प्रणाली पर गहरा असर पड़ सकता है।

क्या सेना की निगरानी से खत्म होगा पेपर लीक?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारतीय वायुसेना की निगरानी में परीक्षा पेपर भेजने से पेपर लीक की समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी? कई शिक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल पेपर ट्रांसपोर्ट नहीं बल्कि पूरी डिजिटल और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।

परीक्षा केंद्रों की निगरानी, एन्क्रिप्टेड डिजिटल सिस्टम, कर्मचारियों की जवाबदेही, साइबर सुरक्षा और राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त परीक्षा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर भी व्यापक सुधार आवश्यक बताए जा रहे हैं।

सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती — भरोसा वापस लाना

केंद्र सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती केवल परीक्षा कराना नहीं बल्कि छात्रों और अभिभावकों का विश्वास वापस जीतना है। NEET-UG विवाद ने यह साफ कर दिया है कि देश में परीक्षा सुरक्षा अब राष्ट्रीय मुद्दा बन चुकी है।

यदि री-टेस्ट निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से सफलतापूर्वक संपन्न होता है तो सरकार कुछ हद तक भरोसा बहाल कर सकती है। लेकिन यदि फिर कोई गड़बड़ी सामने आती है तो यह केवल शिक्षा मंत्रालय ही नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर गंभीर संकट बन सकता है।

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