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गौरव आर्या अकेले नहीं, नफरत का जहर समाज में फैल चुका है

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राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 16 अप्रैल 2026

रिटायर्ड मेजर गौरव आर्या हो या कोई रिटायर्ड आर्मी अधिकारी, टीवी एंकर, पत्रकार या आम भक्त, सबकी सोच एक सी हो गई है। ईरान पर बम गिराओ, गाजा को तबाह कर दो—यह उनका एकमात्र नारा बन गया है। अगर आप इनकी इस हिंसा भरी बात का विरोध करते हैं तो तुरंत पलटकर पूछा जाता है—बांग्लादेश और पाकिस्तान पर क्यों नहीं बोलते? जैसे सारी दुनिया की समस्याओं का हल सिर्फ मुसलमानों को निशाना बनाकर ही निकल सकता है। यह कोई सोच की समस्या नहीं, संस्कार की गहरी बीमारी है।

हिंदुस्तान इतना क्रूर, इतना बेरहम पहले कभी नहीं था। एक बच्चा हो, स्त्री हो या कोई भी निर्दोष, अगर वह मुसलमान है या उनके साथ हो रही बेइंसाफी पर आवाज उठा रहा है, तो उसे भी नफरत का शिकार बनाया जा रहा है। जहां पहले संवेदना और इंसानियत की बात होती थी, वहां आज खुले आम मौत की कामना की जा रही है। सोशल मीडिया से लेकर टीवी डिबेट तक, नफरत अब रोजमर्रा की भाषा बन चुकी है। लोग इसे राष्ट्रवाद का नाम दे रहे हैं, लेकिन असल में यह सिर्फ जहर है जो धीरे-धीरे पूरे समाज को खोखला कर रहा है।

एक पुराना वीडियो आजकल वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यापारी अपनी दुकान के बुलडोजर से ढहाए जाने पर छाती पीट-पीटकर रो रहा है। लेकिन कुछ साल पहले जब दूसरे लोगों की दुकानों और घरों पर बुलडोजर चल रहे थे, उसी व्यापारी ने ठहाके लगाते हुए ताली बजाई थी। आज जब उसकी बारी आई तो वही इंसान रो रहा है। यह विडंबना नहीं, बल्कि नफरत के चक्र का नतीजा है। जिस नफरत को आप दूसरों के लिए बोते हैं, वही कल आपको घेर लेती है।

सच तो यह है कि हम कम इंसान रह गए हैं। नफरत फैलाने वाले डरते हैं कि अगर कल नफरत हार गई तो उनका क्या होगा? इसलिए वे और ज्यादा नफरत फैलाते चले जाते हैं। भाजपा ने जो नफरत का बीज बोया था, वह अब विशाल पेड़ बन चुका है। गौरव आर्या जैसे लोग उसी पेड़ पर लगे फल हैं—जो जहर उगल रहे हैं और समाज को बांट रहे हैं।

जब तक हम इस नफरत के चक्र को तोड़ने की हिम्मत नहीं दिखाएंगे, तब तक न तो देश आगे बढ़ेगा और न ही इंसानियत बचेगी। आज जो हंसी-ठहाके के साथ दूसरों की तबाही का जश्न मना रहे हैं, कल वही छाती पीटते नजर आएंगे। इतिहास गवाह है—नफरत कभी किसी का भला नहीं करती, सिर्फ सबको बर्बाद करती है।

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