विश्व / स्वास्थ्य संकट / अफ्रीका | ABC NATIONAL NEWS | किंशासा | 22 मई 2026
अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला वायरस का खतरा अब और गंभीर होता दिखाई दे रहा है। पूर्वी कांगो के दक्षिण किवु प्रांत में इबोला का नया मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की चिंता बढ़ गई है। सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर है कि यह नया संक्रमण उस क्षेत्र में मिला है जो इबोला प्रकोप के मूल केंद्र से सैकड़ों किलोमीटर दूर है और जहां विद्रोही समूहों का प्रभाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि वायरस पिछले लगभग दो महीनों से बिना पहचान के फैलता रहा और अब यह नए इलाकों तक पहुंच चुका है।
रिपोर्टों के अनुसार दक्षिण किवु प्रांत की राजधानी बुकावु के पास ग्रामीण इलाके में संक्रमण की पुष्टि हुई है। इससे पहले पिछले सप्ताह उत्तरी किवु प्रांत की राजधानी गोमा में भी इबोला का मामला सामने आया था। गोमा और आसपास के कई इलाके M23 विद्रोही समूह के प्रभाव वाले क्षेत्रों में आते हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं और निगरानी व्यवस्था के सामने अतिरिक्त चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। संघर्षग्रस्त इलाकों में चिकित्सा टीमों की पहुंच सीमित रहने और लोगों के लगातार विस्थापन के कारण संक्रमण को नियंत्रित करना बेहद कठिन माना जा रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) पहले ही चेतावनी दे चुका है कि स्थानीय स्तर पर वायरस के फैलने का खतरा बहुत अधिक है, हालांकि फिलहाल वैश्विक स्तर पर जोखिम कम बताया जा रहा है। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय समुदाय सतर्क हो गया है क्योंकि इबोला का इतिहास बेहद घातक रहा है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक द्रवों के संपर्क से फैलता है और कई मामलों में मृत्यु दर बहुत अधिक होती है। कांगो इससे पहले भी कई बार इबोला प्रकोप झेल चुका है, लेकिन इस बार चुनौती इसलिए और बड़ी मानी जा रही है क्योंकि संक्रमण ऐसे इलाकों में फैल रहा है जहां राजनीतिक अस्थिरता, सशस्त्र संघर्ष और कमजोर स्वास्थ्य ढांचा पहले से मौजूद है।
भारत समेत कई देशों ने भी एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं। भारत सरकार पहले ही कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान से आने वाले यात्रियों के लिए स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी कर चुकी है। कई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर स्क्रीनिंग बढ़ा दी गई है और यात्रियों की निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। हैदराबाद एयरपोर्ट सहित कुछ बड़े भारतीय हवाई अड्डों पर विशेष स्वास्थ्य जांच व्यवस्था लागू की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक यात्रा और सीमा पार आवाजाही के इस दौर में किसी भी संक्रामक बीमारी को केवल एक देश तक सीमित मानना खतरनाक हो सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह संकट केवल स्वास्थ्य आपदा नहीं, बल्कि मानवीय और राजनीतिक चुनौती भी बनता जा रहा है। कांगो के पूर्वी हिस्सों में लंबे समय से विद्रोही संघर्ष, विस्थापन और अस्थिरता बनी हुई है। ऐसे हालात में संक्रमण की निगरानी, संक्रमित लोगों का पता लगाना और इलाज पहुंचाना बेहद मुश्किल हो जाता है। स्वास्थ्यकर्मियों को कई बार सुरक्षा जोखिमों के बीच काम करना पड़ रहा है, जबकि ग्रामीण इलाकों में अफवाहें और अविश्वास भी बीमारी नियंत्रण में बड़ी बाधा बनते हैं।
इबोला के फैलते खतरे ने एक बार फिर दुनिया को कोविड-19 महामारी के बाद की कमजोरियों की याद दिला दी है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि शुरुआती चरण में संक्रमण को नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह तेजी से व्यापक मानवीय संकट का रूप ले सकता है। फिलहाल कांगो प्रशासन, अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियां और राहत संगठन संक्रमण को सीमित करने, संपर्क ट्रेसिंग बढ़ाने और लोगों को जागरूक करने में जुटे हुए हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या स्वास्थ्य एजेंसियां संघर्षग्रस्त इलाकों में समय रहते वायरस को नियंत्रित कर पाएंगी या यह प्रकोप अफ्रीका के अन्य हिस्सों और वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए नई चुनौती बन जाएगा।




