अंतरराष्ट्रीय | एजेंसी/ ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग | 14 मई 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के चीन पहुंचने के बाद एक सवाल अंतरराष्ट्रीय मीडिया और राजनीतिक हलकों में तेजी से चर्चा का विषय बन गया — आखिर चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping खुद एयरपोर्ट पर ट्रंप के स्वागत के लिए क्यों नहीं पहुंचे?
बीजिंग में ट्रंप का भव्य स्वागत किया गया। एयर फोर्स वन के उतरते ही लाल कालीन बिछाया गया, सैन्य बैंड ने धुन बजाई और सैकड़ों युवाओं ने अमेरिकी और चीनी झंडे लहराकर “वेलकम” के नारे लगाए। लेकिन इस पूरे कार्यक्रम में सबसे ज्यादा ध्यान इस बात ने खींचा कि चीन के सर्वोच्च नेता शी जिनपिंग एयरपोर्ट पर मौजूद नहीं थे। उनकी जगह चीन के उपराष्ट्रपति Han Zheng ने ट्रंप का स्वागत किया।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसे किसी अपमान या दूरी के संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। दरअसल चीन की कूटनीतिक परंपरा में आमतौर पर राष्ट्रपति या सर्वोच्च नेता किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष का एयरपोर्ट पर स्वागत करने नहीं जाते। यह जिम्मेदारी वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों या उपराष्ट्रपति स्तर के नेताओं को दी जाती है।
दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप के 2017 के चीन दौरे के दौरान भी शी जिनपिंग एयरपोर्ट नहीं पहुंचे थे। उस समय चीन की ओर से State Councillor Yang Jiechi को स्वागत के लिए भेजा गया था, जो Han Zheng से अपेक्षाकृत निचले स्तर के नेता माने जाते थे। ऐसे में इस बार उपराष्ट्रपति को भेजना बीजिंग की ओर से ट्रंप के प्रति अधिक सम्मान और महत्व देने के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चीन अपने कूटनीतिक प्रोटोकॉल को लेकर बेहद सख्त और प्रतीकात्मक राजनीति में सावधान रहता है। शी जिनपिंग आमतौर पर विदेशी नेताओं से औपचारिक मुलाकात ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल या Zhongnanhai परिसर में करते हैं, न कि एयरपोर्ट पर। इससे चीन अपने सर्वोच्च नेतृत्व की संस्थागत गरिमा बनाए रखने की कोशिश करता है।
इस बीच ट्रंप का यह दौरा कई मायनों में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध, तकनीकी प्रतिस्पर्धा, ताइवान विवाद और ईरान युद्ध जैसे मुद्दों पर तनाव बना हुआ है। ऐसे में दोनों देशों के बीच यह शिखर वार्ता वैश्विक राजनीति के लिहाज से अहम मानी जा रही है।
ट्रंप अपने साथ कई बड़े अमेरिकी उद्योगपतियों और टेक कंपनियों के प्रमुखों को भी चीन लेकर पहुंचे हैं। इनमें Elon Musk, Jensen Huang और Apple के CEO Tim Cook शामिल हैं। ट्रंप ने चीन रवाना होने से पहले कहा था कि वह शी जिनपिंग से चीन की अर्थव्यवस्था को अमेरिकी कंपनियों के लिए “और अधिक खोलने” की मांग करेंगे।
दूसरी ओर चीन भी इस मुलाकात को रणनीतिक नजरिये से देख रहा है। माना जा रहा है कि शी जिनपिंग अमेरिका से ताइवान को हथियार आपूर्ति कम करने और व्यापारिक प्रतिबंधों में नरमी की मांग उठा सकते हैं। साथ ही चीन चाहता है कि दोनों देशों के बीच पिछले वर्ष हुए टैरिफ समझौते को आगे बढ़ाया जाए।
ईरान युद्ध भी इस बैठक का बड़ा मुद्दा रहेगा। अमेरिका चाहता है कि चीन अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर ईरान पर दबाव बनाए ताकि पश्चिम एशिया में तनाव कम हो सके। चीन ईरान का बड़ा आर्थिक साझेदार है और उसकी अर्थव्यवस्था भी तेल आपूर्ति पर निर्भर है।
बीजिंग में सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं। तियानमेन स्क्वायर, प्रमुख होटलों और सरकारी परिसरों के आसपास अतिरिक्त पुलिस और सैन्य बल तैनात किया गया है। चीन इस दौरे को अपनी वैश्विक ताकत और स्थिरता दिखाने के अवसर के रूप में भी देख रहा है।
गुरुवार को ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में औपचारिक बैठक होगी। इसके बाद राजकीय भोज आयोजित किया जाएगा। शुक्रवार को दोनों नेता Zhongnanhai परिसर में विशेष मुलाकात और संयुक्त कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।
फिलहाल एयरपोर्ट पर शी जिनपिंग की अनुपस्थिति को लेकर उठ रहे सवालों के बीच विशेषज्ञ यही मान रहे हैं कि यह चीन की पुरानी कूटनीतिक परंपरा का हिस्सा है, न कि किसी राजनीतिक संदेश का संकेत। लेकिन इतना तय है कि ट्रंप और शी की यह मुलाकात आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।




