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ट्रंप-शी वार्ता से व्यापारिक बर्फ पिघली : अमेरिका और चीन ने टैरिफ घटाने पर बनाई सहमति

अंतरराष्ट्रीय / व्यापार | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 17 मई 2026

दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं — अमेरिका और चीन — के बीच लंबे समय से जारी व्यापारिक तनाव में अब नरमी के संकेत दिखाई देने लगे हैं। बीजिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई दो दिवसीय शिखर वार्ता के बाद दोनों देशों ने कुछ उत्पादों पर लगाए गए शुल्क यानी टैरिफ कम करने पर सहमति बनाई है। इस फैसले को वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि बीजिंग और वॉशिंगटन आपसी व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाएंगे। इनमें कुछ उत्पादों पर पारस्परिक रूप से शुल्क कम करना भी शामिल है। दोनों देशों ने विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में व्यापार बढ़ाने पर जोर दिया है। हालांकि अभी किन उत्पादों पर कितनी कटौती होगी, इसका विस्तृत खाका सामने नहीं आया है। दोनों पक्षों के बीच इस संबंध में बातचीत जारी है।

दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनकी और शी जिनपिंग की मुलाकात में टैरिफ पर सीधी चर्चा नहीं हुई। ट्रंप ने कहा, “वे पहले से ही भारी टैरिफ दे रहे हैं, लेकिन हमने इस पर बातचीत नहीं की।” इसके बावजूद चीन के बयान ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि दोनों देश व्यापारिक तनाव कम करने के लिए व्यावहारिक रास्ता तलाश रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले ही युद्ध, ऊर्जा संकट और सप्लाई चेन बाधाओं से जूझ रही है। अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ युद्ध ने पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गहरा असर डाला था। दोनों देशों ने एक-दूसरे के उत्पादों पर भारी शुल्क लगाए थे, जिससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई थी। अब अगर शुल्कों में कमी आती है तो इससे व्यापारिक माहौल में सुधार की उम्मीद की जा रही है।

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इस समझौते का सबसे बड़ा असर कृषि और विमानन क्षेत्र में दिखाई दे सकता है। चीन ने पुष्टि की है कि वह अमेरिका से विमान खरीदेगा। हालांकि कितने विमान खरीदे जाएंगे और किस कंपनी से यह खरीद होगी, इसका खुलासा अभी नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि बोइंग और जीई एयरोस्पेस जैसी अमेरिकी कंपनियों को इसका बड़ा फायदा मिल सकता है। बीजिंग शिखर सम्मेलन में बोइंग और जीई एयरोस्पेस के शीर्ष अधिकारी भी ट्रंप के साथ मौजूद थे और उन्होंने चीनी अधिकारियों से मुलाकात की।

चीन ने यह भी कहा है कि वह अमेरिकी बीफ और पोल्ट्री उत्पादों से जुड़े आयात लाइसेंस संबंधी मुद्दों को हल करने की दिशा में कदम उठाएगा। वहीं अमेरिका ने चीन से आने वाले डेयरी और समुद्री उत्पादों को लेकर उठाई गई चिंताओं पर चर्चा करने का आश्वासन दिया है। अमेरिका की खाद्य एवं औषधि प्रशासन एजेंसी पहले से चीन के कुछ डेयरी उत्पादों और समुद्री खाद्य पदार्थों पर सख्त निगरानी रखती रही है।

दोनों देशों ने निवेश और व्यापार से जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए संयुक्त बोर्ड बनाने पर भी सहमति जताई है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के अनुसार यह “बोर्ड ऑफ ट्रेड” गैर-जरूरी उत्पादों पर लगाए गए अरबों डॉलर के शुल्क कम करने पर चर्चा करेगा। माना जा रहा है कि लगभग 30 अरब डॉलर के सामान पर राहत दी जा सकती है।

हालांकि विशेषज्ञ चेतावनी भी दे रहे हैं कि अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक प्रतिस्पर्धा पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट के अनुसार अगर अमेरिका भविष्य में पुराने “रिसिप्रोकल टैरिफ” दोबारा लागू करता है तो चीन पर लगभग 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क का बोझ पड़ सकता है, जिससे एक बार फिर तनाव बढ़ सकता है।

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बीजिंग में हुई यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और चीन के बीच केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि तकनीक, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ताइवान और इंडो-पैसिफिक रणनीति को लेकर भी प्रतिस्पर्धा तेज है। इसके बावजूद दोनों देशों द्वारा व्यापारिक मोर्चे पर नरमी दिखाना यह संकेत देता है कि दोनों महाशक्तियां पूरी तरह टकराव की स्थिति से बचना चाहती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप और शी जिनपिंग की यह बैठक भले ही सभी विवादों का समाधान न कर पाई हो, लेकिन इसने संवाद और सहयोग के रास्ते को खुला रखा है। दुनिया की अर्थव्यवस्था पर अमेरिका और चीन का गहरा प्रभाव है, इसलिए दोनों देशों के बीच किसी भी सकारात्मक समझौते का असर वैश्विक बाजारों, निवेशकों और व्यापारिक समुदाय पर सीधे दिखाई देगा।

स्पष्ट है कि बीजिंग शिखर वार्ता ने कम से कम व्यापारिक मोर्चे पर तनाव कम करने की दिशा में नई उम्मीद जगाई है। अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह सहमति स्थायी आर्थिक सहयोग में बदलेगी या फिर अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा आने वाले समय में फिर नया मोड़ लेगी।

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