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तमिलनाडु में गौहत्या पर तत्काल रोक का आदेश! मद्रास हाईकोर्ट ने बकरीद से पहले सरकार और पुलिस को दिए सख्त निर्देश

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | चेन्नई | 28 मई 2026

बकरीद से ठीक पहले Madras High Court ने तमिलनाडु में गौहत्या को लेकर बड़ा और सख्त आदेश जारी किया है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि पूरे तमिलनाडु में तत्काल प्रभाव से गाय और बछड़ों के वध पर रोक सुनिश्चित की जाए। अदालत ने स्पष्ट कहा कि 30 अगस्त 1976 को जारी उस सरकारी आदेश को पूरी तरह लागू किया जाए, जिसमें दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के हित में गौहत्या पर प्रतिबंध की बात कही गई थी।

ग्रीष्मकालीन अवकाश पीठ के न्यायाधीश Justice G.R. Swaminathan और Justice V. Lakshminarayanan ने राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को आदेश दिया कि बकरीद की पूर्व संध्या हो या कोई अन्य दिन, तमिलनाडु में कहीं भी गाय या बछड़े का वध नहीं होना चाहिए। अदालत ने प्रशासन को यह सुनिश्चित करने को कहा कि कानून का सख्ती से पालन हो और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जाए।

अदालत ने केवल गायों तक ही बात सीमित नहीं रखी बल्कि यह भी कहा कि बकरियों और भेड़ों का वध भी केवल लाइसेंस प्राप्त बूचड़खानों में ही किया जाना चाहिए। अदालत की इस टिप्पणी के बाद पूरे राज्य में प्रशासनिक सतर्कता बढ़ा दी गई है और पुलिस को विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब बकरीद के मौके पर पशु बाजारों में गतिविधियां तेज हो चुकी थीं और कई इलाकों में पशुओं की खरीद-बिक्री बढ़ गई थी। अदालत के आदेश के बाद अब राज्य सरकार पर कानून व्यवस्था बनाए रखने और धार्मिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाने की बड़ी जिम्मेदारी आ गई है।

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राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस फैसले को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई है। एक पक्ष इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, डेयरी उद्योग और पशु संरक्षण के हित में बड़ा कदम बता रहा है, जबकि कुछ समूह इसे धार्मिक स्वतंत्रता और पारंपरिक प्रथाओं से जोड़कर देख रहे हैं। तमिलनाडु जैसे सामाजिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में यह मुद्दा आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत ने अपने आदेश में राज्य सरकार की जिम्मेदारी को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया है। यदि प्रशासन आदेश को प्रभावी ढंग से लागू नहीं कर पाया तो कानून व्यवस्था की स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। यही कारण है कि पुलिस और स्थानीय प्रशासन को पहले से ही हाई अलर्ट पर रखा गया है।

इस बीच कई सामाजिक संगठनों और पशु संरक्षण समूहों ने अदालत के आदेश का स्वागत किया है। वहीं कुछ धार्मिक संगठनों ने कहा है कि वे कानूनी दायरे में रहकर अपने धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करेंगे। तमिलनाडु सरकार की ओर से अभी तक इस आदेश पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि अगले 24 घंटे राज्य प्रशासन के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

मद्रास हाईकोर्ट का यह फैसला अब केवल कानूनी आदेश नहीं बल्कि तमिलनाडु की राजनीति, धार्मिक संवेदनशीलता और सामाजिक संतुलन के केंद्र में आ चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार अदालत के निर्देशों को किस तरह लागू करती है और इसका सामाजिक-राजनीतिक असर कितना व्यापक होता है।

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