अंतरराष्ट्रीय | अमित भास्कर | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन / तेहरान | 28 मई 2026
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संभावित युद्धविराम समझौते के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के ताजा बयान ने एक बार फिर दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। ट्रंप ने साफ कहा है कि ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन अमेरिका अभी तक प्रस्तावित डील से संतुष्ट नहीं है। व्हाइट हाउस में कैबिनेट बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा, “ईरान बहुत ज्यादा डील करना चाहता है… लेकिन अभी तक बात वहां नहीं पहुंची है जहां हम चाहते हैं। हम संतुष्ट नहीं हैं, लेकिन होंगे… वरना हमें काम पूरा करना पड़ेगा।”
ट्रंप के इस बयान को पश्चिम एशिया में चल रही बेहद संवेदनशील वार्ताओं के बीच कड़ा संदेश माना जा रहा है। दूसरी ओर Iran के सरकारी टीवी ने दावा किया है कि तेहरान को अमेरिका के साथ संभावित समझौते के एक प्रारंभिक और अनौपचारिक मसौदे की जानकारी मिली है। रिपोर्ट के अनुसार इस मसौदे के तहत ईरान एक महीने के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही को युद्ध-पूर्व स्तर तक बहाल करेगा, जबकि अमेरिका ईरान के आसपास से अपनी सैन्य मौजूदगी कम करेगा और नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा।
हालांकि व्हाइट हाउस ने इस रिपोर्ट को “पूरी तरह मनगढ़ंत” बताते हुए खारिज कर दिया है। इसके बावजूद संकेत साफ हैं कि दोनों देशों के बीच बैकचैनल बातचीत तेज हो चुकी है। यह भी बताया जा रहा है कि संभावित समझौते में ईरान की लगभग 24 अरब डॉलर की जमी हुई संपत्तियों को चरणबद्ध तरीके से जारी करने पर भी चर्चा हो रही है।
इस पूरे संकट का सबसे संवेदनशील केंद्र बना हुआ है Strait of Hormuz — दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा समुद्री मार्ग। ट्रंप ने साफ कहा कि “कोई भी देश होर्मुज जलडमरूमध्य को नियंत्रित नहीं करेगा।” उन्होंने कहा कि यह वैश्विक समुद्री मार्ग सभी के लिए खुला रहेगा और अमेरिका इसकी निगरानी करेगा। यही जलडमरूमध्य दुनिया के तेल और गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा संभालता है, इसलिए यहां तनाव का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल कीमतों पर पड़ रहा है।
इस बीच ईरान के विदेश मंत्रालय और Islamic Revolutionary Guard Corps ने अमेरिका और इजरायल पर इस्लामिक गणराज्य को अस्थिर करने और सत्ता परिवर्तन की साजिश रचने का आरोप लगाया है। ईरानी खुफिया मंत्रालय ने कहा कि दुश्मन अब सैन्य हमलों के बजाय आर्थिक दबाव, अंदरूनी अस्थिरता और तोड़फोड़ के जरिए ईरान को कमजोर करना चाहता है।
उधर अमेरिकी सैन्य विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि ईरान युद्ध में इस्तेमाल हो रहे टॉमहॉक मिसाइल, पैट्रियट और THAAD जैसे हथियारों का स्टॉक दोबारा भरने में अमेरिका को कई साल लग सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक यदि भविष्य में चीन और ताइवान को लेकर तनाव बढ़ता है तो अमेरिका की सैन्य तैयारियों पर इसका असर पड़ सकता है।
तेल बाजार भी लगातार इस तनाव पर नजर बनाए हुए है। हाल के अमेरिकी हमलों और युद्धविराम उल्लंघन के आरोपों के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेज उछाल आया था, हालांकि बाद में बातचीत की उम्मीदों के चलते कुछ नरमी भी देखी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुलता है और युद्धविराम कायम रहता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिल सकती है, लेकिन किसी भी नई सैन्य कार्रवाई से हालात फिर विस्फोटक हो सकते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने दुनिया को एक बार फिर यह एहसास कराया है कि पश्चिम एशिया का संकट केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बन चुका है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अमेरिका और ईरान आने वाले दिनों में किसी ठोस समझौते तक पहुंच पाएंगे या फिर यह तनाव एक नए बड़े युद्ध की तरफ बढ़ेगा।




