अंतरराष्ट्रीय/टूरिज्म | ABC NATIONAL NEWS | काठमांडू | 21 अप्रैल 2026
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब नेपाल जैसे शांत और पर्यटन पर निर्भर देश तक साफ दिखने लगा है। बीते कुछ हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय हालात बिगड़ने के बाद नेपाल के पर्यटन उद्योग को बड़ा झटका लगा है। होटल बुकिंग, ट्रैवल पैकेज और एडवेंचर टूर की मांग अचानक कम हो गई है, जिससे पूरे सेक्टर में चिंता का माहौल है। नेपाल, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, हिमालय की वादियों और धार्मिक स्थलों के लिए दुनियाभर में मशहूर है, हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता रहा है। लेकिन इस बार हालात अलग हैं। ट्रैवल एजेंसियों का कहना है कि अप्रैल और मई जैसे पीक सीजन में जहां पहले बुकिंग फुल रहती थी, अब वहां 30 से 40 प्रतिशत तक गिरावट देखी जा रही है।
काठमांडू और पोखरा के होटल मालिकों के अनुसार, सबसे ज्यादा असर यूरोप और पश्चिम एशिया से आने वाले पर्यटकों पर पड़ा है। कई लोगों ने अपनी यात्रा या तो रद्द कर दी है या आगे के लिए टाल दी है। वजह साफ है—वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और सुरक्षा को लेकर चिंता।
ट्रैवल एजेंसी चलाने वाले राजेश थापा बताते हैं कि “फोन लगातार बज रहे हैं, लेकिन बुकिंग के लिए नहीं, बल्कि कैंसिलेशन के लिए। लोग पूछ रहे हैं कि क्या अभी यात्रा करना सुरक्षित है या नहीं।” उनका कहना है कि यह स्थिति पिछले कुछ सालों में पहली बार इतनी गंभीर नजर आ रही है।
एयरलाइंस सेक्टर भी इससे अछूता नहीं है। कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में सीटें खाली जा रही हैं, जिससे कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। कुछ एयरलाइंस ने तो अपनी फ्लाइट्स की संख्या भी कम करने पर विचार शुरू कर दिया है।
नेपाल सरकार और पर्यटन विभाग इस संकट से निपटने के लिए कोशिशें कर रहे हैं। पर्यटन मंत्रालय का कहना है कि देश पूरी तरह सुरक्षित है और यहां आने वाले पर्यटकों के लिए कोई खतरा नहीं है। साथ ही, वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेपाल को एक सुरक्षित और शांतिपूर्ण गंतव्य के रूप में पेश करने के लिए नए अभियान शुरू करने की योजना बना रहे हैं।
हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ प्रचार से काम नहीं चलेगा। जब तक वैश्विक स्तर पर स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक पर्यटन उद्योग पर दबाव बना रहेगा। नेपाल की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा पर्यटन पर निर्भर है, ऐसे में यह गिरावट लंबे समय तक रही तो इसका असर रोजगार और स्थानीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।
पोखरा में पैराग्लाइडिंग का काम करने वाले एक स्थानीय युवक ने कहा, “हमारा पूरा सीजन इसी समय चलता है। अगर पर्यटक नहीं आएंगे, तो हमारे घर का खर्च चलाना मुश्किल हो जाएगा।” यह बयान बताता है कि यह संकट सिर्फ बड़े होटल या कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि आम आदमी की रोजी-रोटी पर भी सीधा असर डाल रहा है।पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने हजारों किलोमीटर दूर नेपाल के पर्यटन उद्योग को हिला कर रख दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि अंतरराष्ट्रीय हालात कब सामान्य होते हैं और क्या नेपाल एक बार फिर अपने पुराने रंग में लौट पाएगा।




