अंतरराष्ट्रीय | अमित भास्कर | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग | 13 मई 2026
चीन और ताजिकिस्तान ने अपने रिश्तों को नई रणनीतिक ऊंचाई पर पहुंचाते हुए कई बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। बीजिंग में मंगलवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमान के बीच हुई अहम बैठक में दोनों देशों ने सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल इकोनॉमी, ग्रीन एनर्जी और Belt and Road Initiative (BRI) को लेकर गहरे सहयोग का ऐलान किया। बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने साफ कहा कि बदलते वैश्विक माहौल के बावजूद चीन और ताजिकिस्तान हमेशा “अच्छे पड़ोसी, भरोसेमंद दोस्त और विकास के साझेदार” बने रहेंगे। दोनों नेताओं ने “स्थायी अच्छे पड़ोसी, मित्रता और सहयोग संधि” पर हस्ताक्षर किए, जिसे क्षेत्रीय राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चीन ने ताजिकिस्तान को राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और राजनीतिक स्थिरता के मुद्दों पर पूरा समर्थन देने का भी भरोसा दिया। शी जिनपिंग ने कहा कि दोनों देशों को आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद जैसी “तीन बुराइयों” के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करनी होगी।
इस दौरान चीन ने BRI परियोजनाओं को तेज करने पर भी जोर दिया। दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, ट्रांसपोर्ट, डिजिटल इकोनॉमी, स्मार्ट सिटी, AI और ग्रीन माइनिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। बैठक के बाद 10 से ज्यादा सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ द्विपक्षीय बैठक नहीं बल्कि मध्य एशिया में चीन की बढ़ती रणनीतिक पकड़ का बड़ा संकेत है। चीन लगातार ताजिकिस्तान समेत मध्य एशियाई देशों में अपने आर्थिक और सुरक्षा प्रभाव को मजबूत कर रहा है। खासकर BRI के जरिए चीन इस पूरे क्षेत्र को अपने व्यापारिक और रणनीतिक नेटवर्क से जोड़ना चाहता है।
ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति रहमान ने भी “वन चाइना पॉलिसी” का खुला समर्थन करते हुए कहा कि ताइवान चीन का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने चीन की वैश्विक भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय संकटों, खासकर मध्य पूर्व तनाव को कम करने में बीजिंग अहम भूमिका निभा रहा है।
बैठक में Middle East संकट और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी चर्चा हुई। ताजिकिस्तान ने चीन की उस कोशिश की तारीफ की जिसमें वह युद्ध और वैश्विक तनाव को बातचीत के जरिए हल करने की बात कर रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक ऐसे समय हुई है जब अमेरिका, चीन, रूस और मध्य एशिया के बीच भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज हो चुकी है। चीन अब सिर्फ आर्थिक शक्ति नहीं बल्कि सुरक्षा और कूटनीतिक मोर्चे पर भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।
बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने “नई रणनीतिक साझेदारी” को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई। इसके अलावा शिक्षा, कृषि, मीडिया, संस्कृति, वैज्ञानिक अनुसंधान और बाजार निगरानी जैसे क्षेत्रों में भी कई समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।
विशेषज्ञों का कहना है कि AI और डिजिटल इकोनॉमी में चीन-ताजिकिस्तान सहयोग भविष्य में पूरे मध्य एशिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। चीन पहले ही इस क्षेत्र में रेलवे, सड़क, ऊर्जा और डिजिटल नेटवर्क के जरिए अपना प्रभाव तेजी से बढ़ा चुका है।
अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि चीन की यह बढ़ती रणनीतिक सक्रियता अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए नई चुनौती कैसे बनती है।




