अंतरराष्ट्रीय | लुबना आबिदी | ABC NATIONAL NEWS | लंदन | 13 मई 2026
ब्रिटेन की राजनीति इस समय बड़े उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की सरकार के भीतर बगावत अब खुलकर सामने आने लगी है। लगातार चुनावी झटकों, गिरती लोकप्रियता और पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष के बीच लेबर पार्टी के चौथे मंत्री ने भी इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही स्टारमर पर प्रधानमंत्री पद छोड़ने का दबाव और तेज हो गया है। इस्तीफा देने वाले मंत्री ने साफ कहा कि पार्टी को “नई दिशा और नए नेतृत्व” की जरूरत है। इससे पहले भी कई मंत्री और सांसद स्टारमर की कार्यशैली पर सवाल उठा चुके हैं। अब हालात ऐसे बन गए हैं कि लेबर पार्टी के भीतर खुली नाराजगी और नेतृत्व परिवर्तन की मांग जोर पकड़ती जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, स्थानीय चुनावों में लेबर पार्टी के खराब प्रदर्शन ने पार्टी नेतृत्व की नींद उड़ा दी है। कई सांसदों का मानना है कि स्टारमर जनता के बीच अपनी पकड़ खो चुके हैं और पार्टी को अगले आम चुनाव में भारी नुकसान हो सकता है। इसी वजह से अब बड़ी संख्या में सांसद नेतृत्व बदलने की मांग कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि 80 से ज्यादा लेबर सांसद स्टारमर के खिलाफ खुलकर आवाज उठा चुके हैं। पार्टी के अंदर लगातार बंद कमरे की बैठकों का दौर चल रहा है। कई वरिष्ठ नेता मानते हैं कि अगर जल्द फैसला नहीं लिया गया तो पार्टी की स्थिति और खराब हो सकती है।
हालांकि बढ़ते दबाव के बावजूद कीर स्टारमर ने साफ कर दिया है कि वह इस्तीफा नहीं देंगे। कैबिनेट बैठक में उन्होंने कहा कि वह सरकार चलाते रहेंगे और किसी भी राजनीतिक चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं। स्टारमर समर्थकों का कहना है कि यह मुश्किल दौर जरूर है, लेकिन नेतृत्व बदलना समाधान नहीं होगा।
इधर ब्रिटिश राजनीति में संभावित नए नेताओं को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। हेल्थ सेक्रेटरी वेस स्ट्रीटिंग, एंडी बर्नहैम और एंजेला रेनर जैसे नेताओं के नाम संभावित दावेदारों में गिने जा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे लेबर पार्टी के भीतर “पावर स्ट्रगल” के तौर पर देखा जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह संकट सिर्फ एक नेता का नहीं बल्कि पूरे ब्रिटिश राजनीतिक सिस्टम में बढ़ती अस्थिरता का संकेत है। ब्रिटेन पहले ही आर्थिक दबाव, महंगाई, ऊर्जा संकट और अंतरराष्ट्रीय तनावों से जूझ रहा है। ऐसे समय में सरकार के भीतर उठी यह बगावत प्रधानमंत्री स्टारमर के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक खतरा बन गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, वित्तीय बाजारों में भी इस राजनीतिक संकट का असर दिखने लगा है। निवेशकों के बीच चिंता बढ़ रही है कि अगर ब्रिटेन में नेतृत्व संकट गहराया तो इसका असर अर्थव्यवस्था और बाजारों पर भी पड़ सकता है।
वहीं स्टारमर समर्थक सांसदों ने भी मोर्चा संभाल लिया है। कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि पार्टी को इस समय एकजुट रहने की जरूरत है, न कि अंदरूनी लड़ाई में उलझने की। लेकिन दूसरी तरफ असंतुष्ट सांसद लगातार दबाव बना रहे हैं कि पार्टी को नए चेहरे के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
ब्रिटेन की राजनीति में अब सबसे बड़ा सवाल यही बन गया है कि क्या कीर स्टारमर इस बगावत के बीच अपनी कुर्सी बचा पाएंगे या फिर लेबर पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी उन्हें पद छोड़ने पर मजबूर कर देगी। आने वाले कुछ दिन ब्रिटेन की राजनीति की दिशा तय करने वाले माने जा रहे हैं।




