अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | पेरिस/लंदन | 18 अप्रैल 2026
दुनिया भर में हवाई यात्रा पर बड़ा संकट मंडराता दिख रहा है, क्योंकि एविएशन फ्यूल (जेट ईंधन) की बढ़ती कमी अब सीधे तौर पर उड़ानों को प्रभावित करने लगी है। एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और तेल सप्लाई चेन में आई बाधाओं के कारण आने वाले एक से दो महीनों के भीतर बड़े पैमाने पर फ्लाइट्स ग्राउंड की जा सकती हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो मई और जून से ही उड़ानों में भारी कटौती देखने को मिल सकती है, जिससे वैश्विक यात्रा व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो सकती है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट धीरे-धीरे “सिस्टमिक” रूप ले सकता है, यानी इसका असर सिर्फ कुछ देशों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरी दुनिया की एविएशन इंडस्ट्री को अपनी चपेट में ले सकता है। एशिया के देशों पर इसका असर सबसे पहले पड़ने की आशंका जताई गई है, क्योंकि वे खाड़ी क्षेत्र से आने वाले ईंधन पर काफी निर्भर हैं। इसके बाद यूरोप भी इस संकट की चपेट में आ सकता है, जहां पहले से ही ईंधन आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ रही है।
असल में यह पूरा संकट मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग में बाधाओं के कारण पैदा हुआ है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से के लिए तेल की आपूर्ति होती है। इस रूट में रुकावट आने से न केवल कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है, बल्कि जेट फ्यूल की उपलब्धता भी प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर एयरलाइंस के संचालन पर पड़ रहा है, जो अब लागत बढ़ने और सप्लाई कम होने के दोहरे दबाव में हैं।
हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि कई एयरलाइंस पहले ही उड़ानों में कटौती या रद्द करने का फैसला ले चुकी हैं। वैश्विक रिपोर्ट्स के अनुसार, जेट फ्यूल की कीमतों में तेज उछाल और कमी के चलते कई कंपनियां अपने रूट कम कर रही हैं, किराए बढ़ा रही हैं और कुछ मामलों में पूरी सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर रही हैं। यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में यात्रियों को टिकट महंगे मिलने के साथ-साथ यात्रा योजनाओं में भारी बाधा का सामना करना पड़ सकता है।
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) और एविएशन सेक्टर से जुड़े संगठनों ने भी चेतावनी दी है कि यदि सप्लाई जल्द बहाल नहीं हुई, तो यूरोप जैसे क्षेत्रों में जेट फ्यूल का स्टॉक कुछ ही हफ्तों में खत्म हो सकता है। इससे समर ट्रैवल सीजन के दौरान भारी संख्या में फ्लाइट्स कैंसल होने का खतरा पैदा हो गया है।
एविएशन फ्यूल की यह कमी अब सिर्फ एक आर्थिक या ऊर्जा संकट नहीं रह गई है, बल्कि यह वैश्विक परिवहन और पर्यटन उद्योग के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। आने वाले हफ्तों में हालात किस दिशा में जाते हैं, यह काफी हद तक मिडिल ईस्ट के भू-राजनीतिक हालात और तेल आपूर्ति के सामान्य होने पर निर्भर करेगा, लेकिन फिलहाल संकेत यही हैं कि दुनिया एक बड़े “फ्लाइट कैओस” की ओर बढ़ रही है।




