व्यापार/अंतरराष्ट्रीय | अमित भास्कर | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग | 15 मई 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने चीन दौरे के दौरान बड़ा दावा करते हुए कहा है कि चीन अमेरिकी विमान निर्माता Boeing से 200 बोइंग विमान खरीदने पर सहमत हुआ है। हालांकि चीन की ओर से अब तक इस समझौते की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन ट्रंप के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय एविएशन बाजार, वैश्विक व्यापार और कूटनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया से बातचीत में कहा कि चीन ने बोइंग विमानों की खरीद को लेकर सकारात्मक प्रतिबद्धता दिखाई है।
यह दावा ऐसे समय सामने आया है जब दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध, टेक्नोलॉजी प्रतिबंध, ताइवान मुद्दा और ईरान संकट को लेकर तनाव लगातार बना हुआ है। इसके बावजूद दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह विमान सौदा आगे बढ़ता है तो यह केवल कारोबारी समझौता नहीं होगा, बल्कि दोनों देशों के बीच रिश्तों में नरमी और संवाद की नई शुरुआत का संकेत भी हो सकता है।
पिछले कुछ वर्षों में बोइंग कंपनी कई चुनौतियों से घिरी रही है। सुरक्षा खामियों, तकनीकी विवादों और वैश्विक सप्लाई चेन संकट के कारण कंपनी को भारी नुकसान झेलना पड़ा था। लेकिन 2026 में बोइंग की डिलीवरी और उत्पादन में सुधार के संकेत मिलने लगे हैं। ऐसे में चीन जैसे विशाल एविएशन बाजार से संभावित ऑर्डर कंपनी के लिए नई ऊर्जा का काम कर सकता है। चीन दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में शामिल है और वहां घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की मांग लगातार बढ़ रही है।
अमेरिका के लिए बोइंग केवल एक निजी कंपनी नहीं बल्कि आर्थिक और रणनीतिक ताकत का प्रतीक मानी जाती है। 1916 में स्थापित यह कंपनी लाखों लोगों को रोजगार देती है और अमेरिकी निर्यात अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभाती है। बोइंग का विशाल सप्लाई नेटवर्क पूरे अमेरिका में फैला हुआ है, जिसके कारण इसे “टू बिग टू फेल” कंपनियों में गिना जाता है। विमान बिक्री से होने वाली आय अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करती है और यही वजह है कि हर अमेरिकी प्रशासन वैश्विक स्तर पर बोइंग के विस्तार को समर्थन देता रहा है।
बोइंग का महत्व रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में भी बेहद बड़ा है। कंपनी लड़ाकू विमान, मिसाइल रक्षा प्रणाली, सैन्य हेलीकॉप्टर और सैटेलाइट तकनीक तैयार करती है। अमेरिकी राष्ट्रपति का आधिकारिक विमान एयर फोर्स वन भी बोइंग द्वारा निर्मित है। यही कारण है कि किसी भी बड़े बोइंग सौदे को अमेरिका केवल व्यापार नहीं बल्कि अपनी वैश्विक रणनीतिक शक्ति और प्रभाव से जोड़कर देखता है।
दूसरी ओर चीन अपनी घरेलू विमान निर्माता कंपनी COMAC को तेजी से मजबूत कर रहा है। चीन की कोशिश है कि वह वैश्विक विमान बाजार में अमेरिकी बोइंग और यूरोपीय एयरबस जैसी कंपनियों को चुनौती दे सके। ऐसे में यदि चीन वास्तव में बोइंग से 200 विमान खरीदता है तो यह वैश्विक व्यापार संतुलन और अंतरराष्ट्रीय राजनीति दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संभावित डील आने वाले समय में अमेरिका-चीन संबंधों और वैश्विक एविएशन उद्योग की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।




