राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय | सुरजीत सिंह | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 16 मई 2026
टाटा समूह के स्वामित्व वाली Air India ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए जून से अगस्त 2026 के बीच कई प्रमुख विदेशी रूट्स पर उड़ानें अस्थायी रूप से रद्द करने और कई सेवाओं की संख्या घटाने की घोषणा की है। एयरलाइन ने साफ कहा है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कई देशों के एयरस्पेस प्रतिबंध और रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके जेट फ्यूल के दामों ने अंतरराष्ट्रीय संचालन को बेहद महंगा और मुश्किल बना दिया है। एयर इंडिया द्वारा जिन प्रमुख उड़ानों को अस्थायी रूप से बंद किया गया है उनमें दिल्ली-शिकागो, मुंबई-न्यूयॉर्क, दिल्ली-शंघाई, चेन्नई-सिंगापुर, मुंबई-ढाका और दिल्ली-माले जैसी महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सेवाएं शामिल हैं। इसके अलावा यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और उत्तरी अमेरिका के कई रूट्स पर साप्ताहिक उड़ानों की संख्या भी कम की जा रही है। एयरलाइन का कहना है कि यह कदम “ऑपरेशनल स्थिरता” बनाए रखने और अंतिम समय पर यात्रियों को होने वाली परेशानी कम करने के लिए उठाया गया है।
एयर इंडिया ने बताया कि पश्चिम एशिया संकट और ईरान युद्ध के बाद कई महत्वपूर्ण एयरस्पेस बंद या सीमित हो गए हैं, जिसके कारण विमानों को लंबा रास्ता लेना पड़ रहा है। इससे उड़ानों का समय बढ़ रहा है और ईंधन लागत में भारी उछाल आया है। पहले से पाकिस्तान द्वारा भारतीय विमानों के लिए एयरस्पेस बंद किए जाने के कारण एयर इंडिया की लंबी दूरी की उड़ानें पहले ही दबाव में थीं। अब ईरान-खाड़ी संकट ने हालात और कठिन बना दिए हैं। कई उड़ानों को यूरोप और मध्य एशिया के वैकल्पिक रूट्स से होकर उड़ाना पड़ रहा है, जिससे परिचालन लागत कई गुना बढ़ गई है। विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि एयरलाइंस के लिए सबसे बड़ा संकट केवल तेल की कीमतें नहीं बल्कि अस्थिर एयरस्पेस और बढ़ता बीमा खर्च भी बन गया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार एयर इंडिया को वित्त वर्ष 2025-26 में 2.8 अरब डॉलर यानी लगभग 26 हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। एयरलाइन में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली Singapore Airlines को भी भारी वित्तीय झटका लगा है। कंपनी ने माना है कि बढ़ती ईंधन कीमतें, एयरस्पेस प्रतिबंध और अंतरराष्ट्रीय परिचालन लागत एयर इंडिया के पुनर्गठन अभियान पर गंभीर असर डाल रहे हैं। टाटा समूह द्वारा एयर इंडिया को वैश्विक स्तर पर मजबूत ब्रांड बनाने की कोशिशों के बीच यह संकट बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। पिछले कुछ वर्षों में एयर इंडिया ने बड़े पैमाने पर नए विमान खरीदने और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क विस्तार की योजना बनाई थी, लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात ने उन योजनाओं की गति धीमी कर दी है।
उत्तरी अमेरिका रूट्स पर असर सबसे अधिक दिखाई दे रहा है। दिल्ली-शिकागो और दिल्ली-नेवार्क जैसी सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद किया गया है, जबकि टोरंटो, सैन फ्रांसिस्को और कुछ यूरोपीय रूट्स पर उड़ानों की संख्या कम की जा रही है। दक्षिण-पूर्व एशिया में सिंगापुर, बैंकॉक, कुआलालंपुर और ढाका जैसे रूट प्रभावित हुए हैं। एयर इंडिया का कहना है कि वह हालात सामान्य होने पर सेवाएं फिर बहाल करेगी। हालांकि एविएशन सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबा चला तो उड़ानों की बहाली में अपेक्षा से अधिक समय लग सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक एयरलाइन का व्यावसायिक फैसला नहीं बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक संकट का सीधा आर्थिक असर है। पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात ने वैश्विक एविएशन सेक्टर को झटका दिया है। तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और एयरलाइंस के लिए लंबी दूरी की उड़ानें आर्थिक रूप से कम लाभकारी होती जा रही हैं। यही वजह है कि दुनिया की कई बड़ी एयरलाइंस भी अपने नेटवर्क की समीक्षा कर रही हैं। अमेरिका, यूरोप और एशिया की कई एयरलाइंस ने खाड़ी क्षेत्र से गुजरने वाले रूट्स पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए हैं। इससे टिकटों की कीमतें और बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
इस घटनाक्रम का असर भारतीय यात्रियों पर भी साफ दिखाई देगा। गर्मियों की छुट्टियों और अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल सीजन के दौरान टिकट महंगे हो सकते हैं, कनेक्टिंग फ्लाइट्स बढ़ सकती हैं और यात्रियों को लंबा इंतजार झेलना पड़ सकता है। खासकर अमेरिका, यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया जाने वाले यात्रियों को अब वैकल्पिक रूट्स और विदेशी एयरलाइंस का सहारा लेना पड़ सकता है। कई ट्रैवल एजेंसियों का कहना है कि अचानक रद्द हुई उड़ानों के कारण यात्रियों में भ्रम और चिंता बढ़ रही है। छात्रों, व्यापारियों और प्रवासी भारतीयों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है। इसी बीच कई विदेशी एयरलाइंस भारत में अपनी सेवाएं बढ़ाने की तैयारी में हैं ताकि एयर इंडिया की कम हुई क्षमता का फायदा उठाया जा सके।
एयर इंडिया ने हालांकि यह भी कहा है कि कटौतियों के बावजूद वह हर महीने 1200 से अधिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन जारी रखेगी। कंपनी ने यात्रियों को भरोसा दिलाया है कि प्रभावित यात्रियों को वैकल्पिक उड़ान, तारीख बदलने की सुविधा या रिफंड दिया जाएगा। एयरलाइन ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले अपनी फ्लाइट की स्थिति नियमित रूप से जांचते रहें।
विश्लेषकों का कहना है कि यह फैसला भारतीय एविएशन सेक्टर के लिए चेतावनी भी है। अगर पश्चिम एशिया का संकट लंबा खिंचता है और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो भारतीय एयरलाइंस पर वित्तीय दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में एयर इंडिया की यह “रूट रेशनलाइजेशन” रणनीति आने वाले महीनों में पूरे विमानन उद्योग की दिशा तय कर सकती है। यह संकट केवल एक एयरलाइन की चुनौती नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति, युद्ध, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के बदलते समीकरणों का सीधा असर है, जिसकी कीमत अब आम यात्रियों को भी चुकानी पड़ सकती है।




