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ईरान बोला- “उंगली ट्रिगर पर है”, ट्रंप ने ठुकराया शांति प्रस्ताव; होर्मुज संकट से दुनिया में फिर से महायुद्ध का अंदेशा

अंतरराष्ट्रीय | एजेंसी / ABC NATIONAL NEWS | तेहरान | 13 मई 2026

अमेरिका-ईरान युद्ध को लेकर दुनिया एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए शांति प्रस्ताव को “पूरी तरह अस्वीकार्य” और “कचरा” बताते हुए खारिज कर दिया है। इसके बाद तेहरान ने भी बेहद आक्रामक लहजे में कहा है कि उसकी “उंगली ट्रिगर पर है”, लेकिन वह स्थायी शांति चाहता है। बयानबाजी के बीच खाड़ी क्षेत्र में तनाव और तेजी से बढ़ गया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर टकराव अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक संकट में बदलता जा रहा है। तेल सप्लाई, व्यापारिक जहाजों और ऊर्जा बाजारों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान की तरफ से भेजा गया नया प्रस्ताव “बेकार” है और मौजूदा युद्धविराम “लाइफ सपोर्ट पर” है। यानी कभी भी हालात पूरी तरह विस्फोटक हो सकते हैं। ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि ईरान लगातार समय खींचने की रणनीति अपना रहा है।

वहीं दूसरी ओर ईरान ने साफ संकेत दिया है कि अगर उस पर और दबाव डाला गया तो जवाब बेहद कठोर होगा। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रवक्ता पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि खाड़ी के समुद्री मार्गों पर किसी भी अमेरिकी कार्रवाई को सीधे जवाब मिलेगा।

सबसे बड़ा तनाव स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर है। यह वही समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई गुजरती है। ईरान पर आरोप है कि उसने इस क्षेत्र को “रणनीतिक हथियार” की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। कतर ने भी ईरान पर आरोप लगाया है कि वह खाड़ी देशों को “ब्लैकमेल” करने की कोशिश कर रहा है।

अमेरिकी सैन्य कमान CENTCOM ने दावा किया है कि उसने होर्मुज क्षेत्र में कई जहाजों को रोका है। अमेरिकी सेना के मुताबिक एक माल्टा-फ्लैग वाले तेल टैंकर को भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करने से रोका गया। अमेरिका ने कहा कि ईरानी बंदरगाहों पर लगाया गया उसका समुद्री प्रतिबंध अभी जारी रहेगा।

उधर कुवैत ने ईरान के राजदूत को तलब कर बड़ा विरोध दर्ज कराया है। कुवैत का आरोप है कि ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड यानी IRGC के कुछ सदस्य समुद्री रास्ते से घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे थे। कुवैत ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बताया है।

इस पूरे संकट के बीच पाकिस्तान और चीन भी सक्रिय हो गए हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने चीनी विदेश मंत्री वांग यी से बातचीत कर अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता प्रयासों पर चर्चा की। दोनों देशों ने होर्मुज में सामान्य समुद्री आवाजाही बहाल करने की जरूरत पर जोर दिया।

इधर इजरायल-लेबनान सीमा पर भी तनाव कम नहीं हुआ है। इजरायली सेना ने दावा किया है कि हिजबुल्लाह द्वारा भेजा गया एक ड्रोन इजरायल में विस्फोट हुआ, जबकि एक अन्य ड्रोन को मार गिराया गया। वहीं लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने आरोप लगाया है कि इजरायली हमलों में दो पैरामेडिक्स मारे गए हैं।

अमेरिका के भीतर भी इस युद्ध का असर अब खुलकर दिखाई देने लगा है। अप्रैल में अमेरिकी महंगाई दर बढ़कर 3.8 प्रतिशत पहुंच गई है, जिसका बड़ा कारण ईंधन कीमतों में उछाल बताया जा रहा है। व्हाइट हाउस के बाहर कई अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि ईरान युद्ध अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ बनता जा रहा है।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर लिंडा बिलम्स के मुताबिक यह युद्ध अमेरिका को प्रतिदिन करीब 2 अरब डॉलर का नुकसान पहुंचा रहा है। उनका अनुमान है कि कुल लागत एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। इसमें सैन्य खर्च, हथियार, तेल संकट, महंगाई और भविष्य में सैनिकों की देखभाल जैसे खर्च शामिल हैं।

युद्ध के कारण वैश्विक तेल बाजारों में भी हड़कंप मचा हुआ है। कई एशियाई और यूरोपीय देशों को ऊर्जा संकट और सप्लाई चेन बाधित होने का डर सताने लगा है। खासकर चीन, भारत और यूरोप जैसे बड़े आयातक देशों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

इस बीच दुनिया की निगाहें अब अमेरिका, ईरान और चीन के अगले कदम पर टिकी हैं। सवाल यही है कि क्या यह तनाव बातचीत के जरिए खत्म होगा या दुनिया एक और बड़े वैश्विक संघर्ष की ओर बढ़ रही है।

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