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परिसीमन बिल पर घमासान: अखिलेश यादव बोले- बीजेपी नारी को ‘नारा’ बना रही, जनगणना टालकर PDA का हक मारना चाहती है

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राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 16 अप्रैल 2026

संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र के पहले दिन विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच जोरदार टकराव देखने को मिला। लोकसभा और राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक तथा परिसीमन बिल पेश किए जाने के साथ ही सदन में हंगामा छा गया। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर आरोप लगाया कि बीजेपी महिलाओं को सिर्फ नारा बनाने की कोशिश कर रही है, जबकि असल मुद्दों से भाग रही है। उन्होंने साफ कहा कि बिना नई जनगणना के परिसीमन करना साफ तौर पर उत्तर भारत को फायदा पहुंचाने और दक्षिण के राज्यों के साथ अन्याय करने की साजिश है।

अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी नारी शक्ति का ढोंग रच रही है। जब बात आती है असली सशक्तिकरण की तो ये लोग जनगणना तक टाल रहे हैं। हम महिला आरक्षण के सिद्धांत का समर्थन करते हैं लेकिन इसे पुरानी जनगणना और परिसीमन से जोड़कर पिछड़ी जातियों, दलितों और वंचित महिलाओं के हक पर डाका डाला जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार जातिगत जनगणना नहीं कराती तो विपक्ष इसे कभी स्वीकार नहीं करेगा। अखिलेश ने यह भी कहा कि बीजेपी जानबूझकर 2011 की जनगणना के आधार पर नए परिसीमन की तैयारी कर रही है ताकि लोकसभा सीटों का गणित उसके पक्ष में रहे और दक्षिण भारत के राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो जाए।

सरकार की ओर से गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि महिला आरक्षण महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम है और इसे जल्द से जल्द लागू करने की दिशा में काम चल रहा है। उन्होंने परिसीमन बिल को देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने वाला बताया। लेकिन विपक्षी दलों ने इसे सिरे से खारिज करते हुए आरोप लगाया कि बिना नई जनगणना और ओबीसी महिलाओं के लिए अलग सब-कोटा के प्रावधान के ये बिल अधर में लटके रहेंगे। पूरे विपक्ष ने एकजुट होकर सरकार पर हमला बोला और कहा कि यह बिल उत्तर-दक्षिण विभाजन को बढ़ावा देने वाला है।

संसद के इस विशेष सत्र में महिला आरक्षण विधेयक के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव है, लेकिन इसे लागू करने की समयसीमा जनगणना और परिसीमन के बाद तय की जाएगी। वहीं परिसीमन बिल के जरिए लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 800 से ज्यादा करने और पूरे देश में नए सिरे से निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं तय करने की तैयारी है। विपक्ष का कहना है कि इससे उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान जैसे राज्यों को भारी फायदा होगा जबकि तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश जैसे दक्षिणी राज्यों का राजनीतिक वजन घट जाएगा।

सत्र के पहले दिन ही सदन में तीखी बहस हुई और विपक्षी सांसदों ने लगातार नारेबाजी की। अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने सरकार से मांग की कि सबसे पहले देशभर में जातिगत जनगणना कराई जाए, उसके बाद ही परिसीमन और आरक्षण लागू करने पर विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण तभी सार्थक होगा जब हर वर्ग की महिलाओं को इसका लाभ मिले, न कि सिर्फ ऊपरी वर्ग तक सीमित रहे। पूरा विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट नजर आ रहा है और कल तथा परसों भी इस पर जोरदार बहस होने की संभावना है।

देशभर में इस मुद्दे को लेकर सियासी गर्मी बढ़ गई है। विभिन्न संगठनों, किसान यूनियनों और महिला संगठनों ने भी बयान जारी कर अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। अब देखना यह होगा कि तीन दिवसीय सत्र में सरकार विपक्ष को मनाने में कितना सफल होती है या फिर यह बिल भी विवादों के घेरे में फंसकर रह जाता है।

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