राष्ट्रीय | महेंद्र सिंह | ABC NATIONAL NEWS | श्रीनगर | 1 मई 2026
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के नाम पर वोटों के साथ गड़बड़ी की जा रही है और इससे लोगों के वोट काटे जा रहे हैं। उनके इस बयान के बाद सियासी माहौल अचानक गरमा गया है और चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। उमर अब्दुल्ला ने साफ शब्दों में कहा कि वोटर लिस्ट की समीक्षा के नाम पर जो प्रक्रिया चल रही है, उसमें कई असली वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं रह गई है, बल्कि इससे सीधे-सीधे लोगों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि अगर किसी नागरिक का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया जाता है, तो उसका लोकतांत्रिक अधिकार ही खत्म हो जाता है, और यही सबसे बड़ी चिंता की बात है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि चुनाव लोकतंत्र की सबसे अहम प्रक्रिया है और इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर के जरिए जो बदलाव किए जा रहे हैं, उनमें पारदर्शिता की कमी दिख रही है और लोगों को सही तरीके से जानकारी भी नहीं दी जा रही। इससे आम मतदाताओं में भ्रम और नाराजगी दोनों बढ़ रहे हैं।
इस मुद्दे पर उन्होंने चुनाव आयोग से जवाब मांगा है और कहा है कि यह साफ किया जाना चाहिए कि आखिर किस आधार पर वोटर लिस्ट में बदलाव किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी का नाम हटाया जा रहा है, तो उसे पहले से जानकारी दी जानी चाहिए और उसे अपना पक्ष रखने का मौका मिलना चाहिए।
उमर अब्दुल्ला के इस बयान के बाद राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। कुछ दल उनके आरोपों का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक बयान बता रहे हैं। लेकिन इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसा कितना जरूरी है।
आम लोगों के लिए यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वोट उनका सबसे बड़ा अधिकार होता है। अगर किसी का नाम बिना जानकारी के वोटर लिस्ट से हट जाता है, तो वह चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकता। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि पूरी प्रक्रिया साफ और भरोसेमंद हो, ताकि हर नागरिक को अपने वोट का अधिकार मिल सके।




