अंतरराष्ट्रीय | एजेंसी/ ABC NATIONAL NEWS | रियाद | 12 मई 2026
मध्य पूर्व में जारी युद्ध और तनाव के बीच सऊदी अरब के वरिष्ठ शाही सदस्य प्रिंस तुर्की अल-फैसल ने बड़ा और सनसनीखेज दावा किया है। उन्होंने कहा है कि इजराइल चाहता था कि सऊदी अरब ईरान के साथ सीधे युद्ध में उतर जाए, लेकिन रियाद ने उस “खतरनाक जाल” में फंसने से इनकार कर दिया। सऊदी खुफिया एजेंसी के पूर्व प्रमुख और शाही परिवार के प्रभावशाली सदस्य प्रिंस तुर्की अल-फैसल ने एक लेख में कहा कि अगर इजराइल की योजना सफल हो जाती, तो पूरा खाड़ी क्षेत्र “तबाही और विनाश” में डूब जाता।
उन्होंने लिखा,
“अगर इजराइल की ईरान के साथ युद्ध भड़काने की योजना सफल हो जाती, तो हमारा पूरा क्षेत्र बर्बाद हो जाता। हजारों सऊदी नागरिक ऐसी लड़ाई में मारे जाते, जिससे हमारा कोई लेना-देना नहीं था।”
प्रिंस तुर्की ने कहा कि सऊदी नेतृत्व, खासकर क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने युद्ध को रोकने और तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक रास्ता चुना। उन्होंने दावा किया कि जब ईरान और अन्य ताकतें सऊदी अरब को युद्ध में खींचने की कोशिश कर रही थीं, तब रियाद ने संयम बरता ताकि देश और नागरिकों को बचाया जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर सऊदी अरब चाहता तो ईरान के ठिकानों और हितों पर जवाबी हमला कर सकता था, लेकिन उससे हालात और भयानक हो जाते। उनके मुताबिक, सऊदी तेल संयंत्रों और समुद्री जल शोधन प्लांट्स को भारी नुकसान पहुंच सकता था।
प्रिंस तुर्की का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के बाद पूरा पश्चिम एशिया अस्थिरता की चपेट में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने जवाबी कार्रवाई में खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था, जिनमें सऊदी अरब भी शामिल था।
इस युद्ध का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ा है। ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर दबाव बढ़ाने और हमलों के कारण तेल सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। सऊदी अरब ने पिछले महीने स्वीकार किया था कि उसके ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन नेटवर्क पर हमलों के कारण प्रतिदिन लगभग 7 लाख बैरल तेल क्षमता प्रभावित हुई।
रिपोर्ट्स के अनुसार, जुबैल, रस तनुरा, यनबू और रियाद की रिफाइनरियों को भी निशाना बनाया गया, जिससे वैश्विक बाजार में तेल आपूर्ति को झटका लगा।
प्रिंस तुर्की ने यह भी कहा कि सऊदी अरब पाकिस्तान के साथ मिलकर क्षेत्र में और ज्यादा युद्ध और तनाव रोकने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने युद्ध समर्थक ताकतों पर हमला बोलते हुए कहा कि “जो लोग युद्ध चाहते थे, अब उनके पैरों तले जमीन खिसक चुकी है।”
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान केवल एक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि मध्य पूर्व की बदलती भू-राजनीति का संकेत है। सऊदी अरब अब खुद को सीधे सैन्य टकराव से बचाते हुए “संतुलित शक्ति” के रूप में पेश करना चाहता है।
इस बयान ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि क्या पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष केवल ईरान बनाम इजराइल नहीं, बल्कि बड़ी शक्तियों के प्रभाव और नियंत्रण की लड़ाई बन चुका है।




