अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 17 मई 2026
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब केवल ईरान और अमेरिका के बीच तनाव तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें चीन, पाकिस्तान, रूस, इजरायल, यूएई और ताइवान जैसे कई बड़े वैश्विक खिलाड़ी सीधे या परोक्ष रूप से शामिल होते दिखाई दे रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य से लेकर लेबनान और ताइवान तक घटनाएं जिस तेजी से बदल रही हैं, उसने दुनिया को एक बार फिर बड़े भू-राजनीतिक संकट के मुहाने पर ला खड़ा किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयानों और लगातार हो रही सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक तनाव को और बढ़ा दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि उनका धैर्य अब जवाब दे रहा है और तेहरान को जल्द समझौता करना चाहिए। ट्रंप ने साफ संकेत दिया कि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती अस्थिरता को लेकर बेहद गंभीर है। इसी बीच ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अपनी बातचीत का हवाला देते हुए दावा किया कि चीन भी इस बात से सहमत है कि ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलना चाहिए। हालांकि चीन ने आधिकारिक तौर पर इस दावे की पुष्टि नहीं की, लेकिन उसने यह जरूर कहा कि यह युद्ध “कभी शुरू ही नहीं होना चाहिए था” और अब इसे समाप्त होना चाहिए।
उधर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर नई रणनीति तैयार कर ली है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अज़ीजी ने कहा कि तेहरान जल्द ही जहाजों की आवाजाही के लिए नया ट्रांजिट सिस्टम घोषित करेगा और इसके तहत विशेष सेवाओं के लिए शुल्क भी वसूला जाएगा। ईरानी मीडिया के मुताबिक चीन, जापान और पाकिस्तान के जहाजों के गुजरने के बाद अब कई यूरोपीय देश भी तेहरान से बातचीत कर रहे हैं ताकि उनके जहाजों को सुरक्षित मार्ग मिल सके। यह घटनाक्रम वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है।
इसी बीच पाकिस्तान भी अचानक इस पूरे संकट में सक्रिय भूमिका निभाता दिखाई दिया। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी दो दिवसीय दौरे पर तेहरान पहुंचे हैं। ईरानी मीडिया का दावा है कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप ने भी दावा किया कि अमेरिका-ईरान संघर्ष विराम “पाकिस्तान के कहने पर” किया गया था। हालांकि इस बयान ने नई कूटनीतिक बहस छेड़ दी है क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि इस संकट में अब दक्षिण एशियाई देशों की भूमिका भी बढ़ सकती है।
दूसरी ओर इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम बढ़ाए जाने के बावजूद हालात सामान्य नहीं हो सके हैं। इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार कई गांवों में बमबारी हुई है, जिससे लोगों में भय और अस्थिरता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह युद्धविराम “कागजी शांति” से ज्यादा कुछ नहीं दिख रहा, क्योंकि दोनों पक्षों के बीच अविश्वास अब भी गहरा बना हुआ है।
इसी तनावपूर्ण माहौल में ट्रंप का ताइवान को लेकर दिया गया बयान भी चर्चा के केंद्र में आ गया। चीन यात्रा के बाद ट्रंप ने ताइवान को औपचारिक स्वतंत्रता की दिशा में कदम न बढ़ाने की चेतावनी दी। इसके जवाब में ताइवान ने खुद को “संप्रभु और स्वतंत्र राष्ट्र” बताते हुए कहा कि वह चीन के अधीन नहीं है। ताइवान ने अमेरिका से हथियार खरीद को अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी बताया। इससे चीन और अमेरिका के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
उधर अमेरिका के भीतर भी सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी गैस स्टेशनों के ईंधन मॉनिटरिंग सिस्टम पर साइबर हमलों के पीछे ईरानी हैकर्स का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अमेरिकी एजेंसियों का मानना है कि यह हमला भविष्य में बड़े साइबर हमलों का संकेत हो सकता है।
रूस भी इस पूरे संकट पर करीबी नजर बनाए हुए है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा की है। वहीं यूएई ने ईरान के उन आरोपों को खारिज कर दिया है जिनमें उसे युद्ध में भूमिका निभाने वाला बताया गया था।
स्पष्ट है कि पश्चिम एशिया का यह संकट अब केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गया है। इसमें अमेरिका, चीन, रूस, पाकिस्तान, इजरायल और खाड़ी देशों की सक्रिय भागीदारी ने इसे वैश्विक शक्ति संघर्ष का रूप दे दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य, साइबर सुरक्षा, परमाणु विवाद, ताइवान और तेल राजनीति — सब कुछ अब एक-दूसरे से जुड़ता दिखाई दे रहा है। दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति इस बढ़ते संकट को रोक पाएगी या आने वाले दिनों में वैश्विक तनाव और अधिक खतरनाक रूप ले सकता है।




