बिजनेस | महेंद्र सिंह | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 29 अप्रैल 2026
8वें वेतन आयोग को लेकर लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए एक अहम खबर सामने आई है। सरकार ने मेमोरेंडम (सुझाव और मांगों का दस्तावेज) जमा करने की आखिरी तारीख बढ़ा दी है। पहले यह डेडलाइन 30 अप्रैल 2026 थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 31 मई 2026 कर दिया गया है। यानी जिन कर्मचारी संगठनों या पेंशनर समूहों ने अभी तक अपनी मांगें नहीं भेजी थीं, उन्हें अब एक महीने का अतिरिक्त समय मिल गया है। कई कर्मचारी संगठनों ने शिकायत की थी कि वे तय समय के भीतर अपना मेमोरेंडम जमा नहीं कर पा रहे हैं। इसी को देखते हुए नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने वेतन आयोग से समय बढ़ाने की मांग की थी। इस मांग को स्वीकार करते हुए आयोग ने डेडलाइन आगे बढ़ाने का फैसला लिया। इससे उन संगठनों को राहत मिली है, जो अपनी सिफारिशों को तैयार करने में लगे हुए थे।
हालांकि, एक अहम बात यह भी साफ कर दी गई है कि मेमोरेंडम सिर्फ तय ऑनलाइन लिंक के जरिए ही जमा किया जाएगा। आयोग ने साफ शब्दों में कहा है कि ईमेल, पीडीएफ या कागजी (हार्ड कॉपी) के रूप में भेजे गए दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएंगे। यानी जो भी सुझाव देने हैं, वे निर्धारित फॉर्मेट और पोर्टल के जरिए ही भेजने होंगे। इससे प्रक्रिया को एकरूप और व्यवस्थित बनाने की कोशिश की जा रही है।
अब सवाल उठता है कि यह मेमोरेंडम आखिर होता क्या है। आसान शब्दों में समझें तो यह एक ऐसा दस्तावेज होता है, जिसमें कर्मचारी और पेंशनर अपनी मांगें और उम्मीदें लिखते हैं—जैसे सैलरी कितनी बढ़नी चाहिए, पेंशन में क्या बदलाव हों, भत्तों में कितना इजाफा हो, फिटमेंट फैक्टर कितना होना चाहिए आदि। यही दस्तावेज आगे चलकर वेतन आयोग की सिफारिशों की आधारशिला बनता है।
कई कर्मचारी संगठनों ने अपने मेमोरेंडम में 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है और बेसिक सैलरी कम से कम 69,000 रुपये करने की बात कही है। अगर ऐसा होता है, तो कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। हालांकि अंतिम फैसला वेतन आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी पर ही निर्भर करेगा।
इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ है कि 8वें वेतन आयोग को लेकर तैयारी तेजी से चल रही है और कर्मचारी संगठनों की सक्रियता भी बढ़ गई है। डेडलाइन बढ़ने से अब और ज्यादा सुझाव सामने आएंगे, जिससे आयोग को एक व्यापक तस्वीर मिलेगी। यह फैसला कर्मचारियों के लिए राहत भरा है, क्योंकि अब उनके पास अपनी बात रखने का पूरा मौका है। आने वाले समय में इन मांगों पर क्या फैसला होता है, इस पर ही देश के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर टिकी हुई है।




