राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 14 अप्रैल 2026
सिब्बल का सीधा हमला: ‘परिसीमन के नाम पर सत्ता का खेल’
राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने केंद्र सरकार और बीजेपी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि आगामी परिसीमन प्रक्रिया को लोकतांत्रिक संतुलन के बजाय राजनीतिक लाभ के औजार में बदला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल सीटों का पुनर्वितरण नहीं, बल्कि देश की सत्ता संरचना को दीर्घकालिक रूप से प्रभावित करने की रणनीति है। सिब्बल के मुताबिक, जिन राज्यों में बीजेपी की पकड़ मजबूत है, वहां सीटें बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है, जबकि दक्षिण भारत के राज्यों को सीमित रखने की कोशिश हो रही है।
आंकड़ों की जंग: उत्तर प्रदेश बनाम तमिलनाडु
सिब्बल ने जो आंकड़े पेश किए, उन्होंने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों को बढ़ाकर 120 तक किया जा सकता है, जबकि तमिलनाडु की 39 सीटों को बढ़ाकर केवल 59 तक सीमित रखा जाएगा। इससे दोनों राज्यों के बीच सीटों का अंतर 41 से बढ़कर 61 तक पहुंच सकता है। सिब्बल का कहना है कि यह अंतर केवल जनसंख्या के आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक गणित को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।
दक्षिण का असंतोष: ‘जनसंख्या नियंत्रण की सजा’ का आरोप
सिब्बल ने दक्षिण भारत के राज्यों—केरल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना—की चिंता जताते हुए कहा कि इन राज्यों ने वर्षों तक जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, लेकिन परिसीमन के बाद उन्हें इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। उनका तर्क है कि यदि केवल जनसंख्या को आधार बनाया गया, तो विकास और संतुलन की नीति अपनाने वाले राज्यों की राजनीतिक ताकत कमजोर हो जाएगी। उन्होंने इसे संघीय ढांचे के लिए खतरा बताया।
महिला आरक्षण और परिसीमन: जुड़ते सियासी समीकरण
यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में महिला आरक्षण कानून और 2026 के बाद होने वाले परिसीमन को लेकर बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार इन दोनों प्रक्रियाओं को जोड़कर राजनीतिक लाभ हासिल करना चाहती है। सिब्बल ने साफ तौर पर कहा कि यह पूरी रणनीति 2029 के लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है, जिससे सत्ता में बैठे दल को दीर्घकालिक बढ़त मिल सके।
राजनीतिक असर: उत्तर-दक्षिण खाई और गहरी होने का खतरा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सिब्बल के बताए गए आंकड़े सही साबित होते हैं, तो इससे उत्तर और दक्षिण भारत के बीच राजनीतिक असंतुलन और बढ़ सकता है। वर्तमान में लोकसभा की 543 सीटें हैं, जो परिसीमन के बाद 700 से अधिक हो सकती हैं। ऐसे में उत्तरी राज्यों को मिलने वाली अतिरिक्त सीटें बीजेपी के लिए रणनीतिक बढ़त बन सकती हैं, जबकि दक्षिणी राज्यों में असंतोष और क्षेत्रीय राजनीति को नया बल मिल सकता है।
सरकार का रुख: ‘सभी राज्यों को मिलेगा लाभ’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही यह कह चुके हैं कि परिसीमन के तहत किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं होंगी, बल्कि कुल सीटों की संख्या बढ़ाई जाएगी ताकि हर राज्य को फायदा मिल सके। हालांकि, सिब्बल के आरोप इस दावे को चुनौती देते नजर आ रहे हैं। फिलहाल बीजेपी की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
परिसीमन बना सियासत का नया रणक्षेत्र
परिसीमन की प्रक्रिया अब केवल प्रशासनिक या संवैधानिक विषय नहीं रही, बल्कि यह भारत की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। यह बहस अब इस सवाल पर आकर टिक गई है कि क्या लोकतंत्र में प्रतिनिधित्व का आधार केवल जनसंख्या होगा या विकास और संतुलन को भी महत्व दिया जाएगा। कपिल सिब्बल का यह हमला आने वाले दिनों में सियासी तापमान को और बढ़ाने वाला है और यह तय करेगा कि परिसीमन देश को जोड़ने का माध्यम बनेगा या नए विभाजन की शुरुआत।




