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परिसीमन बिल पर दक्षिण-उत्तर विवाद: स्टालिन ने जलाया काला कानून, बोले- तमिल लोग अपनी जमीन पर शरणार्थी बन जाएंगे

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नामक्कल/चेन्नई | 16 अप्रैल 2026

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन बिल की प्रति जलाते हुए इसे “काला कानून” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बिल तमिल लोगों को उनकी अपनी भूमि पर शरणार्थी बना देगा। संसद के विशेष सत्र से ठीक पहले नामक्कल में चुनावी कार्यक्रम के दौरान स्टालिन ने काला झंडा फहराया, बिल जलाया और जोरदार नारेबाजी की। इस घटना ने पूरे देश में उत्तर-दक्षिण राजनीतिक तनाव को और भड़का दिया है। प्रस्तावित सीट बढ़ोतरी में उत्तर प्रदेश की लोकसभा सीटें 80 से बढ़कर 140 हो जाएंगी, जबकि तमिलनाडु की 39 से बढ़कर 50 ही होंगी। इसी तरह अन्य दक्षिणी राज्यों में भी आनुपातिक बढ़ोतरी कम होने की आशंका है। परिसीमन की इस नई कवायद से लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़कर 850 के आसपास हो सकती हैं। दक्षिण के नेता इसे जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों के साथ ऐतिहासिक अन्याय मान रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि जो राज्य परिवार नियोजन में सफल रहे, उन्हें अब राजनीतिक सजा दी जा रही है।

स्टालिन ने कहा कि 1960 के दशक में हिंदी विरोधी आंदोलन की आग हमने बुझाई नहीं थी, दिल्ली झुक गई थी। आज फिर मैंने उस आग को भड़का दिया है। यह काला कानून तमिलों को अपनी ही भूमि पर शरणार्थी बनाने की साजिश है। यह आग पूरे द्रविड़ भूमि में फैलेगी और भाजपा की घमंड को कुचल देगी। मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों से अपील की थी कि 16 अप्रैल को हर घर, दुकान और सार्वजनिक स्थानों पर काला झंडा फहराया जाए। डीएमके अध्यक्ष के रूप में स्टालिन इस मुद्दे पर लगातार केंद्र सरकार पर हमला बोल रहे हैं।

दक्षिणी राज्यों में गहरी नाराजगी का कारण यह है कि 1971 की जनगणना के आधार पर सीटें फ्रीज करने के बाद अब 2011 की जनगणना या नई जनगणना के आधार पर परिसीमन होने से उत्तर और बिहार जैसे राज्यों को ज्यादा फायदा होगा। तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्य जो जनसंख्या वृद्धि पर काबू पाने में सफल रहे, उनकी संसद में आवाज कमजोर पड़ सकती है। स्टालिन इसे न सिर्फ तमिल पहचान बल्कि पूरे संघीय ढांचे पर हमला मानते हैं।

इस बीच संसद में बिल पेश होने की तैयारी है। केंद्र सरकार का कहना है कि सभी राज्यों की सीटें बढ़ेंगी और किसी की वर्तमान अनुपातिक ताकत नहीं घटेगी, लेकिन दक्षिणी दलों को इस आश्वासन पर भरोसा नहीं है। स्टालिन के नेतृत्व में डीएमके ने राज्यव्यापी विरोध का आह्वान किया है। नामक्कल में बिल जलाने के बाद “तमिलनाडु लड़ेगा, हम जीतेंगे” के नारे लगे।

विपक्षी दलों का आरोप है कि भाजपा उत्तरी राज्यों में अपना वोट बैंक मजबूत करने के लिए इस परिसीमन का इस्तेमाल कर रही है। वहीं, दक्षिण के नेता इसे “उत्तर बनाम दक्षिण” का नया रूप बता रहे हैं। इस विवाद ने देश की राजनीति का तापमान काफी बढ़ा दिया है और आने वाले दिनों में संसद के अंदर-बाहर तीखी बहस होने की संभावना है।

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