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अमेरिका-इजरायल का ‘बौद्धिक हमला’? 30 से ज्यादा विश्वविद्यालयों को बनाया निशाना, ईरान का फूटा गुस्सा

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | तेहरान | 4 अप्रैल 2026

अब किताबों पर बम गिर रहे हैं—ईरान

मध्य-पूर्व में चल रही जंग अब उस खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है जहां गोलियां सिर्फ सीमाओं पर नहीं, बल्कि दिमागों और भविष्य पर चलाई जा रही हैं। ईरान ने बेहद आक्रामक अंदाज में आरोप लगाया है कि United States और Israel ने मिलकर उसके 30 से ज्यादा विश्वविद्यालयों को निशाना बनाया है, जो किसी भी अंतरराष्ट्रीय युद्ध नियमों की खुली धज्जियां उड़ाने जैसा है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि ये हमला सिर्फ इमारतों पर नहीं, बल्कि शिक्षा, रिसर्च और आने वाली पीढ़ियों के सपनों पर सीधा वार है।

सिर्फ मिसाइल नहीं, मानसिकता भी खतरनाक —ईरान

ईरान के शिक्षा और विज्ञान तंत्र से जुड़े अधिकारियों ने इस कार्रवाई को “बौद्धिक नरसंहार” तक करार दिया है। उनका कहना है कि जब एक देश विश्वविद्यालयों को निशाना बनाता है, तो वह केवल वर्तमान को नहीं बल्कि भविष्य को खत्म करने की कोशिश करता है। तेहरान के प्रतिष्ठित कैंपसों से लेकर छोटे शहरों के शैक्षणिक संस्थानों तक—हर जगह तबाही के निशान बताए जा रहे हैं।

ईरान का साफ आरोप है कि यह सब सोची-समझी रणनीति के तहत किया गया ताकि देश की वैज्ञानिक क्षमता, तकनीकी विकास और युवाओं की सोच को कुचल दिया जाए। “अगर आप लैब और लाइब्रेरी पर बम गिरा रहे हैं, तो आप किसी सेना से नहीं, बल्कि एक सभ्यता से लड़ रहे हैं”—ईरानी प्रवक्ताओं के तीखे बयान ने वैश्विक मंच पर हलचल मचा दी है।

जंग का गंदा चेहरा: अब स्कूल-कॉलेज भी सुरक्षित नहीं

यह घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि यह युद्ध अब पारंपरिक सीमाओं को तोड़ चुका है। पहले जहां सैन्य ठिकाने, एयरबेस और हथियार डिपो निशाने पर होते थे, अब वहीं स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय भी इस जंग की चपेट में आ रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह ट्रेंड जारी रहा, तो आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। लाखों छात्र पढ़ाई छोड़ने को मजबूर होंगे, रिसर्च रुक जाएगी और एक पूरी पीढ़ी अंधकार में धकेल दी जाएगी।

दुनिया खामोश क्यों? उठ रहे बड़े सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पर चुप क्यों है? क्या वैश्विक शक्तियां इस तरह के हमलों को अनदेखा कर रही हैं? क्या “मानवाधिकार” और “युद्ध के नियम” सिर्फ कमजोर देशों के लिए हैं?

ईरान ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर इस मुद्दे पर वैश्विक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वह इसे अंतरराष्ट्रीय अदालतों तक ले जाएगा और जवाबी कार्रवाई से भी पीछे नहीं हटेगा।

यह सिर्फ युद्ध नहीं, सोच पर हमला है

यह पूरा मामला अब केवल मिसाइलों और हवाई हमलों तक सीमित नहीं रहा। यह एक ऐसी लड़ाई बन चुका है जिसमें कलम बनाम बारूद आमने-सामने हैं। अगर विश्वविद्यालय सच में निशाना बनाए जा रहे हैं, तो यह मानव सभ्यता के लिए सबसे खतरनाक संकेत है।

ईरान का गुस्सा सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और वैचारिक भी है—और अगर हालात ऐसे ही रहे, तो यह टकराव आने वाले दिनों में और ज्यादा भयावह रूप ले सकता है।

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