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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कोयला फैसले पर प्रियंका भारती ने कहा—पाषाण युग की ओर धकेल रही बीजेपी सरकार

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राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | पटना | 23 अप्रैल 2026

बिहार में रसोई गैस और ऊर्जा को लेकर लिए गए एक फैसले ने सियासत को गरमा दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ओर से बीपीएल कार्ड धारकों को कोयला उपलब्ध कराने की घोषणा के बाद विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। राष्ट्रीय जनता दल की प्रवक्ता प्रियंका भारती ने इस फैसले को “पिछड़े दौर की ओर लौटना” बताते हुए कहा कि इससे गरीबों को राहत नहीं, बल्कि मुश्किलें बढ़ेंगी।प्रियंका भारती ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें पहले यह खबर झूठी लगी, लेकिन जांच करने पर यह सही निकली। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देश को “उल्टी दिशा” में ले जाया जा रहा है, जहां गैस की जगह फिर से कोयले का इस्तेमाल करना पड़ेगा। उनका कहना था कि अगर यही स्थिति रही, तो अगला कदम “पत्थर रगड़कर आग जलाने” जैसा होगा। यह बयान तेजी से वायरल हुआ और राजनीतिक गलियारों में बहस का विषय बन गया।

दरअसल, राज्य सरकार का तर्क है कि जिन गरीब परिवारों के पास गैस सिलेंडर की नियमित व्यवस्था नहीं है या जो महंगे दाम के कारण गैस नहीं भरवा पा रहे, उनके लिए कोयला एक वैकल्पिक राहत के रूप में दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह फैसला जरूरतमंदों को ध्यान में रखकर लिया गया है, ताकि उन्हें खाना पकाने में किसी तरह की परेशानी न हो।

लेकिन विपक्ष इस तर्क से सहमत नहीं दिख रहा। आरजेडी का कहना है कि सरकार को गैस की कीमतें कम कराने और बेहतर सब्सिडी देने की दिशा में काम करना चाहिए था, न कि पुराने ईंधन की ओर लौटने का रास्ता दिखाना चाहिए। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि यह फैसला विकास के दावों के विपरीत है और इससे यह संदेश जाता है कि सरकार आधुनिक सुविधाएं देने में असफल हो रही है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा हुआ है। खासकर गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवार, जिनके लिए रसोई का खर्च पहले ही एक बड़ी चिंता बना हुआ है, इस फैसले से सीधे प्रभावित होंगे।

बिहार सरकार अपने फैसले पर कायम है और इसे राहतकारी कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे “पीछे की ओर कदम” करार दे रहा है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा किस दिशा में जाता है और जनता इसे किस नजर से देखती है।

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