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बिहार: बीच बाजार सिर कलम कर घूमा कातिल, फिर बदले में दूसरी हत्या

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क्राइम रिपोर्ट | ABC NATIONAL NEWS | अररिया / फारबिसगंज | 9 अप्रैल 2026

बिहार के अररिया जिले के फारबिसगंज में हुई एक भयावह और दिल दहला देने वाली वारदात ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दिनदहाड़े भीड़भाड़ वाले बाजार में एक शख्स ने दूसरे व्यक्ति पर धारदार हथियार से हमला कर उसका गला काट दिया। घटना की क्रूरता यहीं नहीं रुकी—बताया जा रहा है कि आरोपी मृतक का कटा हुआ सिर हाथ में लेकर बाजार में घूमता रहा। इस दौरान सैकड़ों लोग मौजूद थे, लेकिन खौफ का आलम ऐसा था कि कोई भी आगे बढ़कर उसे रोकने की हिम्मत नहीं कर पाया। देखते ही देखते पूरा बाजार अफरा-तफरी और चीख-पुकार से भर गया।

इस सनसनीखेज हत्या के बाद इलाके में गुस्सा और तनाव तेजी से फैल गया। मृतक के परिजन और स्थानीय लोग उग्र हो गए और आरोपी की तलाश में निकल पड़े। कुछ ही देर में आरोपी को पकड़ लिया गया, जिसके बाद भीड़ ने कानून अपने हाथ में लेते हुए उसकी बेरहमी से पिटाई कर दी, जिससे उसकी भी मौत हो गई। इस तरह एक ही घटना ने दो हत्याओं का रूप ले लिया और पूरे क्षेत्र में हालात बेकाबू हो गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पुलिस सक्रिय होती, तो दूसरी हत्या को रोका जा सकता था।

घटनास्थल पर मौजूद चश्मदीदों के अनुसार, पुलिस की प्रतिक्रिया बेहद धीमी रही। जब तक पुलिस मौके पर पहुंची, तब तक दोनों हत्याएं हो चुकी थीं और हालात बिगड़ चुके थे। कुछ लोगों का यह भी आरोप है कि पुलिस स्थिति को संभालने के बजाय खुद को सुरक्षित करने में लगी रही। इस दौरान बाजार पूरी तरह बंद हो गया और आसपास के इलाकों में सन्नाटा और भय का माहौल छा गया। व्यापारियों और आम नागरिकों में असुरक्षा की भावना गहराती नजर आई।

इस घटना ने एक बार फिर बिहार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि राज्य में अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और अपराधियों के मन से कानून का डर खत्म होता जा रहा है। हत्या, लूट और अन्य आपराधिक घटनाएं अब आम होती जा रही हैं, जिससे आम आदमी खुद को असहाय और असुरक्षित महसूस कर रहा है। विपक्ष ने भी इस घटना को लेकर सरकार पर निशाना साधा है और कानून-व्यवस्था को लेकर कड़े सवाल उठाए हैं।

फारबिसगंज की यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि उस सामाजिक और प्रशासनिक विफलता की तस्वीर बनकर सामने आई है, जहां भीड़ का गुस्सा कानून से ऊपर हो जाता है और न्याय का रास्ता हिंसा के जरिए तय किया जाता है। फिलहाल पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है, इलाके में अतिरिक्त बल तैनात किया गया है और स्थिति को नियंत्रण में लाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन इस घटना ने एक बड़ा सवाल छोड़ दिया है—क्या आम नागरिक अब भी सुरक्षित है, या कानून का डर सचमुच खत्म होता जा रहा है?

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