स्पोर्ट्स | एजेंसी/ ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 13 मई 2026
FIFA World Cup 2026 शुरू होने में अब सिर्फ एक महीना बचा है, लेकिन दुनिया के दो सबसे बड़े देशों—भारत और चीन—में अब तक टूर्नामेंट के टीवी प्रसारण अधिकार तय नहीं हो पाए हैं। यह स्थिति फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फैंटिनो के लिए बड़ी चिंता बन गई है, क्योंकि दोनों देशों की कुल आबादी दुनिया की एक-तिहाई से ज्यादा है। FIFA ने शुरुआत में भारत के लिए लगभग 100 मिलियन डॉलर और चीन के लिए 250 से 300 मिलियन डॉलर तक की मांग रखी थी। लेकिन लगातार बातचीत के बावजूद कोई बड़ा ब्रॉडकास्टिंग समझौता नहीं हो पाया। अब बताया जा रहा है कि कीमतों में भारी कटौती तक करनी पड़ी है।
भारत में स्थिति सबसे ज्यादा दिलचस्प मानी जा रही है। यहां FIFA World Cup 2026 के प्रसारण अधिकारों के लिए शुरुआती दिलचस्पी दिखाने वाली कंपनियां अब पीछे हटती नजर आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार भारत में अब मांग घटाकर करीब 35 मिलियन डॉलर तक लाई गई है, जबकि सबसे बड़ी बोली केवल लगभग 20 मिलियन डॉलर की बताई जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे सबसे बड़ा कारण भारत का क्रिकेट-केंद्रित स्पोर्ट्स मार्केट है। IPL और क्रिकेट प्रसारण पहले से ही अरबों रुपये के बाजार पर कब्जा किए हुए हैं। ऐसे में देर रात और सुबह होने वाले फुटबॉल मैचों के लिए ब्रॉडकास्टर्स भारी रकम लगाने से बच रहे हैं।
जानकारों के मुताबिक 2026 वर्ल्ड कप के अधिकांश मैच भारतीय समयानुसार देर रात या सुबह होंगे। यही वजह है कि विज्ञापनदाताओं की दिलचस्पी भी सीमित दिखाई दे रही है। हालांकि फुटबॉल प्रेमियों के बीच ब्राजील, अर्जेंटीना, पुर्तगाल, जर्मनी और इंग्लैंड जैसी टीमों को लेकर उत्साह जरूर है, लेकिन पूरे 104 मैचों के लिए भारी निवेश करने में कंपनियां जोखिम महसूस कर रही हैं।
एक और बड़ा कारण भारतीय रुपये की गिरती कीमत को भी माना जा रहा है। 2013 में जब पुराने प्रसारण समझौते हुए थे, तब एक डॉलर करीब 54 रुपये के बराबर था। अब यही आंकड़ा करीब 95 रुपये तक पहुंच चुका है। इससे विदेशी अधिकार खरीदना और महंगा हो गया है।
उधर चीन में भी हालात फीफा के लिए बेहद मुश्किल बताए जा रहे हैं। चीन का सरकारी प्रसारक CCTV अब तक FIFA की भारी मांग मानने को तैयार नहीं हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार फीफा जहां 250 से 300 मिलियन डॉलर तक चाहता था, वहीं चीनी प्रसारक का बजट लगभग 60 से 80 मिलियन डॉलर तक सीमित बताया जा रहा है।
चीन में भी टाइमिंग एक बड़ी समस्या बन रही है। बीजिंग और न्यूयॉर्क के बीच लगभग 12 घंटे का अंतर होने के कारण अधिकांश मैच चीन में असुविधाजनक समय पर प्रसारित होंगे। इसके अलावा चीनी फुटबॉल टीम लगातार वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई करने में असफल रही है, जिससे आम दर्शकों में उत्साह भी सीमित हो गया है।
फुटबॉल विश्लेषकों का मानना है कि यह संकट सिर्फ प्रसारण अधिकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि FIFA के ग्लोबल बिजनेस मॉडल पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। फीफा ने 48 टीमों वाला बड़ा वर्ल्ड कप इसलिए बनाया था ताकि भारत और चीन जैसे विशाल बाजारों में फुटबॉल की पहुंच और कमाई बढ़ सके। लेकिन अब वही बाजार फीफा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनते दिखाई दे रहे हैं।
बताया जा रहा है कि फीफा ने हालात संभालने के लिए चीन में उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजा है ताकि जल्द समझौता कराया जा सके। वहीं भारत में भी अगले दो हफ्तों के भीतर डील होने की उम्मीद जताई जा रही है।
अगर भारत और चीन जैसे देशों में अंतिम समय तक प्रसारण अधिकार नहीं बिकते, तो इसका असर FIFA की वैश्विक कमाई, विज्ञापन बाजार और भविष्य के मीडिया अधिकार मॉडल पर पड़ सकता है। खेल जगत के विशेषज्ञों का कहना है कि अगर फीफा को मजबूरी में भारी डिस्काउंट देने पड़े, तो भविष्य में दूसरे देशों के ब्रॉडकास्टर्स भी इसी तरह कम कीमत की मांग कर सकते हैं।
अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या FIFA आखिरी समय में भारत और चीन में अपने सबसे बड़े टीवी सौदे बचा पाएगा या World Cup 2026 से पहले ही उसे सबसे बड़ा व्यावसायिक झटका लगने वाला है।




