अंतरराष्ट्रीय | प्रणव प्रियदर्शी | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग | 15 मई 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की चीन यात्रा को लेकर दुनिया भर की निगाहें बीजिंग पर टिकी रहीं। जहां एक ओर इस यात्रा को अमेरिका-चीन रिश्तों में तनाव कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे दौरे से सबसे बड़ा रणनीतिक लाभ चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping को मिला है। भव्य स्वागत, हाई-प्रोफाइल बैठकों और कारोबारी प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी ने चीन को वैश्विक मंच पर मजबूत और प्रभावशाली शक्ति के रूप में पेश करने का मौका दिया।
इस यात्रा का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यह रहा कि चीन ने खुद को अमेरिका के बराबर ताकत के रूप में स्थापित करने की कोशिश की। बीजिंग में ट्रंप को दिए गए रेड कार्पेट स्वागत और दोनों नेताओं की बराबरी के स्तर पर हुई बातचीत को चीन की कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में ट्रंप लगातार चीन पर तीखे हमले करते रहे थे, चाहे वह व्यापार युद्ध हो, कोविड-19 विवाद हो या भारी टैरिफ लगाने का मामला। लेकिन अब वही ट्रंप चीन पहुंचकर शी जिनपिंग के साथ सौहार्दपूर्ण माहौल में नजर आए। इससे चीन को अपने घरेलू राजनीतिक संदेश को मजबूत करने का अवसर मिला कि अमेरिका भी अब चीन की ताकत को नजरअंदाज नहीं कर सकता।
दूसरा बड़ा फायदा चीन को वैश्विक कूटनीतिक छवि के स्तर पर मिला है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, ईरान संकट और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच चीन खुद को “स्थिरता लाने वाली शक्ति” के रूप में प्रस्तुत करना चाहता है। ट्रंप के साथ उच्चस्तरीय वार्ता के जरिए बीजिंग ने यह संदेश देने की कोशिश की कि दुनिया के बड़े संकटों के समाधान में चीन की भूमिका अब अनिवार्य हो चुकी है। अंतरराष्ट्रीय मामलों में चीन को अलग-थलग करने की अमेरिकी कोशिशों के बीच यह यात्रा बीजिंग के लिए एक बड़ी प्रतीकात्मक सफलता मानी जा रही है।
इस दौरे का तीसरा और शायद सबसे महत्वपूर्ण पहलू अमेरिकी कारोबारी दिग्गजों की मौजूदगी रही। ट्रंप के साथ कई बड़े अमेरिकी उद्योगपति और टेक कंपनियों के प्रमुख चीन पहुंचे। इनमें Elon Musk और Tim Cook जैसे नाम प्रमुख रहे। चीन ने इस मौके का इस्तेमाल यह दिखाने के लिए किया कि तमाम राजनीतिक तनावों के बावजूद अमेरिकी कंपनियां अब भी चीनी बाजार और वहां की मैन्युफैक्चरिंग व्यवस्था पर निर्भर हैं। इससे शी जिनपिंग सरकार को घरेलू स्तर पर यह संदेश देने में मदद मिली कि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और वैश्विक कंपनियां अब भी चीन को नजरअंदाज नहीं कर सकतीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की यह यात्रा केवल एक कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का बड़ा संकेत है। चीन ने इस पूरे आयोजन को बेहद सावधानी से तैयार किया और कोशिश की कि दुनिया को यह संदेश जाए कि अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा जरूर है, लेकिन वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में चीन की केंद्रीय भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।




