Home » International » होर्मुज पर अमेरिका को झटका, UNSC में रूस-चीन का वीटो, प्रस्ताव खारिज

होर्मुज पर अमेरिका को झटका, UNSC में रूस-चीन का वीटो, प्रस्ताव खारिज

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की कोशिशों को बड़ा झटका

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली / संयुक्त राष्ट्र, 8 अप्रैल 2026

खाड़ी क्षेत्र में पिछले करीब 40 दिनों से जारी तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका को एक बड़ा कूटनीतिक झटका लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और वहां फंसी अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए लाया गया प्रस्ताव रूस और चीन के वीटो के कारण पास नहीं हो सका। इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर वैश्विक शक्तियों के बीच गहरी मतभेद मौजूद हैं और फिलहाल कोई एकमत समाधान निकलना आसान नहीं दिख रहा है।

बहुमत के बावजूद प्रस्ताव क्यों नहीं हो पाया पास

प्रस्ताव को परिषद के अधिकांश सदस्य देशों का समर्थन हासिल था। कई देशों का मानना था कि होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट से वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ रहा है, इसलिए तुरंत कदम उठाना जरूरी है। लेकिन रूस और चीन ने अपने विशेष अधिकार यानी वीटो का इस्तेमाल करते हुए इस प्रस्ताव को रोक दिया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य होने के कारण इन दोनों देशों के पास यह अधिकार है कि वे किसी भी प्रस्ताव को अकेले ही रोक सकते हैं, चाहे बाकी सदस्य उसका समर्थन ही क्यों न कर रहे हों।

प्रस्ताव की पृष्ठभूमि और बहरीन की भूमिका

यह प्रस्ताव बहरीन की ओर से पेश किया गया था, जिसमें खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे जहाजों को राहत देने और समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाने की बात कही गई थी। शुरुआती मसौदे में कुछ सख्त प्रावधान भी शामिल थे, जिनमें संभावित अंतरराष्ट्रीय निगरानी और सुरक्षा उपायों का जिक्र था। हालांकि, रूस और चीन की आपत्तियों को देखते हुए इस मसौदे को काफी हद तक नरम किया गया, लेकिन इसके बावजूद दोनों देशों ने इसे असंतुलित बताते हुए खारिज कर दिया।

रूस और चीन का तर्क: संतुलन और बातचीत जरूरी

रूस और चीन का साफ कहना है कि इस तरह के प्रस्ताव हालात को सुधारने के बजाय और ज्यादा जटिल बना सकते हैं। उनका मानना है कि अगर किसी भी पक्ष पर दबाव डालने की कोशिश की जाती है, तो इससे तनाव और बढ़ सकता है। दोनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि इस पूरे मुद्दे का हल केवल बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए ही निकाला जा सकता है, न कि किसी एकतरफा या दबाव वाले कदम से। उनका यह भी कहना है कि प्रस्ताव में क्षेत्रीय संतुलन और सभी पक्षों की चिंताओं को ठीक से जगह नहीं दी गई थी।

अमेरिका की कड़ी प्रतिक्रिया और आरोप

इस घटनाक्रम के बाद अमेरिका ने रूस और चीन के रुख पर कड़ी नाराजगी जताई है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम सीधे तौर पर ईरान के पक्ष में खड़ा होने जैसा है। अमेरिका का तर्क है कि होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद रहना न केवल अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खतरा है, बल्कि इससे ऊर्जा आपूर्ति भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। अमेरिका का यह भी कहना है कि अगर इस मार्ग को जल्द नहीं खोला गया, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य का वैश्विक महत्व

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है। इस रास्ते से रोजाना बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है, जो एशिया, यूरोप और अन्य हिस्सों तक पहुंचती है। पिछले कई हफ्तों से इस मार्ग पर रुकावट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता देखी जा रही है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है और कई देशों को अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर चिंता सताने लगी है। ऐसे में इस मार्ग का सुचारु रूप से चलना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी माना जाता है।

खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता तनाव और उसके असर

खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने न केवल राजनीतिक बल्कि आर्थिक स्तर पर भी असर डाला है। जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से व्यापारिक गतिविधियां धीमी पड़ गई हैं। कई शिपिंग कंपनियों ने अपने रास्ते बदलने शुरू कर दिए हैं, जिससे लागत बढ़ रही है और समय भी ज्यादा लग रहा है। इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है, क्योंकि तेल और गैस की कीमतें बढ़ने से रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं।

संयुक्त राष्ट्र में बढ़ती खाई और भविष्य की चुनौतियां

इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी दिखा दिया है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अंदर बड़ी शक्तियों के बीच मतभेद कितने गहरे हैं। एक तरफ अमेरिका और उसके सहयोगी हैं, जो तुरंत कार्रवाई की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ रूस और चीन जैसे देश हैं, जो संतुलन और बातचीत पर जोर दे रहे हैं। ऐसे में किसी भी बड़े फैसले पर सहमति बनाना मुश्किल होता जा रहा है। यह स्थिति आने वाले समय में और भी जटिल हो सकती है, खासकर तब जब क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है।

आगे का रास्ता: कूटनीति ही एकमात्र विकल्प

फिलहाल इस मुद्दे का कोई तात्कालिक समाधान नजर नहीं आ रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आगे कूटनीतिक स्तर पर क्या पहल होती है और क्या कोई ऐसा रास्ता निकलता है, जिससे सभी पक्षों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए समाधान निकाला जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बातचीत का रास्ता नहीं अपनाया गया, तो हालात और बिगड़ सकते हैं, जिसका असर पूरी दुनिया को झेलना पड़ेगा।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments