एबीसी नेशनल न्यूज | लंदन/वॉशिंगटन | 15 मार्च 2026
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के बीच एक बड़ा सैन्य घटनाक्रम सामने आया है। जानकारी के अनुसार अमेरिका के तीन B-1B लांसर रणनीतिक बॉम्बर ब्रिटेन के RAF फेयरफोर्ड एयरबेस पर उतर गए हैं। माना जा रहा है कि यह वही विमान हैं जिन्होंने ब्रिटेन की जमीन से उड़ान भरकर ईरान के खिलाफ अमेरिकी हवाई हमले के मिशन में हिस्सा लिया।
सैन्य सूत्रों के मुताबिक यह पहली बार माना जा रहा है कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ किसी सैन्य कार्रवाई के लिए ब्रिटेन के एयरबेस का इस्तेमाल किया है। इस घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को और ज्यादा अंतरराष्ट्रीय बना दिया है, क्योंकि अब इस संघर्ष में यूरोप के सैन्य ठिकानों की भूमिका भी सामने आने लगी है।
B-1B लांसर अमेरिकी वायुसेना के सबसे शक्तिशाली लंबी दूरी के बॉम्बरों में गिने जाते हैं। यह सुपरसोनिक रणनीतिक विमान भारी मात्रा में पारंपरिक बम और मिसाइलें ले जाने की क्षमता रखते हैं और इन्हें गहरे सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इन विमानों की तैनाती को युद्ध में एक बड़ा रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
ब्रिटेन के RAF फेयरफोर्ड एयरबेस को लंबे समय से अमेरिकी रणनीतिक बमवर्षकों के संचालन के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। हालांकि इस बार स्थिति इसलिए ज्यादा संवेदनशील मानी जा रही है क्योंकि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच सीधा सैन्य टकराव जारी है और इस दौरान ब्रिटेन की जमीन से उड़ान भरकर किए गए हमले ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।
रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि अगर यह पुष्टि हो जाती है कि ईरान के खिलाफ हमले के लिए ब्रिटेन के एयरबेस का इस्तेमाल हुआ है, तो इससे युद्ध का दायरा और व्यापक हो सकता है। इससे यूरोपीय देशों की भूमिका पर भी सवाल उठ सकते हैं और ईरान की प्रतिक्रिया भी और तीखी हो सकती है।
पश्चिम एशिया में पिछले कुछ दिनों से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। ईरान और इजरायल के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों का सिलसिला जारी है, जबकि अमेरिका खुले तौर पर इजरायल के समर्थन में खड़ा दिखाई दे रहा है। ऐसे में ब्रिटेन के एयरबेस से उड़ान भरने वाले अमेरिकी बॉम्बरों की खबर ने वैश्विक स्तर पर चिंता और कूटनीतिक हलचल को और बढ़ा दिया है।
अगर युद्ध इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी गहरा प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में ईरान इस सैन्य घटनाक्रम पर किस तरह की प्रतिक्रिया देता है।




