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ट्रंप की सुरक्षा में ‘चीन कनेक्शन’ पर बवाल: एक फोटो से उठे बड़े सवाल

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अंतरराष्ट्रीय | एजेंसी / ABC NATIONAL NEWS | वाशिंगटन / बीजिंग 29 अप्रैल 2026

अमेरिका में एक तस्वीर ने अचानक बड़ी बहस छेड़ दी है। यह तस्वीर उस वक्त की है जब वॉशिंगटन में एक कार्यक्रम के दौरान गोली चलने की घटना हुई और सुरक्षा एजेंट तुरंत हरकत में आ गए। इसी दौरान एक महिला एजेंट की पिस्तौल की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। लेकिन चर्चा गोलीबारी से ज्यादा उस पिस्तौल पर लगे एक छोटे से उपकरण को लेकर शुरू हो गई—जिसे लोग चीनी कंपनी का बना बता रहे हैं। बस यहीं से सवाल उठने लगे कि क्या अमेरिका के राष्ट्रपति की सुरक्षा में भी चीन से जुड़ी तकनीक इस्तेमाल हो रही है?

यह घटना व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर के दौरान हुई, जहां अचानक एक हमलावर ने सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की। मौके पर मौजूद सुरक्षा एजेंट्स ने तुरंत कार्रवाई की और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सुरक्षित बाहर ले जाया गया। इस दौरान एक एजेंट की पिस्तौल साफ दिखाई दी, जिस पर एक “रेड डॉट साइट” लगा हुआ था। यह एक ऐसा उपकरण होता है जो निशाना लगाने में मदद करता है। बाद में सोशल मीडिया और हथियारों से जुड़े फोरम पर लोगों ने दावा किया कि यह डिवाइस चीनी कंपनी “होलोसन” का हो सकता है।

इसके बाद अमेरिका में बहस शुरू हो गई। कुछ लोगों का कहना है कि इसमें कोई बड़ी बात नहीं है, क्योंकि यह उपकरण सस्ता और अच्छी तकनीक वाला होता है। वहीं कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि जब बात राष्ट्रपति की सुरक्षा की हो, तो क्या विदेशी—खासकर चीनी—तकनीक का इस्तेमाल सही है? उनका कहना है कि पहले भी चीनी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में जासूसी के आरोप लग चुके हैं, ऐसे में यह चिंता की बात हो सकती है।

दिलचस्प बात यह है कि होलोसन कंपनी के प्रोडक्ट्स अमेरिका में काफी लोकप्रिय हैं। ये सोलर पावर, मोशन सेंसर और अलग-अलग निशाने के विकल्प जैसे फीचर्स देते हैं, और कीमत भी दूसरी कंपनियों से कम होती है। यही वजह है कि कई लोग इन्हें इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। लेकिन जब बात सरकारी सुरक्षा एजेंसियों की आती है, तो लोग ज्यादा सावधानी की उम्मीद करते हैं।

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि आज के समय में पूरी तरह “स्थानीय” यानी सिर्फ एक देश में बने उपकरण इस्तेमाल करना आसान नहीं है। एक छोटे से डिवाइस में भी कई देशों के पार्ट्स लगे होते हैं। ऐसे में सप्लाई चेन इतनी जुड़ी हुई है कि यह बताना मुश्किल हो जाता है कि कौन-सा हिस्सा कहां बना है। यही कारण है कि कई बार अमेरिकी सिस्टम में भी विदेशी तकनीक शामिल हो जाती है।

इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या दुनिया की सबसे ताकतवर सुरक्षा एजेंसी भी पूरी तरह अपने देश की तकनीक पर निर्भर नहीं रह पा रही? या फिर यह सिर्फ एक सामान्य तकनीकी मामला है जिसे ज्यादा तूल दिया जा रहा है?

आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि उस एजेंट की पिस्तौल पर लगा उपकरण सच में उसी चीनी कंपनी का था या नहीं। लेकिन एक तस्वीर ने जिस तरह से बहस छेड़ी है, उसने यह जरूर दिखा दिया कि आज के दौर में तकनीक और सुरक्षा के मुद्दे कितने संवेदनशील हो चुके हैं। यह मामला सिर्फ एक फोटो का नहीं है, बल्कि भरोसे, सुरक्षा और वैश्विक तकनीकी निर्भरता का है—जहां हर छोटी चीज भी बड़े सवाल खड़े कर सकती है।

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