अंतरराष्ट्रीय | प्रणव प्रियदर्शी | ABC NATIONAL NEWS | इस्लामाबाद/तेहरान | 22 मई 2026
ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच पाकिस्तान ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच संभावित शांति समझौते का अंतिम मसौदा लगभग तैयार हो चुका है। पाकिस्तानी मध्यस्थता में हो रही इस कूटनीतिक कवायद को लेकर पश्चिम एशिया समेत पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर इन दिनों ईरान दौरे पर हैं, जबकि पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने तेहरान में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात कर युद्ध समाप्ति के प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा की है। सऊदी अरब समर्थित मीडिया संस्थान “अल अरबिया” ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की औपचारिक घोषणा अगले कुछ घंटों में हो सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते में जमीन, समुद्र और हवाई मोर्चों पर तत्काल और बिना शर्त युद्धविराम शामिल है। साथ ही दोनों देशों द्वारा सैन्य, नागरिक और आर्थिक ढांचे को निशाना न बनाने की प्रतिबद्धता भी तय की गई है। मसौदे में मीडिया युद्ध और सैन्य अभियानों को रोकने का भी प्रस्ताव है।
समझौते के तहत अरब खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने पर भी सहमति बनने की खबर है। यही क्षेत्र वैश्विक तेल और LNG आपूर्ति का सबसे अहम मार्ग माना जाता है। युद्ध के कारण इस मार्ग पर संकट बढ़ने से पूरी दुनिया में ऊर्जा कीमतों और महंगाई को लेकर चिंता गहरा गई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि समझौते के पालन की निगरानी और विवादों के समाधान के लिए एक संयुक्त तंत्र बनाया जाएगा। लंबित मुद्दों पर सात दिनों के भीतर नई वार्ता शुरू करने का प्रस्ताव भी शामिल है। बदले में अमेरिका ईरान पर लगे प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाने पर सहमत हो सकता है।
हालांकि अमेरिका ने अभी तक किसी अंतिम समझौते की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने बातचीत में “कुछ अच्छे संकेत” मिलने की बात कही है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वॉशिंगटन अभी अत्यधिक आशावादी नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में टोल व्यवस्था लागू करता है, तो समझौता मुश्किल हो सकता है।
दूसरी ओर, ईरानी सूत्रों का कहना है कि अमेरिका के साथ कुछ मतभेद कम हुए हैं, लेकिन यूरेनियम संवर्धन और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण अब भी सबसे बड़े विवाद बने हुए हैं।
इस संघर्ष का असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है। वैश्विक बाजारों में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, डॉलर मजबूत हुआ है और दुनिया में महंगाई तथा आर्थिक मंदी की आशंका गहरा गई है। भारत समेत कई देशों पर इसका सीधा असर दिखाई देने लगा है, क्योंकि ऊर्जा आयात महंगा हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफल होता है, तो यह पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि साबित हो सकता है। वहीं पाकिस्तान इसे अपनी बड़ी कूटनीतिक सफलता के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि कई विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय शक्तियों के बीच अविश्वास अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
अब पूरी दुनिया की निगाहें तेहरान और वॉशिंगटन पर टिकी हैं कि क्या यह प्रस्ताव वास्तविक शांति समझौते में बदल पाएगा या फिर पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े संघर्ष की ओर बढ़ेगा।




