अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन/रियाद/तेहरान | 8 मई 2026
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका की बड़ी सैन्य योजना “प्रोजेक्ट फ्रीडम” पर आखिरकार ब्रेक लग गया, और इसके पीछे सबसे बड़ी वजह बना अमेरिका का पुराना सहयोगी सऊदी अरब। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सऊदी अरब ने अमेरिकी विमानों को अपने एयरस्पेस और प्रमुख सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को अचानक यह ऑपरेशन रोकना पड़ा।
बताया जा रहा है कि अमेरिका ने 4 मई को होर्मुज स्ट्रेट में फंसे जहाजों की आवाजाही बहाल कराने और ईरानी दबाव को तोड़ने के लिए “प्रोजेक्ट फ्रीडम” शुरू किया था। इस मिशन के तहत अमेरिकी नौसेना और एयरफोर्स को खाड़ी क्षेत्र में बड़े स्तर पर तैनात किया गया था। लेकिन ट्रम्प द्वारा अचानक सोशल मीडिया पर ऑपरेशन की घोषणा करने से खाड़ी देशों में नाराजगी फैल गई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक सऊदी नेतृत्व को इस ऑपरेशन की पहले से पूरी जानकारी नहीं दी गई थी। रियाद को डर था कि यदि अमेरिकी सैन्य अभियान तेज हुआ तो ईरान खाड़ी देशों के तेल ठिकानों और सैन्य अड्डों को निशाना बना सकता है। इसी वजह से सऊदी अरब ने अमेरिका को प्रिंस सुल्तान एयरबेस समेत कई अहम सैन्य सुविधाओं और एयरस्पेस के इस्तेमाल पर रोक लगा दी।
अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि ट्रम्प ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बातचीत कर हालात संभालने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। नतीजा यह हुआ कि अमेरिका महज कुछ जहाजों को सुरक्षित निकाल पाया और फिर ऑपरेशन रोकना पड़ा।
इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि मध्य पूर्व में अब अमेरिका की रणनीति पहले जैसी आसान नहीं रह गई है। सऊदी अरब अब खुलकर ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहता जिससे वह सीधे ईरान के निशाने पर आ जाए। इससे पहले भी ईरान समर्थित हमलों में सऊदी तेल ठिकानों और अमेरिकी सैन्य अड्डों को नुकसान पहुंच चुका है।
इधर ईरान ने भी साफ संकेत दिया है कि वह दबाव में झुकने वाला नहीं है। तेहरान लगातार होर्मुज क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत कर रहा है। दूसरी ओर अमेरिका संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जहाजों की आवाजाही बहाल कराने के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने में लगा हुआ है।
हालांकि बाद में कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि सऊदी अरब और कुवैत ने अमेरिका के लिए एयरस्पेस और सैन्य ठिकानों पर लगी रोक में नरमी दिखाई है, जिससे भविष्य में “प्रोजेक्ट फ्रीडम” दोबारा शुरू हो सकता है।
लेकिन फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि होर्मुज संकट ने अमेरिका, सऊदी अरब और ईरान के रिश्तों में नई खाई पैदा कर दी है। दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या ट्रम्प दोबारा सैन्य दांव खेलेंगे या फिर कूटनीतिक रास्ता अपनाएंगे।




