राष्ट्रीय | महेंद्र सिंह | ABC NATIONAL NEWS | 28 अप्रैल 2026
दिल्ली हाई कोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम से जुड़े बहुचर्चित रिश्वत मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। यह मामला शराब कंपनी Diageo Scotland से जुड़े कथित भ्रष्टाचार आरोपों से संबंधित है, जिसमें केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने केस दर्ज किया था। मंगलवार को जब यह मामला सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हुआ, तो जस्टिस शर्मा ने स्पष्ट कहा कि यह याचिका अब किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई में किसी दूसरी बेंच द्वारा की जा सकती है।
कार्ति चिदंबरम ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर CBI द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार के मामले को रद्द करने की मांग की थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस मामले में विदेशी शराब कंपनी से कथित तौर पर लाभ पहुंचाने के बदले रिश्वत ली गई। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम फैसला अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।
इस घटनाक्रम को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में इसी न्यायाधीश के समक्ष दिल्ली की चर्चित आबकारी नीति (Excise Policy) मामले में सुनवाई को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आया था। अरविंद केजरीवाल ने अदालत की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कार्यवाही में शामिल होने से इनकार तक कर दिया था, जिससे न्यायपालिका और राजनीति के बीच तनाव की स्थिति बन गई थी।
गौरतलब है कि आबकारी नीति मामला 2022 से देश की प्रमुख राजनीतिक और कानूनी बहसों में शामिल रहा है, जिसमें भ्रष्टाचार और नीति निर्माण को लेकर गंभीर आरोप-प्रत्यारोप लगे हैं।
अब कार्ति चिदंबरम से जुड़े इस केस में जस्टिस शर्मा के अलग होने के बाद यह देखना अहम होगा कि नई बेंच इस मामले में क्या रुख अपनाती है और जांच एजेंसियों के आरोपों पर न्यायालय क्या निर्णय देता है।




